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की सम्भव अछि सीतायन स्कल्पचर ?

रोशनकुमार झा


जनकपुक पिडारी चौकपर पहुँचिते मन हर्षित भऽ जाईत अछि । जनकपुरक प्रमुख प्रवेशद्वारपर, जनकपुरक प्रमुख पहिचान अर्थात जानकी जन्मसँ सम्बन्धित मुर्तिकला ‘स्कल्पचर’ जानकी जन्म वाटिका एकदम सुन्दर आ मनोभावन अछि । ईएह कारण अछि जे जनकपुर आवएबला अधिकांश लोक ओहिके पृष्ठभुमी बनाक ‘सेल्फी’ खिचैत अछि आ अपन समाजिक सञ्जालके शोभा बढबैत अछि । जनकपुर की अछि आ एकर महत्व की अछि तकर सहि जवाब ई मुर्ति देबएमे सक्षम अछि । एहि कृत्यके लेल पीडारी चौकक नागरिक समाज, दाता, संरक्षक आ परिकल्पनाकारके धन्यवाद देवही टा परत । हुनक सभक सत्प्रयाससँ जनकपुरके एकटा नव पहिचान स्तम्भ प्राप्त भेल अछि ।
जनकपुरके दर्शाबएके लेल किछु समय पहिने धरि जानकी मन्दिर मात्रेटा छल ।

विरगंजके चिन्हाबएके लेल घन्टाघर, दिल्लीकेँ चिन्हाबएके लेल लोटस टेम्पल, लण्ढनकेँ चिन्हाबएके लेल लण्डन ब्रिजकेँ देखाएल जाईत अछि । काठमाण्डूके चिन्हाबएके लेल पशुपति, स्वम्भु आ काष्टमण्डपसहित आर्किटेक्टकेँ देखाएल जाईत अछि । अर्थात कोनो ठामक पहिचानके लेल ओतएके महत्वपुर्ण आर्किटेक्ट एकटा प्रतीककेँ रुपमे लेल जाईत अछि । जकर जतेक प्रतीक चिन्ह ओ ओतेक प्रतिष्ठित । एहनमे जनकपुरक पहिचानक हेतु एकटा नव प्रतीक भेटनाई एकदम खुशीक बात अछि । 

रामानन्द प्रवेशद्वार निर्माण भेलाके बाद जनकपुरके एकटा आओर प्रतीक चिन्ह प्राप्त भेल । एखन जानकी जन्म वाटिका सेहो प्रतिक चिन्हके रुपमे देखल जा रहल अछि ।
प्रतीक चिन्हसँ अपन स्थानके चिन्हाएब पुरान परम्परा अछि । विरगंजके चिन्हाबएके लेल घन्टाघर, दिल्लीकेँ चिन्हाबएके लेल लोटस टेम्पल, लण्ढनकेँ चिन्हाबएके लेल लण्डन ब्रिजकेँ देखाएल जाईत अछि । काठमाण्डूके चिन्हाबएके लेल पशुपति, स्वम्भु आ काष्टमण्डपसहित आर्किटेक्टकेँ देखाएल जाईत अछि । अर्थात कोनो ठामक पहिचानके लेल ओतएके महत्वपुर्ण आर्किटेक्ट एकटा प्रतीककेँ रुपमे लेल जाईत अछि । जकर जतेक प्रतीक चिन्ह ओ ओतेक प्रतिष्ठित । एहनमे जनकपुरक पहिचानक हेतु एकटा नव प्रतीक भेटनाई एकदम खुशीक बात अछि ।
मुदा प्रश्न उठैत अछि जे की ई एकटा स्कल्पचर पर्याप्त अछि ? सम्भवतः नहि । जनकपुरमे एहन आओर स्कल्पचरके आवश्यक्ता अछि । जनकपुर प्रदेश नम्बर २के राजधानी बनए लागल अछि । आ ओहुसँ बेसी जनकपुरके धार्मिक पर्यटकीय क्षेत्रके रुपमे विकास करए चाहै छी तखन ई एकहिटा मुर्ति पर्याप्त नहि अछि ।

जनकपुरके सेहो सुन्दर बनएबाक लेल एहन स्कल्पचर बनौनाई आवश्यक अछि । 
जनकपुरमे स्कल्पर यदि बनाओल जाए तऽ केहन ? उत्तर बहुत सहज अछि । जनकपुरक पहिचान जनक आ जानकी तएँ हुनकासँ सम्बन्धित स्कल्पचर बनाओल जाए । एहिके लेल सीतायनके आधार बनाओल जा सकैत अछि । मिथिला अन्तरगृह परिक्रमा क्षेत्रके विभिन्न स्थानपर सीताक जिवनसँ सम्बन्धित स्कल्पचर बनाएब एकदम उपयुक्त हएत । 

