मैथिली कथाः लालकाकी

Byदूधमती साप्ताहिक

२३ भाद्र २०७७, मंगलवार ०५:३४ २३ भाद्र २०७७, मंगलवार ०५:३४ २३ भाद्र २०७७, मंगलवार ०५:३४ ,

कञ्चना झा
लाल काकीके मरला एक वर्ष बित गेल मुदा काका एखनो शोकेमे छथि । भोजन करैत छथि आ दरबज्जे पर पड़ल रहति छथि । कोनो आजन बाजन बाजि जाउक काकापर कोनो असर नहि पड़ैत छथि । कनीमनी बात कइओ लैत छथि तऽ भतिजा लक्ष्मणसँ । गाममे आओर भतिजासभ अछि मुदा ककरो मतलब नहि । तखन तमाकुलक लाथे सही लक्ष्मण हिनका लग आबि जाति अछि ।
लाल काका आई रातिभरि नहि सुतलाह । कछमछ करैत राति बितल छल । ओ रातिमे भोजनो नहि केने रहथि । जखन एहि बातक पत्ता चलल लक्ष्मण पहुँच गेल काकासँ कुशल क्षेम पुछबाक लेल ।
कि लाल काका मोन ठीक अछि ने ?
लाल कक्का कुहरैत बजलाह हँ ठीके अछि । राति भरि निन्न नहि भेल अछि । राति भोजनो नहि कएलहुँ ।
१० बाजि गेल अछि आई नारायणपुर वाली खेनाई लऽकऽ नहि आएल अछि ? लक्ष्मणक जिज्ञासा छल । नारायणपुरवाली काकाके भौजी लगतन्हि । ओ गरीब छथि किछु पैसा लऽ कऽ भोजन हिनक बना दैत छन्हि ।
लक्ष्मण बाजल – अरे काका नारायणपुरवाली काकीके तऽ मारिते काज रहैत अछि । एकहि हाथे कथि कथि करतीह ? कहिओकाल अबेर भऽ जायत अछि । घरे अंगना ने छै ।

लाल काका बात सेहो कऽ रहल छथि आ बेर बेर नारायणपुरवालीक घर दिस ताकि रहल छथि । लक्ष्मण बात बुझि रहल अछि जे भुखसँ व्याकुल छथि लाल काका । मुदा ककरो किएक ध्यान रहत ? एना नहि अछि जे लाल काकाके किओ नहि अछि । दूटा बेटी अछि आ दुनु विदेशमे अछि । बेर–बेर लाल काकाके बजावैत रहैत अछि मुदा ओ अप्पन ई घर अंगना छोडि़ नहि जाए चाहैत छथि ।

लाल काकाके मोन खराब अछि आ लक्ष्मण बातमे बड़ा होशियार ओ नारायणपुरवालीके पक्ष लऽ हुनक मोन बहला रहल अछि ताकि लाल काकाके समय सेहो बितैन आ भौजी खेनाई लऽ सेहो आबि जाथिन । बातके आगा बढ़बैत लक्ष्मण कहैत अछि –लाल काका हम धियापुतामे सुनैत रहि जे अहाँके बड़ा तामस उठैत छल । अंगनामे सभ कियो कहैत छथिन जे लाल काकाके लाल काकी बाहेक कियो नहि सहि सकैत छल ।
मोनो खराबोमे लाल काका हँसि पड़लाह आ कहला जे –ताहिसँ तऽ छोडि़ कऽ चलि गेलीह तोहर लाल काकी । हम बड तमसाह छलहुँ । हँ तोहर लाल काकीके अलावा दोसर कियो केना सहितै ? ओ कहिते छलिह जे– देखब हम पहिने चलि जायब आ तहिना हमरा एसगर छोडि़ गेलीह । आँखिमे पानि चलि आएल छलन्हि आई लाल काकी रहितथुन तऽ कि हम एना बेजान पड़ल रहितहुँ । जहिआ कहिओ हम भरि राति जागलहुँ तऽ हमरा संगे ओहो जागैत रहैत छलीह । हमरा कनिओ किछु भऽ जायत छल तऽ ओ एना करैत छलीह जे मोन हमरा नहि हुनके खराब भेल हुए । ओ सभटा काज धन्धा छोडि़ मात्र हमरा सेवामे जुटि जाइत रहथि ।
