घर सोझाके अशोक गाछ

मैथिली कविताः घर सोझाके अशोक गाछ

  – चन्द्रकिशोर कहियो सुसकैय कहियो घेघिआईय शब्द गुमसुम परल रहैय जस के तस लेकिन पुरान बाकस जकां बचैले हय…

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