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कोजाग्रत पूर्णिमाक मिथिलाञ्चलमे धूम

सुजीतकुमार झा ।


कोजगरा पूर्णिमाके जनकपुरमे विशेष तैयारी भऽ रहल अछि । कन्यागत पक्षसँ भार आएत, बरके चुमाओन हएत आ फेर भोज भतेर सेहो हएत । एहि काजमे जानकी मन्दिर सेहो पाछा नहि अछि । ओहुठाम बडके उत्सव तैयारी चलि रहल अछि । मिथिलाञ्चलमे कोजगराक महत्व अत्याधिक रहल अछि । एकरे संकेत ई उत्सवसभक तैयारी अछि । एहि दिन जे जेना हुए जिनका घरमे कोजगरा नहिओ होइत अछि ओहि घरक लोक नीकनिकुत भोजन करबाक संगहि पान आ मखान अवश्य खाएल करैत छथि । कोजगरा पूर्णिमाके दशमीक समापनक रुपमे सेहो लेल जाइत अछि ।
जानकी मन्दिरमे कोजगरा महोत्सव


कोजगरा पूर्णिमाक दिन जनकपुरक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जानकी मन्दिरमे कोजगरा महोत्सव होइत अछि । ओहि अवसरपर महोत्तरीक रतौलीके स्व. महेन्द्र प्रसाद ठाकुरक घरसँ भार अबैत अछि । ओ भारक समान लऽ कऽ राम जानकीक चुमाओन कएल जाइत अछि । ओहि अवसरपर जानकी मन्दिरमे भजन किर्तनक आयोजना सेहो कएल जाइत अछि । ओहिठाम हास परिहासक कार्यक्रम सेहो प्रत्येक बर्ष होइत आएल जानकी मन्दिरक महन्थ राम तपेश्वर दास वैष्णव कहैत छथि ।


भारमे पान, मखान, लड्डु, खाजा, चाउर, दालि तरकारी, राम जानकीक कपड़ा आदि रहैत अछि । स्व. ठाकुरक घरसँ परम्परागत हिसाबसँ कन्हापर भार आनल जाइत अछि । ई परम्परा १ सय १३ बर्षसँ चलैत आबि रहल अछि । भार पठाबएके तैयारी एक महिना पहिनेसँ शुरु भऽ जाइत अछि महेन्द्र प्रसाद ठाकुरक परपोता नविन ठाकुर कहैत छथि । एहि दिन लोक मखान, बतासा राम जानकीके चढाओल करैत छथि ।
नवविवाहितक घरमे सेहो कोजगरा


नवविवाहित युवकसभके घरमे सेहो विशेष कोजगरा होइत अछि । एहि दिन सासुरसँ युवकसभके घरमे भार अबैत अछि । हुनकोसभके चुमाओन कएल जाइत अछि । एहि पावनिमे संलग्न रहल जलेश्वरबाली महिला कहैत छथि आँगनमे अष्टदल अरिपण देल जाइत अछि । ओहिपर डाला राखि पुरहर, पातिल, कलश राखल जाइत अछि । कोजगरा दिन दुरवाच्छत देबाक सेहो परम्परा रहल अछि । दुरवाच्छत देलाक बाद जिनका घरमे कोजगरा होइत अछि ओहिठाम भोजक सेहो व्यवस्था कएल गेल रहैत अछि ओ आगा कहैत छथि । कहल जाइत छैक कोजगरा दिनक भोजक सम्पूर्ण व्यवस्था बेटीबला करैत अछि । भोजक बाद पान आ मखान सेहो बटाइत अछि । एहि दिन कौड़ी खेलबाक सेहो मिथिलाञ्चलमे परम्परा रहल अछि ।

चूमाओन क बाद कम सं  कम  पाँच टा ब्राह्मण दूर्वाक्षत दैत छैथ

दूर्वाक्षत मंत्र 

“ओम आब्रह्मन ब्राह्मणों ब्रह्मवर्चसी जायतांमा राष्ट्रे राजन्यः शूर इष्व्योति व्याधी महारथो जयताम दोग्घ्री धेनुढा न डवानाशुः सप्तिः पुर्न्ध्रिषा विष्णुर थेषटा सभेयो युवा स्य यजमानस्य वीरो जयताम निकामे निकामे नःपज्जॅन्यो वर्षतु फलवत्यो न ओषधय पच्यनताम्  योगक्षेमो न कल्पताम्  I