लाल काका बात सेहो कऽ रहल छथि आ बेर बेर नारायणपुरवालीक घर दिस ताकि रहल छथि । लक्ष्मण बात बुझि रहल अछि जे भुखसँ व्याकुल छथि लाल काका । मुदा ककरो किएक ध्यान रहत ? एना नहि अछि जे लाल काकाके किओ नहि अछि । दूटा बेटी अछि आ दुनु विदेशमे अछि । बेर–बेर लाल काकाके बजावैत रहैत अछि मुदा ओ अप्पन ई घर अंगना छोडि़ नहि जाए चाहैत छथि ।
अहाँ किए नहि दूनु बेटी लगऽ चलि जाइत छी । ओकरों सभके मोन चैन रहतै आ अहाँके सेहो कोनो तकलीफ नहि होएत लक्ष्मण कएवेर लाल काकाके एहिसँ पहिने कहने छल ।
लाल काकासँ बेर बेर एकहिटा उत्तर अबैत छल –हउ लक्ष्मण एहिठाम तोहर लाल काकीके बहुत स्मरण सभ अछि । हम कोनो एसगर छी ? ओ तऽ अही घर अंगनाके संगहि हमरा हृदयके कण कणमे छथि जकरा छोडि़क जाएके हिम्मते नहि अछि
आई फेर ई प्रसंग चलि आएल । ओ कहैत छथि जे आब हृदयके कण कणमे रहिके कि करतीह, जहिया रहवाक छलन्हि तहिआ हम रखबै नइँ केलियन्हि ?
लाल काका आ काकी बीत बहुत प्रेम छल लक्ष्मणके बुझल छल फेर लाल काका एना किए बाजि देला ? ओ जिज्ञासा रखलन्हि काकासँ कहादुन बड़ा प्रेम छल काकी सँ अहाँके । भरि अंगनाके कनिया बहुरिया सभ कहैत रहैत छथिन जे लाल काकी सन भाग सभके हउ आ लाल काका सन मानैवाला, प्रेम करै वाला घरवाला सभके भेटहुँ ?
बात पर बात होइतै छल कि नारायणपुरवाली काकी खेनाई लऽ आबी गेलीह । ओ बजलीह – आइ कनि अबेर भऽ गेलैन । तरकारी नहि छल आ घरके हालत तऽ बुझले छन्हि । सभके बैसल खेनाय निक लागैत अछि । नारायणपुरवाली कनि तमसायल छलीह से बुझबामे आयल । एना नहि अछि जे लाल काका आ लक्ष्मण बात नइँ बुझलक मुदा बुझि कऽ अबुझ बनि गेलाह । लाल काकाके एखन खेनाई बाहेक किछु नहि देखा रहल अछि ।
लाल काका थारी दिस तकलाह ओहिमे भात दाइल कनिये तीमन आ अचार छल । ओहो देखि हुनक मोन प्रसन्न भेल आ उठि बैसलाह । पेटमे जहन अन्नक दाना गेल तऽमोन हरखित भेल लाल काकाके । लक्ष्मण बाजल अपने भोजन कएल जाउ ताधरि हम तमाकुल लगबैत छी । आ हातमे चुन तमाकुल रखलक ।
लाल काकाके एकटा बड़कीटा घर अछि आ ओहिमे काका एसगर रहथि छथि । मुदा एहि अंगनाके कहिओ अप्पन अलगे शान छल, जहिया लाल काकी गाममे ई घर बनेलथि । सभ दिन शहर बजारमे रहै वाली लाल काकी सभकिछु अप्पन सुविधा देखि घर बनबौने छलीह । मुदा बहुत दिन तक ओ सुख नइँ भोगि सकलीह आ एकटा छोटछिन बीमारीमे हुनक मृत्यु भऽ गेल छल । लाल काकीके मरलाके बाद लाल काका एसगर भऽ गेल छलाह । लाल काका आ लाल काकीके सम्बन्ध बहुत मधुर छल ई सभके बुझल छल मुदा आई जे लाल काका कहलाह जे जहिआ हुनका हृदयके कण कणमे रखवाक चाहि छल तहिआ नहि राखि सकलहुँ । ई बात लक्ष्मणके मोनमे गडि़ गेल आ ओ काकाके भोजन समाप्त हेबाक प्रतीक्षा करए लागल ।
