सुजीत कुमार झा

बाहर—
हमर हारक चर्चा होइत अछि,
भीतर—
हम जीतक नक्सा बनबैत छी ।

बाहर—
हमर संघर्ष
तमाशा बनाओल जाइत अछि,
भीतर—
हम सफलताक कथा
धीरे–धीरे गढ़ैत छी ।

बाहर—
हमर हारक कथा
बारम्बार सुनाओल जाइत अछि,
भीतर—
हम जीतक
नव अध्याय पलटैत छी ।

बाहर—
लोक अन्त्य घोषित करैत अछि,
मुदा भीतर—
हम शान्त भऽ
नव शुरुआत लिखैत छी ।

ओ नहि देखैत अछि—
जे शोर बाहर अछि,
आ शक्ति भीतर ।

ओ नहि बुझैत अछि—
जे हार
अन्तिम सत्य नहि,
मात्र एकटा पड़ाव अछि ।

एहि लेल—
हम चुप छी,
मुदा रुकल नहि छी—
भीतर
हमर यात्रा
एखनहुँ जारी अछि ।

किए तँ—
सही जीत
ओहिदिन होइत अछि,
जखन भीतरक विश्वास
बाहरक शोरसँ

बेसी प्रबल भऽ जाइत अछि ।