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माता सरस्वतीके विद्यालयमे रहए देल जाए

अमरचन्द्र अनिल ।


सरस्वती पूजाक नामपर जनकपुरक चौक चौकपर सरस्वती पूजा होबए लागल अछि । विद्यालयसँ बडका उत्सव सडकपर होबए लागल अछि । विद्यार्थीसँ बेसी उत्साहित चौकक युवासभ होबए लागल अछि । संख्योके हिसाबसँ विद्यालयसँ बेसी चौकपर मूर्ति रखाइत अछि । लोक दर्शनो करबाक लेल विद्यालयमे जेनाई छोडि रहल अछि । सभके चाही लहक चहक ओ लहक चहक चौकपर मात्र भेट सकैत अछि ।
माता सरस्वतीके निष्ठापूर्वक पूजा होएबाक चाही । मुदा एहिठाम डिजे साउण्डमे भोजपुरीक अश्लिल गीत लगा कऽ मनाओल जाइत अछि । सरस्वतीके सवारी हंसवाहिनी अछि मुदा एहिठाम स्कुटीपर राखल जाइत अछि । एहिबेर स्कुटीपर राखल गेल अछि अगिला बेर आओर कि कि पर राखल जेतीह किछु नहि कहल जा सकैत अछि । विणाके स्थानमे बन्दुको हुनका हाथमे थमा सकैत अछि । अपना जे मोन लागल से करएके अछि तऽ किछो कऽ दियौ ।

माता सरस्वतीके विद्यालयसँ निकालएके दुष्परिणामसभ देखाएमे आबए लागल अछि । जे विद्यालयमे अनुशासन भऽ सकैत अछि ओ चौकपर वा सडकपर नहि भऽ सकैत अछि । ओना भसान कालमे जे दृश्य देखलहुँ कहल नहि जा सकैत अछि । विद्यालयमे भेल सरस्वती पूजाके भसाबए काल छात्र छात्रा मात्रे नहि शिक्षक शिक्षिका सेहो डिजेमे नाच कऽ रहल छलथि । आस्थाक पर्व विकृत भऽ रहल अछि । एहन गीतसभ बाजि रहल छल सामान्यतया लोक घरमे सेहो नहि सुनि सकैत अछि तखन धार्मिक स्थलमे कोना सुनि रहल अछि । 

माता सरस्वतीके विद्यालयसँ निकालएके दुष्परिणामसभ देखाएमे आबए लागल अछि । जे विद्यालयमे अनुशासन भऽ सकैत अछि ओ चौकपर वा सडकपर नहि भऽ सकैत अछि । ओना भसान कालमे जे दृश्य देखलहुँ कहल नहि जा सकैत अछि । विद्यालयमे भेल सरस्वती पूजाके भसाबए काल छात्र छात्रा मात्रे नहि शिक्षक शिक्षिका सेहो डिजेमे नाच कऽ रहल छलथि । आस्थाक पर्व विकृत भऽ रहल अछि । एहन गीतसभ बाजि रहल छल सामान्यतया लोक घरमे सेहो नहि सुनि सकैत अछि तखन धार्मिक स्थलमे कोना सुनि रहल अछि ।

संस्कार बजारमे नहि भेटैत छैक एकरा किनल नहि जाइत छैक । एकरा अपनेसँ बनाबए पड़ैत छैक । एकरा सुन्दर बनाबएके लेल पूजाक माहौल देबाक लेल सांस्कृतिकविद सभके आगा आबए पडत ।

एकरा उत्सव मात्रे रहए देल जाए ओहो एहन उत्सव जाहिमे लोक शान्त भावसँ पूजा कऽ सकए । मुदा नाचे गान करबाक अछि तऽ बर्षमे कतेको एहन उत्सव अछि जाहिमे नाच गान कएल जा सकैत अछि । जे माता विद्या दैति छथि, बुद्धि दैति छथि, विवेकशील बनबाक प्रेरणा दैति छथि हुनकर जयन्तीपर एहि प्रकारसँ नाचगान करब गलत संस्कार अछि । कतेक ठाम तऽ बियरके बोतल लऽ कऽ नाच करैत सेहो देखल गेल । ओहि दिन फैशन देखाएब सामान्य बात भऽ रहल अछि ।
संस्कार बजारमे नहि भेटैत छैक एकरा किनल नहि जाइत छैक । एकरा अपनेसँ बनाबए पड़ैत छैक । एकरा सुन्दर बनाबएके लेल पूजाक माहौल देबाक लेल सांस्कृतिकविद सभके आगा आबए पडत । मात्र मिथिला संस्कृति खतरामे अछि कहि देलासँ नहि हएत एहिके लेल काज करए पडत । माहौल बनाबए पडत ।

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