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मिथिलाञ्चलमे मकर संक्रान्तिक धुम, माघ १ गते विशेष स्नान

सुजीत कुमार झा ।


सीतामढ़ीबाली तीनदिन पहिने बजारसँ तिल, चुरा, मुरही आ गुँड अनने छलीह । तिलवा, चुरलाई आ लाई बनौलीह । हुनके बगलमे रहल प्रेमनगरबाली कहैत छथि हम तऽ लाई सभ एक हप्त पहिने बना लेने छलहुँ । माघ १ गते मिथिलाञ्चलमे विशेष भोजन बनाओल जाइत अछि ।


राजनीतिकर्मी विभा ठाकुर कहैत छथि एहि दिन खिचड़िके बहुत महत्व रहैत अछि । एकरा घर घरमे विशेष प्रकारसँ बनाओल जाइत अछि । ओ एहिसँ जुड़ल एकटा फकरा सेहो कहैत छथि खिचड़ीक चारि यार घि पापर दही अचार । एहिमे बहुतरास परिकार बनाओल जाइत अछि ओ कहैत छथि ।
भोरे भोरे स्नान आ फेर किछु दान पुण्य आ विशेष प्रकारक भोजन एहि पावनिके महत्व रहल पुरोहित कार्यमे सक्रिय रहल पण्डित विद्यानन्द झा कहैत छथि । एहि दिन जनकपुरक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल गंगासागरमे सेहो स्नान करबाक परम्परा रहैत अछि । संक्रान्तिक दिन प्रत्येक बर्ष गंगासागरमे स्नान करएबला सभके भीड़ लागल रहैत अछि । बहुतो गोटे तऽ गंगासागरमे डुब्बी मारएके बाजी सेहो लगबैत छथि । जे जतेक डुब्बी मारैत अछि हुनका ओतेक तिलवा भेटत एहन बातसभ सुनबामे अबैत अछि । एहि दिन ज्येष्ठ लोकनि अपनासँ छोटके तिल चाउर आ गुँड सेहो खुवाबैत छथि ।
मकर संक्रान्तिक महत्व
मकर संक्रान्ति हिन्दु सभक प्रमुख पावनि सभमेसँ एक अछि । ई पावनि प्रत्येक बर्ष माघ महिनाक पहिल दिन अर्थात माघ १ गते मनाओल जाइत अछि । एहि दिनसँ सूर्य उत्तरायण होबए लगैत अछि जखन कि उत्तरी गोलार्ध सूर्य दिस घूमि जाइत अछि । ओना परम्परागत हिसाबसँ ई मानल जाइत अछि जे ओहि दिन सूर्य मकर राशिमे प्रवेश करैत अछि । एहि पावनिके वैदिक उत्सवके नाम सेहो देल जा सकैत अछि । मकर संक्रान्तिके दिन खिचडि अनिवार्य रुपसँ भोजनमे बनाओल जाइत अछि । एहि अतिरिक्त तिलवा , चुराके लाई, मुरहीक लाई आदि सेहो बनाओल जाइत अछि ।
एहि पावनिके सीधा सम्बन्ध प्रकृति, ऋतु परिवर्तन आ कृषिसँ अछि । प्रकृतिके कारकके रुपमे एहि पावनिमे सूर्य देवके पूजा कएल जाइत अछि जिनका शास्त्रमे भौतिक एवं अभौतिक तत्वक आत्मा कहल जाइत अछि ।
धर्म ग्रन्थमे उल्लेख


मकर संक्रान्तिक उद्गम बहुत बेसी प्राचीन नहि अछि । ईसा पूर्व एक सहस्त्र वर्ष पहिने ब्राह्मण एवं औपनिषदिक ग्रन्थमे उत्तरायणके ६ महिनाके उल्लेख पाओल जाइत अछि । उत्तरायणमे अयन शब्द आएल अछि जेकर अर्थ मार्ग वा स्थल होइत अछि । गृह्यसूत्रमे उदगयन उत्तरायणके द्योतक मानल जाइत अछि जाहिठाम स्पष्ट रूपसँ उत्तरायण आदि कालमे संस्कार करएके विधि वर्णित अछि । मुदा प्राचीन श्रौत, गृह्य एवं धर्म सूत्रमे उदगयन बहुत शताब्दि पूर्वसँ शुभ काल मानल जाइत अछि अतः मकर संक्रान्ति जाहिसँ सूर्यक उत्तरायण गति आरम्भ होइत अछि , राशिके चलनके बादमे पवित्र दिन मानल जाए लागल । मकर संक्रान्ति पर तिलके एतेक बेसी महत्व किए देल गेल से कहनाई कठिन अछि । सम्भवतः मकर संक्रान्तिके समय जाढ़ भेलाक कारण तिल जेहन पदार्थक प्रयोग कएल गेल हुए सम्भव अछि । ईसवी सन प्रारम्भसँ पहिने मकर संक्रान्ति नहि छल ।

