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मैथिली कविताः मातृभाषा मैथिली

#अयोध्यानाथ चौधरी

विद्यापतिक मातृभाषा
भारती-मंडनक भाषा
लखिमा रानीक भाषा
विद्वान विदुषीक भाषा
सर्बसाधारणक भाषा
पूर्ण जाग्रत भेल आशा।
***
आहाँ भागमन्त छी
आहाँ जीबन्त छी
प्राती आ सांझ मे
सोहर-समदाउन मे
उदासी-वटगवनी मे
फागु आ नचारी मे
बच्चा क बोल मे
ललना क ठोर मे
बुढ क जवान मे
प्रणाम मे, सलाम मे
जेना मोन बाजिली
मातृभाषा मैथिली ।
***
मिथिला मे रह’ बला
सब बजैछी मैथिली
पाण्डित्यपूर्ण वा ठेठी
सबटा छैक मैथिली
सब छी अपने खास
केओ नहि आन छी
जन्मे आ संस्कार सँ
सब केओ महान् छी
मिथिला क काननमे
सब केओ पुष्प छी
गौर,श्याम बा कारी
कतौ एके रंग छी
***
बिभेद सब बिसरिकय
मुक्तिगीत गाबि ली
सबकेओ नियारि ली
अभियान साधि ली
मोन मे अराधि ली
जय दुर्गा,जय काली
सस्वर शपथ खा’ ली
मैथिली, माँ मैथिली
मातृभाषा मैथिली ।

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