भोजनक बाद जखन काका कनि स्थिर भेलाह तऽ लक्ष्मण कुर्सी पर बैसल आ काका दिस ताकलक । लाल काका आ लाल काकीके एकटा फोटो जे देवाल पर टांगल अछि लाल कक्का ओहि फोटो दिस एकटक देखि रहल छलाह आ एना लागैत अछि जे लाल काका लाल काकीसँ बात करैत कहि रहल छथि, किए हमरासँ पहिने अहाँ चलि गेलहुँ ? हम एसगर भऽ गेलहुँ । अहाँके जाइतहि सभ दूर भऽ गेल । एक लोटा पानि अप्पने लेबऽ पड़ैत अछि । के देत ? ककरा एतेक समय अछि आ ककरा हमरा जिबै मरैसँ वास्ता ? लक्ष्मणके आवाजसँ हुनक ध्यान टुटल ।
लक्ष्मण फोटो दिस देखैत बाजल – काका लाल काकी बड़ा सुन्दर छलखिन ने ? लाल काका फट्सँ बजलाह – हँ बड़ा सुन्दर । मुदा हुनकर सुन्दरता हम तहिया नइँ बुझलहुँ जहिआ ओ हमरा संगे रहथि ।
लक्ष्मणके जिज्ञासा भेल जे लाल काका एहन बात किए बजलाह ? ओकरा बर्दाश्त नइँ भेल ओ पुछि बैसल – लाल काका अहाँ आ लाल काकीके प्रेम तऽ अनुपम छल । एतेक प्रेम तऽ आबक लोक कहाँ करैत अछि एक दोसर सँ । कनि कहूँ न अप्पन आ लाल काकीके सम्बन्धमे । पहिल बेर जे अहाँ लाल काकीके देखलहुँ तऽ केहन लागल छलीह । लक्ष्मणके जिज्ञासापर लाल काका भवा भवाके हँसि पड़लाह आ चलि गेलाह ओहि समयमे जहिआ लाल काकी आ हुनक विवाह भेल । सभकिछ बुझाएल जेना आँखिक आगा भऽ रहल अछि । लाल काकाके आँखिमे चमक आबि गेल आ बाजए लगलाह – लाल काकी यानी हमरा सुधिरा संग विवाह भेल । सामान्य घर परिवारके सामान्य पढ़ल लिखल सुधिरा । देखवामे सेहो बहुत सामान्य मुदा घर परिवारके डेबै वाली, संगहि हमरा आ मात्र हमरासँ प्रेम करै वाली । बुहत शान्त सरल स्वभावके सुधिराके हम निकसँ नहि चिन्ह सकलहुँ । हम तहिआ क्लासवन अफसर छलहूँ हमर एकटा अलगे रुतबा छल । विवाहके किछु दिन बादसँ सुधिरा हमरा संगे शहर आबि गेलीह मुदा हम हुनका पर ध्यान नहि दैत छलहूँ । इहो कहल जा सकैत अछि जे हम हुनका कहिओ ध्यान सँ देखबै नहि कएलहुँ जे ओ सजल धजल श्रृंगार केने केहन लागैत छथि ? हमर दुनिया किछु दोसरे छल ।