मंत्रथाँय सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः शत्रुणा बुद्धिनाशोस्तु मित्राणामुदयसत्व  II
चन्द्रमासँ अमृत बर्षा
पौराणिक मान्यता एवं शरद ऋतु, पूर्णाकार चन्द्रमा, पूरा मिथिलाञ्चलमे उत्सवक माहोल, एहि सभके संयुक्त रूपके यदि कोनो नाम अछि तऽ ओ नाम अछि शरद पूर्णिमा ।
शरद पूर्णिमा अर्थात कोजाग्रत पूर्णिमाक राति चन्द्रमाक किरणसँ अमृतक बर्षा होइत अछि । इएह पूर्णिमाक रातिमे भगवान श्रीकृष्ण गोपिसभ संग महारास कएने छलथि । आसिन महिनाक शुक्ल पक्षक पूर्णिमाके शरद पूर्णिमा वा रास पूर्णिमाक नामसँ सेहो जानल जाइत अछि ।


पूर्णिमाक राति चन्द्रमा अमृतक वर्षा पृथ्वीपर करैत अछि । वर्षा ऋतुक जरावस्था आ शरद ऋतुक बाल रूपक ई सुन्दर संयोग सभकिओके लोभावैत अछि ।
शरद पूर्णिमाक रातिमे चन्द्रमा पृथ्वीक सभसँ निकट होइत अछि आ चन्द्रमा अपन सौन्दर्यसँ परिपूर्ण रहैत अछि । वैज्ञानिकसभ सेहो मानैत छथि जे शरद पूर्णिमाक राति सुस्वास्थ्य आ सकारात्मकता देबएबला होइत अछि । किए तऽ चन्द्रमा पृथ्वीक बहुत समीप रहैत अछि ओहि राति । ओहि राति चन्द्रमाक किरणमे विशेष प्रकारक लवण आ विटामिन मिश्रित रहैत अछि । पृथ्वी नजदिक रहलाक कारण चन्द्रमाक किरण सीधा जखन खाद्य पदार्थपर पड़ैत अछि तऽ खाद्य पदार्थक गुणवत्तामे वृद्धि होइत अछि वैज्ञानिकसभ सेहो मानैत छथि ।
प्राचीन कालसँ शरद पूर्णिमाके महत्वपूर्ण पावनिके रुपमे मानल जाइत अछि । शरद पूर्णिमासँ हेमन्त ऋतुक शुरुआत होइत अछि । एहिके महत्व आ उल्लासक विधिक सम्बन्धमे ज्योतिषाचार्य प्रेमनारायण शास्त्रीक अनुसार शरद पूर्णिमाक महत्व शास्त्रसभमे सेहो वर्णित अछि ।
प्रत्येक महिनामे पूर्णिमा अबैत अछि मुदा शरद पूर्णिमाक महत्व सभ पूर्णिमासँ किछु अधिक होइत अछि ।
ज्योतिषाचार्य शास्त्री कहैत छथि, एहि रातिमे चन्द्रमा अपन समस्त कलाक संग पृथ्वीपर अमृत वर्षा करैत रहैत अछि । ओ आगा कहैत छथि मध्य रातिमे होबएबला एहि अमृत वर्षाक लाभ मानवके मिले इएह उद्देश्यसँ चंद्रोदयके समयमे आकाशक निचा खीर वा दूध राखल जाइत अछि, जाहिके सेवन मध्य रातिके १२ बजेके बाद मात्रे कएल जाइत अछि । मान्यता तऽ ई सेहो अछि जे एहि प्रकार रोगी रोगमुक्त सेहो भऽ जाइत अछि । एहि अतिरिक्त खीर देवतासभक लेल प्रिय भोजन सेहो अछि ।
रातिमे राखल खीरके ग्रहण कएलासँ विभिन्न प्रकारक रोगसँ मुक्ति भेटैत अछि आ आयु सेहो बढि जाइत अछि । एहि पूर्णिमाक सभसँ बडका उपहार ई अछि जे ओहि राति जे चन्द्रमाक किरणके स्नान करैत अछि ओकर तन आ मोन स्वस्थ रहैत अछि ।
इएह रातिमे चन्द्रमाक तेज सभसँ तेजवान आ ऊर्जावान होइत अछि । नारद पुराणक अनुसार शरद पूर्णिमाके धवल चांदनीमे माता लक्ष्मी अपन वाहन उल्लूपर सवार भऽ अपन करकमलमे वर आ अभय लऽ रातिमे पृथ्वीक भ्रमण करैत छथि । ओहि दिन माता लक्ष्मी ई देखैत छथि जे अपन कत्र्तव्यके लऽ कऽ के जाग्रित अछि । तएँ एहि पूर्णिमामे माता लक्ष्मीक उपासना कएल जाइत अछि । पूर्णिमा कोनो प्रहरमे परए मुदा माता लक्ष्मीक पूजा ओहि दिन सन्ध्या काल करबाक चाही । पूजामे लक्ष्मीजीक प्रतिमाक अतिरिक्त कलश धूप, दुर्वादल, कमलके फूल, कौड़ी, सूपारी धान, सिन्दूर आ लड्डु प्रमुख पूजा सामाग्री होइत अछि ।

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