जनकपुरके विभिन्न ठामपर विभिन्न प्रकारक स्कल्पचर बनाबए पड़त । विभिन्न देशमे सडक कातमे वा मध्यमे विभिन्न प्रकारक स्कल्पचर बनाबएके परम्परा अछि । युरोपक लगभग सभ देशमे सडकके कातमे विभिन्न प्रकारक कलाकृति देखएमे आओत । मुलरुपसँ ओहन स्कल्पचर समाजिक, ऐतिहासिक, साँस्कृतिक पहिचान झल्काबएबला होईत अछि । किछु स्कल्पचर मनोरञ्जनसँ सम्बन्धित सेहो रहैत अछि । जनकपुरके सेहो सुन्दर बनएबाक लेल एहन स्कल्पचर बनौनाई आवश्यक अछि ।
जनकपुरमे स्कल्पर यदि बनाओल जाए तऽ केहन ? उत्तर बहुत सहज अछि । जनकपुरक पहिचान जनक आ जानकी तएँ हुनकासँ सम्बन्धित स्कल्पचर बनाओल जाए । एहिके लेल सीतायनके आधार बनाओल जा सकैत अछि । मिथिला अन्तरगृह परिक्रमा क्षेत्रके विभिन्न स्थानपर सीताक जिवनसँ सम्बन्धित स्कल्पचर बनाएब एकदम उपयुक्त हएत । जखन पीडारी चौकपर जानकी जन्म वाटिका बनि गेल अछि तऽ ओहिसँ आगु वंशी चौकपर शिवधनुष पुजन आ जनकपुर चुरोट कारखानाक गेटपर फुलवारी लिला बनाओल जा सकैत अछि ।
जनकपुरक जानकी मन्दिर स्थित विद्युतीय संग्रहालयजकाँ जनकपुरक सडकके खुला संग्रहालय बनौनाई उत्तम हएत । जानकी मन्दिरके संग्रहालय देखबाक लेल औषतमे एक हजार गोटे प्रत्येक दिन अबैत अछि । यदि खुल्ला संग्रहालय होई तऽ कम्तिमे दैनिक १० हजार पर्यटकके आशा काएल जा सकैत अछि ।
नेपालमे सभसँ बेसी पर्यटक आबएबला स्थान जनकपुर अछि । विवाहपञ्चमी, रामनवमी ,जानकी नवमी, मिथिला मध्यमा परिक्रमासहितके महापर्वसभक कारण जनकपुरमे पर्यटकके कोनो कमी नहि अछि । मुदा, एतएके पर्यटनके सभसँ बडका विडम्बना ई छैक जे पर्यटकसभ टिकबे नहि करैत छै । आ ओहुमे जे पर्यटक अबैत छथि, से न्युन खर्चा करएबला । एहनमे पर्यटकके टिकेनाई आ हुनका सभसँ बेसी खर्च कराबएके वातावरण बनेनाई एतयके प्रमुख आवश्यक्ता अछि । जँ स्कल्पचरके निर्माण कएल गेल तऽ ई पर्यटकसबके हेतु कम्तीमे एक दिनके ‘टुर प्याकेज’ भ’ सकैत अछि आ अहिसँ हुनकर सभक यात्राकेँ कम्तीमे एक दिन लम्बा कएल जा सकैत अछि । ई स्कल्पर देखाबए लेल विदेशी पर्यटकसभ सेहो खुब आकर्षित हएत ।

जनकपुरक जानकी मन्दिर स्थित विद्युतीय संग्रहालयजकाँ जनकपुरक सडकके खुला संग्रहालय बनौनाई उत्तम हएत । जानकी मन्दिरके संग्रहालय देखबाक लेल औषतमे एक हजार गोटे प्रत्येक दिन अबैत अछि । यदि खुल्ला संग्रहालय होई तऽ कम्तिमे दैनिक १० हजार पर्यटकके आशा काएल जा सकैत अछि । 