बेचारी सुधिरा कहवाक लेल हमर पत्नी छलीह मुदा हुनक एकहुँटा शौख सेहन्ता हम पूरा नहि कएलहुँ । हमर एकटा अप्पन अलग दुनिया छल जाहिमे सुधिरा कतहूँ सँ फिट नइँ छलीह । सुधिराके हाँसैके ,बाजैके ,गाबैके , घुमैके , सिनेमा देखैके बुहत शौख छल । हमरा बहुतो बेर कहलीह मुदा हमर तऽ बाते अलग छल । हम साफ साफ कहि दैत छलहुँ जे अहाँ हमर पसिन नहि छी । अहाँ जँ ई चाहैत छी अहाँ संगे हम कहिओ कोनो ठाम जायब तऽ दिमाग सँ ई बात हटा लिअ किए तऽ हम अहाँके लऽकऽ नहि जायब । हमरा जेबाक अछि तऽ हमरा संगे जेबाक लेल बहुत कियो तैयार अछि । अहाँके हम कोनो दिक्कत नहि होमए देब अहाँ घरमे रहूँ । सुधिरा बहुत लड़लीह , कानलिह हमरा सँगे ओहिदिन । मुदा हमरा पर तऽ ककरो आरोंके रंग चढ़ल छल, हम सुधिराके बात कोना सुनितहुँ ।
सुधिरा आ हमर वैवाहिक जीवन निकसँ चलि रहल छल किए तऽ सुधिरा हमरा कोनो बातमे टोकैत नहि छलीह । हम हुनक काज धन्धा आ हमरा प्रति प्रेमके बुझैत छलहुँ । हमरा कोन चिज चाहि ओ हमरा बाजैसँ पहिने बुझि जायत छलीह । हमरा घर घरैनके ओ अप्पन काजसँ मोहि नेने रहथि मुदा हमर प्रेम ओ नहि जीत सकलीह जाहि बातक तकलीफ हमरा आईयो अछि ।
शुरुमे सुधिराके होइत छल जे हमर स्वभावे एहन अछि जे हम हुनका कोनो ठाममे नहि लऽ जायत छी । हमर दोसर संगके प्रेम सम्बन्धके बारेमे सुधिराके नइँ बुझल छल । मुदा हमर प्रेम सम्बन्ध तऽ विवाहके पहिलेसँ छल आ चाहितहुँ सुधिराके नहि कहि सकलहुँ । लक्ष्मण चुपचाप हुनक बात सुनि रहल छल आ काका फोटो निहारैत बजैत रहलाह ।
एक दिनके बात अछि सुधिरा हमरा बहुत जिद करैत कहलीह जे – कहादुन बुहत निक सिनेमा आयल अछि हमरा देखवाक मोन होइत अछि चलुँ सिनेमाघरमे सिनेमा देखब । हमर सभ संगी संगे जेबाक लेल कहैत छथि मुदा हमरा मोन अछि जे अहाँके संगे सिनेमा जाई । हमरा कोनो बातके तामस छल बस उतरी गेल सुधिरा पर । दूनुमे खुब झगड़ा भेल । हम बिना किछु सोचने बुझने हुनका बहुत अन्ट सन्ट कहि देलहुँ आ एक चमेटा सेहो मारलहुँ । हमरा मारिसँ ओ लोहैछ गेलीह आ सपत खेलिह जे कहिओ सिनेमाके नाम नहि लेतीह ।
किछु दिनक बादके बात अछि हम आ अनामिका, हँ ओहे हमर प्रेमिका जकरा बारेमे हम सुधिराके नहि कहने रहि हुनका संगहि सिनेमा देखवाक लेल सिनेमाहलमे गेलहुँ । सुधिरा मोहल्लाके संगी बहिनपा सभके संगे सेहो सिनेमा देखवाक लेल पुहँचल छलीह कि हुनक आँखि हमरा आ अनामिका पर पडि़ गेल ओ सिनमा की देखतहि ओ तऽ बताहि भऽ पड़ा गेलीह जेना हवा बसात होई । हमरो सिनेमा देखैमे मोन नइँ लागल आ बीच सिनेमासँ मोन नहि ठीक अछि कहि घर आबि गेलहूँ । घर आबि देखैत छी जे सुधिरा कानैत कानैत बेहाल छथि । हमरा दिस बिना देखने बजलिह ओ संगमे के छल ? जिनका संगे सिनेमा गेल छलहूँ ? हम कहलहूँ ओ अनामिका छलीह । हम आ अनामिका एक दोसरसँ प्रेम करैत छी । सुधिरा नागिन सन फुफआयल बजलीह आ हम के छी ?
