मैथिली कविताः हे कृष्ण जनकपुर आउ

Byदूधमती साप्ताहिक

२७ श्रावण २०७७, मंगलवार ०६:४३ २७ श्रावण २०७७, मंगलवार ०६:४३ २७ श्रावण २०७७, मंगलवार ०६:४३

काशिकान्त झा रसिक

बहुत दिनसँ रास करैछी कनिका कष्ट उठाउ

हे कृष्ण जनकपुर आउ

सगरो पसरल काल कोरोना भेलई सभके काल

जन मानसमे त्रास बढल अई भेलई सभ बेहाल

दियउ सभके सुन्दर जीवन भयसँ मुक्त कराउ

हे कृष्ण जनकपुर आउ

लोक सभटा भागल जाइया म‍ोछबला सब फेल

तीन तह सरकार देखइछी सदिखन करत खेल

आबि जनकपुर घर घरमे एकबेर अलख जगाउ

हे कृष्ण जनकपुर आउ

नर्क बनल सीताके नगरी बिगरल छन्हि संतान

बात बुझत नई केओ ककरो सभके सभ अंजान

बढल सगरो कंसक संख्या चक्र सुदर्शन लाउ

हे कृष्ण जनकपुर आउ

भथा गेल सभ सर सरोवर केउ नई देखनिहार

बात करत सभ भारी भारी हरफल सब मोहार

“काशी” सनक सुदामाके घर मित्र बनिकऽ आउ

हे कृष्ण जनकपुर आउ

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