संक्रान्तिक अर्थ
’संक्रान्ति’ क अर्थ अछि सूर्य एक राशिसँ दोसर राशिमे जाएब । अतः ओ राशि जाहिमे सूर्य प्रवेश करैत अछि , संक्रान्तिक संज्ञासँ विख्यात अछि । राशिक संख्या १२ अछि । मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक , धनु, मकर, कुम्भ, आ मीन । मलेमास परलाक बाद सेहो वर्षमे १२ राशि मात्र होइत अछि । प्रत्येक संक्रान्ति पवित्र दिन के रूपमे मानल जाइत अछि । मत्स्यपुराणमे संक्रान्ति व्रतके वर्णन कएल गेल भेटैत अछि । एक दिन पहिने लोकके मात्र एक बेर मध्यान्हमे भोजन करबाक चाही आ संक्रान्तिके दिन दाँतके को स्वच्छ कऽ तिल युक्त जलसँ स्नान करबाक चाही ।
संक्रान्तिक दिन दान पुण्य
पूर्व पुण्यलाभक लेल पुण्यकालमे स्नान दान आदि कृत्य कएल जाइत अछि । सामान्य नियम ई अछि जे रातिमे नहि तऽ स्नान कएल जाइत अछि आ नहि दान । सूर्यक किरण रहल समयमे कखनो स्नान कएल जा सकैत अछि । रातिमे ग्रहण छोड़ि कऽ अन्य समय स्नान नहि करबाक चाही । ई बात विष्णुधर्मसूत्रमे सेहो कहल गेल अछि । मुदा किछु अपवाद सेहो देल गेल अछि । जाहिमे ग्रहण, विवाह, संक्रान्ति, यात्रा, जनन, मरण तथा इतिहास श्रवण आदि अछि । अतः प्रत्येक संक्रान्ति विशेषतः मकर संक्रान्तिक दिन अवश्य स्नान करबाक चाही आ ओहिक बाद दान करबाक चाही ।
मान्यता
ई विश्वास कएल जाइत अछि जे एहि अवधिमे देहत्याग करएबला व्यक्ति जन्ममरणके चक्रसँ पूर्णतः मुक्त भऽ जाइत अछि । महाभारत महाकाव्यमे वयोवृद्ध योद्धा भीष्म पितामह पाण्डव आ कौरवके बीच भेल कुरुक्षेत्र युद्धमे सांघातिक रूपसँ घाइल छलथि । हुनका इच्छा मृत्य्ुक वरदान प्राप्त छलन्हि । पाण्डव वीर अर्जुन द्वारा रचित बाणशैया पर परल भीष्म उत्तरायण अवधिके प्रतीक्षा कएलन्हि । ओ सूर्यके मकर राशिमे प्रवेश कएलाक बाद अपन अन्तिम श्वास लेने रहथि जाहिसँ हुनका पुनर्जन्म लेबए नहि पड़लन्हि ।
धनुषाधाममे मकर मेला
जनकपुर क्षेत्रक प्रमुख धार्मिक स्थल धनुषाधाममे एहि अवसरपर मेला लगैत अछि । माघ १ गतेक अतिरिक्त माघ महिनाक प्रत्येक रवि दिन धनुषा धाम मन्दिरमे भक्तजन सभके भीड़ लागल रहैत अछि । ओहि स्थलपर दूर दूरसँ लोकसभ पहुँचैत अछि । मकरमे धान शीस आ भाँटा चढाबएके परम्परा सेहो रहैत अछि । धान शीस चढाबएके पाछु धानक उत्पादन बढाबएके कामना आ भाँटा चढाबएके पाछु अहिला सहित चर्म रोगसँ मुक्तिक अराधना रहैत अछि ।

धनुषाधाम ओ स्थल अछि जाहिठाम त्रेतायुगमे सीता स्वम्बरक समय भगवान रामद्वारा धनुष तोडलाक बाद एकटा भाग धरती पर खसल छल । ओहि स्थलपर एखनो धनुषक अवशेष देखल जा सकैत अछि ।

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