हम कहलहुँ – अहाँ हमर पत्नी छी । हमर दूटा बच्चाके माय छी । ई घर दुआरी सभकिछु अहाँके तऽ अछि । सुधिरा कहलीह – मुदा अहाँ हमर नइँ छी । बस हमर इएह जगह छी आँखिसँ अविरल धारा बहल जा रहल छल ओ बिना रुकने बाजैत रहलिह । ओ अचेत भऽ गेलीह । कनिकालमे जहन होशमे एलीह तऽ फेर ओहिना शुरु भऽ गेलीह । संजोग छल दूनु बच्चा स्कूलमे छल हम दूनु घरमे एसगर छलहुँ । हम अप्पन आ अनामिकाके बारेमे सभटा बात हुनका खुलिकऽ ओहिदिन कहि देलहुँ जे अहाँ संग विवाहमे हमर कोनो मर्जी नइँ छल । हम तऽ अनामिका संगे विवाह करितहुँ मुदा घर परिवारके लोक अहाँ संग विवाह तए कऽ देने रहैथ आ हम किछु नहि कऽ सकलहुँ । तथापि हम अहाँके कोनो तरहके असुविधा तऽ नहि देने छी । हम अप्पन जिम्मेदारी निकसँ बुझैत छी । हमरा बुझल छल सुधिरा सभकिछु सहि सकैत छल मुदा हमरा ककरो दोसरके संगे देखनाई नइँ सहि सकैत छथि । सुधिरा हमर बात सुनि धड़ामसँ पलंग पर खसि पड़लीह । ओ अवाक छलीह हमर बात सुनि । ओ छटपटाइत छलीह हमर बात सुनि । ओ कि करतीह से हुनका सेहो नहि बुझल छल ? मुदा हम अप्पन बात पर अड़ल रही जे हम प्रेम करैत छी आ ई कोनो गलत सेहो नहि अछि । दोसर बात जे अनामिकासँ हम आईसँ नहि विवाहसँ पहिनेसँ प्रेम करैत छलहूँ । तथापि हम अप्पन जिम्मेदारीसँ कहिओ भागल नहि छी । मुदा हमर एकटा अलग दुनिया अछि जाहिमे अहाँ नहि आबैत छी ।
आई सुधिराके बुझवामे आयल जे किए ओकर अवहेलना होएत छल । ओ सभकिछु सहि सकैत छल मुदा ओ अपना आ हमरा बीच अनामिकाके नहि देखि सकैत छल । ओ कालीके रुप ओहि दिन ललेक । हुनक पूरा देह नोर सँ भीज गेल छल । ओ हिचक–हिचक कऽ कहै लगलीह । हमर जिनगी बरबाद भऽ गेल । हमर एतेक वर्षके तपस्याके कोनो अर्थ नहि ? हम कि नहि कएलहूूँ अहाँके प्रेमके लेल मुदा अहाँके ध्यान तऽ सदैरखन अनामिका पर छल अहाँ हमरा कि देखितहुँ ?
हे किशोरी जी केहन भाग्य देलहुँ । केहन आदमी संग जोड़ी बना देलहुँ जे हमरा रहैतमे आनके संगे घुमैत अछि । सुधिराके बातके हमरा पर कोनो असर नहि । हम ठीक छी बस । दुनियामे कियो किछु कहत हमरा मतलब नहि अछि हमरा मोन भेल हम सिनेमा गेलहुँ । एतबै नहि हमरा जे मोन होएत हम ओहे करब । अहाँके रहवाक अछि रहूँ नहि रहबाक अछि तऽ अहाँ जा सकैत छी ।
कनी काललेल लाल काका चुप्प भऽ गेलाह । फेर लक्ष्मण दिस तकैत बजलाह बेचारी सुधिरा किछु नहि बजलीह । मात्र हमरा बताह जकाँ ताकैत बजलीह चलूँ जहन अहाँ एतेक तक आबि गेल छी तऽ कि कहि अहाँके ?दुख तऽ एकहिटा बातके जे हमर प्रेम ,हमर स्नेह, हमर ई एतेक साल जे हम अहाँके संग बितेएलहुँ ओकर बदला अहाँ हमरासँ बहुत निकसँ लेलहुँ । ओ हँसि पड़लीह । अनामिकासँ अहाँके प्रेम छल हमरा ताहिसँ आपत्ति नहि मुदा विवाहके बाद यानी हमरा अएलापर ओकरासंग अहाँके प्रेम उचित नहि । ई तऽ सरासर अपराध अछि । हमरा संगके धोखा अछि । छल अछि हमरा संगे । कमसँ कम अहाँ एना नइँ कऽ सकैत छी ।