मित्रराष्ट्र भारत रामायण सर्किटके निर्माणमे व्यापक तदारुकता देखा रहल अछि । जँ रामायण सर्किटके निर्माण भेल तऽ जनकपुरमे पर्यटकके भीड बारहो महिना लागल रहत । ओ पर्यटकसभकेँ की देखेबै ? जनकपुरक सम्बन्धमे लोकके धारणा बहुत फरक अछि । जखन भारतक पर्यटक जनकपुर आबएके सोचै छैक ओ हुनका सभके मोनमे एकटा गजबके रोमाञ्च रहैत अछि जे जनकपुर जाईछी । जनकपुरक वर्णन सबतरि जेहन भेल छै, ओहिसँ एहन रोमाञ्च होएब स्वभाविको छै । मुदा, जखन ओ सब जनकपुर अबै छथि त हुनकर सबहक रोमाञ्चका एकदमसँ निराशमे बदलि जाईत छै । ओकर सबहक परिकल्पनाके निराशामे बदलैत प्रत्यक्षरुपसँ देखने छी । ताएँ एकबेर जनकपुर आएल पर्यटक सम्भवतः दोहराक जनकपुर नहि अबैत अछि ।
ओ रोमाञ्चकताके कायम राखएके हेतु आ पुनः पुनः जनकपुर आएबाक लेल आकर्षित करबाक हेतु सेहो किछु विशेष कएनाई आवश्यक अछि । एहनमे सीतायन स्कल्पचर एकटा साधन भऽ सकैत अछि ।
जनकपुरमे स्कल्पचर बनाबएके लेल बडका समस्या सेहो नहि हेतैक । जखन पीडारी चौकक स्थानीय वासी पीडारी चौकपर जानकी जन्मवाटिका बनाबए सकैत अछि , तऽ वंशी चौकक स्थानीय वंशी चौकपर सेहो शिवधनुष पुजन स्कल्पचर बना सकैया ।
जनकपुर उपमहानगरपालिकामे नव नेतृत्व आएल अछि ।

जनकपुरमे लगानी करबाक लेल थाईलैण्ड सरकार एकदम ललायित अछि । थाई राजपरिवार अपनाके कुशवंशी आ जनकपुरके मामागाम बुझैत अछि । हुनकासभके किए नहि कहल जाए ? स्वभाविकरुपमे हुनका सभके सेहो आमन्त्रित कएल जा सकैत अछि । 

हुनकरसभक कार्यकाल सफल आ ऐतिहासिक होईक से ओहोसब चाहता । कम लगानीमे ५ वर्ष भितर ई परियोजना निर्माण कएल जा सकैत अछि । तएँ हुनकासबकेँ ध्यानाकर्षण कएनाई आवश्यक बुझाईत अछि ।
प्रदेशक राजधानी जनकपुर बनत से पक्का अछि । प्रदेश सरकार सेहो जनकपुरक सौन्दर्यीकरणमे तदारुकता देखाओत । ऐतिहासिक जनकपुर बचाउ अभियानके अभियन्ता राम अशिष यादव, जनकपुरक विकास प्रति प्रतिबद्ध परमेश्वर साह, विकासक हेतु सदैव क्रियाशील ज्ञानेन्द्र यादवसहितक व्यक्तिसब प्रदेश प्रतिनिधिक रुपमे चुनाएल छथि । हुनकरसभक ध्यान सेहो एहिपर आकृष्ट भऽ सकैत अछि ।
सभसँ बडका शक्ति मित्रराष्ट्र भारत अछि । हुनकासबद्वारा प्रस्तावित रामायण सर्किट परियोजनामे एहि परियोजनाके सेहो समावेश यदि कएल गेल तऽ बहुत सहज ढंगसँ एकर निर्माण सम्भव भऽ जाएत । वा एहिके एकटा अलगे परियोजनाकेँ रुपमे भारतके समक्ष प्रस्ताव काएल जा सकैत अछि ।
जनकपुरमे लगानी करबाक लेल थाईलैण्ड सरकार एकदम ललायित अछि । थाई राजपरिवार अपनाके कुशवंशी आ जनकपुरके मामागाम बुझैत अछि । हुनकासभके किए नहि कहल जाए ? स्वभाविकरुपमे हुनका सभके सेहो आमन्त्रित कएल जा सकैत अछि ।
समग्रमे देखल जाए तऽ अवसर बहुत रास अछि । आवश्यक्ता अछि तऽ ठोस योजना आ तत्परताके । जनकपुर उपमहानगरपालिका जँ एकर नेतृत्व करए तऽ एकदम ठिक रहत ।

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