हम कहलहूँ अहाँके जे सोचवाक अछि सोचूँ हम गलत नहि छी । हम अनामिकासँ प्रेम करैत छी । अहाँ किछु करब हम नहि छोड़बै ओकरा । हम अहाँके छोडि़ सकैत छी ओकरा नइँ ।
सुधिरा छिलमिला गेलीह आ कहलीह जे – मर्यादाक भंग छी ई । एकटा पत्नीके रहैत अहाँ दोसर संगे प्रेम सम्बन्ध नहि राखि सकैत छी । अहाँ दूटा बच्चाके पिता सेहो छी । अहाँके शोभा नहि दैत अछि । एहन सम्बन्ध जकर कि कोनो मोल नहि अछि ? हमरा आश्चर्य लागि रहल अछि जे हमरा रहैतमे अहाँ अनामिका संगे केना सिनेमा देखवाक लेल चलि गेलहुँ । अहाँके हिम्मत केना भेल ? अहाँ एकहुँ बेर ई नहि सोचलहुँ जे जहिआ हम ई बात बुझब हमरा पर कि बितत ? कतेक स्वार्थी छी अहाँ । अप्पन आ मात्र अप्पन सोचैत छी । जो रे हमर भाग्य । नइँ जानि विधना कि लिखने अछि ?
हम चुपचाप हुनक बात सुनैत रहलहुँ । ओ बहुत विचलित छलिह आ अन्तमे कहलथि जे – हे कहि अहाँके जगह पर हम ककरो दोसरके संगे गेल रहितहूँ आ कहितहूँ जे हम सेहो ककरोसँ प्रेम करैत छी तऽ केहन लागैत अहाँके ? हमरा तऽ प्रेमक भूत सवार छल हम कहि देलहूँ जे हँ अहाँ सेहो ताकि लिअ । अहाँके छुट अछि । मुदा हमरासँ ई उम्मीद नहि राखब जे हम अहाँ संगे कोनो ठाम जायब । सुधिरा निरुत्तर भऽ गेलिह आ कहलीह जे ठीक अछि तऽ आईके बाद हमरा अहाँके कोनो सम्बन्ध नहि । मुदा हम अहाँके छोडि़के नहि जायब किए तऽ अहाँके समाजक लाज नहि अछि हमरा तऽ अछि । हम लोकके कि जबाब देब ? कि आधार अछि हमर अहाँके बिना ? हम नैहरि जाकऽ सेहो नहि रहि सकैत छी । हमरा लगऽ आरो कोनो वाट नहि अछि अहाँके बाहेक । ताहिसँ कुहैक कऽ सहि रहब अँहीके संगमे । मुदा आईके बाद हमर अहाँके जिंदगीमे कोनो स्थान नइँ । ई बात कहि ओ दोसर कात मुँह दए कानए लगलीह । हमरा दया तऽ बहुत आयल मुदा हम पुरुष छी ई नहि बिसर सकलहूँ ।
जहिना सुधिरा कहलीह तहिना हमर सभटा काज ओ समय पर कऽ राखि दैत छलीह । निकसँ हँसैत बाजैत रहलीह ताकि ककरो एकोरति सन्देह नहि होई जे दुनूके बीच किछु भेल होई मुदा ओहि दिनके बाद तोहर लाल काकी जाधरि जिलखुन पूरा राति कहियो नइँ सुतलखुन । घरमे सभकियो सुति रहैत छल मुदा हुनक निन्न हेरा गेल । हम आरामसँ सुति रहैत छलहूँ आ ओ भरि राति नहि जानि कोन दुनियामे रहैत छलीह । हमरा कनिको किछु होइत छल ओ जी जान लगा दैत छलीह हमरा सेवामे । जाबे हम ठीक नहि भऽ जाइत छलहुँ ओ चैनके साँस नइँ लैत छलीह । ओ हमरासँ कोनो बात नहि कहैत छलीह । मुदा हुनक घाव बहुत गहीर होइत चलि गेल । हुनक समान्य व्यवहारके कारणे हुनक हृदयके घावके कियो नहि देखि पाएल । जहिना ओ कहलथि जे आजुक बाद हम किछु नहि कहब अहाँके तहिना अप्पन सभटा दुःख , परेशानी ओ अप्पना मोनमे राखि लेलीह आ धीरे धीरे बीमार रहए लगलीह ।
अनामिकाके विवाहके बाद ओ अप्पन दुनियामे मस्त भऽ गेलीह । ओना अनामिकाके विवाहके बात हम सुधिराके कहलहुँ ओ हँसिक कहलीह आब कोन फायदा ? आब तऽ हमर सभटा शौख सेहन्ताके दिन बित गेल । हमर जे दिन चलि गेल ओ फेरसँ थोड़बे आयत । अहाँ तहिया हमर नइँ भेलहुँ जहिया हमरा आवश्यक्ता छल । आब ककरो गेने कि आ ककरो एने कि ? हँ हमरा भरि जिंदगी ई बात अखरत जे हम अहाँके प्रेमक पियासल रहि गेयलहूँ । हम अप्पन पूरा परिवार सखी सहेली गाम शहर छोडि़ अहाँके संगे कतेक विश्वाससँ आयल छलहूँ मुदा कि करबै ? भगवतीके मंजूर नहि छल अहाँके प्रेम हमरा लेल तऽ किछु न किछु बहाना तऽ हेबै करितहि तऽ इएह सही ।
जेना जेना समय बितल हम सुधिराके प्रति आकर्षित भेलहूँ मुदा सुधिरा जसके तस रहलथि । ओ पाथर भऽ गेलीह । जहिना हम हुनका संगहि रहि हुनका संगे नहि रहि तहिना ओ हमरा संगे रहैत हमरा संगे नइँ छलीह । हमर सभ सुखदुःखके संगी बनलिह । हृदयमे हमरा बाहेक ककरो नहि आनलिह । हमरे प्रेम लेल बेकल रहलिह मुदा शायद मोनसँ माफ नहि कऽ सकलीह । हमरा अपना नहि सकलीह । दूनु बेटीके विवाह भेल आ ओ बेसी बीमार रहए लगलीह । मुदा हमरा लगऽ कहिओ चर्चा नहि केलीह आ एकदिन रातिके समय हमरा कहलीह – जे हे अहि जन्मके पूरा जिनगी बितल तऽ अहाँके संगे मुदा अहाँके प्रेम हमरा नहि भेटल जँ ठीके अगिला जन्म होइत अछि तऽ अगिला जन्म हमरा अहाँ भेंटब आ प्रेम सहित भेंटब । अहाँके हृदयमे हमर बास होई जहिना हमरा हृदयमे अहाँके बास अछि । भोरे भोर हमर सभटा काज कऽ राखि देलखुन । चाह बना हमरा दैत कहलखुन जे मोन कनि दबऽ अछि हम कनिकाल पड़ैत छी से पड़ले रहि गेलखुन । हमरा एसगर छोडि़ विदा भऽ गेलीह ओहिठाम जतयसँ कियो नहि आबैत अछि । बात समाप्त कऽ लाल काका हिचकऽ हिचकऽ कऽ कानए लगलाह । लक्ष्मण बस हुनका कानैत देखैत रहल । आई लाल काकीके बात बुझलहुँ । किया ओ ककरो अपशब्द नहि कहैत छलीह ? किए ओ ककरो मोनके दुखाबैत नहि छलीह ? किए ओ सभके संगे हाँसैत बाजैत रहैत छलिह ? ओ तऽ अपने जीवनसँ हारल छलीह । ओ कि ककरो दुःख दितथि । मुदा लाल काकाके अप्पन कएलक सजा भेटि रहल अछि । आई ओ लाल काकीके प्रेममे हेरायल छथि मुदा जहिया लाल काकी हुनका प्रेममे हेरायल छलीह ओ कतहूँ औरे हेरायल छलाह । वाह रे जिनगी ? तोहर रुप तु ही जाने । हम इएह बुझलहुँ जे जाधरि लाल काकी जिलाईथ काकाके प्रेमके प्रतीक्षा केलथि आ आब लाल काका अप्पन मृत्युके इंतजार हुनक स्मरणक संगे कऽ रहल छथि ।

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