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मैथिली रंगमञ्चक कलाकार रितेश पाटलीक चर्चा

 

जयन्त ठकुर ।
कलाक नशा एना पकरैत अछि जे कहिओ नहि छोडैत अछि । कलाके पाछा जे लगलाह हुनका ओहीमे आनन्द लागए लगैत अछि । रितेश पाटली जनकपुरक कला क्षेत्रके एहन नाम छथि जिनका सेहो कलासँ बहुत बेसी लगाव छन्हि । भारतमे किछु दिन अपन कलाके जौहर देखौने पाटली आब ओहिके कमाल अपन जन्मस्थान जनकपुरमे सेहो देखा रहल छथि । मात्रे ओ अ पने नहि कि कलाकारक निर्माण करएके अभियानमे सेहो लागल छथि ओ ।


रितेशक जन्म वि.सं. २०३६ पुस २४ गते धनुषाक बटेश्वर ६मे भेल छल । हुनक पिताक नाम सूर्यदेव साह छन्हि तऽ मायके नाम गीतादेवी साह छन्हि । बाल्यावस्था एकदम सुखीपूर्ण बितल रितेश साह पाटलीके मोन कहिओ कलाप्रति नहि गेल । ओ अपन पढाई आ परिवारक खुशीपुर्ण माहौलमे एहि प्रकारसा घुलिमील गेल छलथि । सोचल काज अधिकतर पूरा नहि होइत अछि विधाता जे लिखने रहैत अछि वएह होइत अछि । विधाता तऽ हुनका भाग्यमे एकटा कुशल कलाकारक योग रहल बात लिखने छलथि । जखन ओ अपन उच्च शिक्षाक लेल पटना पहुँचलथि तऽ हुनक जीवनमे परिवर्तन आएल ।
पटना पहुँचलाक बाद ओतए बहुतो रंगमंचमे जा कऽ नाटकक लुत्फ उठाबए लगलथि । तहिआधरि रितेशक मोनमे नहि आएल जे हमरो भीतर एकटा कलाकार नुकाएल अछि । एकाएक हुनका मस्तिष्कमे ई बात आबए लागल जे हमहु एकटा कलाकार बनितहुँ । ई बात जखन हुनका मोनमे उफान मारए लागल तऽ ओ विहार आर्ट थिएटरमे नाटक सम्बन्धी कोर्स करबाक लेल एडमीशन लेलथि । ओतएसँ नीक मार्कसँ पास सेहो कएलथि । तखन जा कऽ रितेशके ओतए अभिनय करबाक अवसर सभ सेहो भेटल । रितेश नेपालसँ गेलाक बादो बहुत उम्दा दर्जाक अभिनय कएलन्हि हिन्दी भाषाक नाटकमे ।


रितेशके ओहिके बाद नृत्य सिखएके इच्छा सेहो तीव्र भऽ गेल । ओ नृत्य सीखबाक लेल पटनामे रहल भारतीय नृत्य कला मन्दिरमे भरतनाट्यम नृत्य सीखबाक लेल एडमीशन लेलथि । रितेश एकमात्र पुरुष रहथि जिनका ई नृत्य सीखबाक अवसर देल गेल ओतए । ओ कहैत छथि हम नेपाली रही तएँ हमरा ग्राह्यता देल गेल । ओतएसँ ओ दिल्ली प्रस्थान कएलथि । ओहु ठाम किछु नाटकसभमे अभिनय कएलथि । ओतए भारतमे सडक नाटकके शुरुवात करएबला जननाट्य मंचसँ जुडि गेलथि । किछु बर्ष ओतए रुकलाक बाद अवसरके खोजीमे रितेश मुम्बईमे सेहो किछु महिना समय व्यतित कएलथि । मुदा ओतए दालि गलएबला नहि भेलाक बाद जनकपुर आबएके सोचपर पहुँचलथि ।


जनकपुर एलाकबाद रामानन्द युवा क्लवसँ जुडि कऽ नीक काजसभ सेहो कएलथि । एतए ओहि समयमे मैथिली टेलि श्रृंखलामे काज करएबला कलाकारसभक खोजी भऽ रहल छल । ओ एहिठाम एलाक बाद हएबै करतै भोर तथा बाबा लगायतक टेलि श्रृंखलामे अपन अभिनयके जौहर देखौलथि ।
रितेशके मोन तैओ नहि लागि रहल छथि । हुनक बात मानी तऽ ओ एहि ठामक टांग खिचएके प्रवृतिसँ आजित भऽ गेल छलथि । तएा प्रतिबिम्ब नामक संस्था किछु गोटे मील कऽ खोललथि । जाहिमे सेहो हुनक खासे किछु नहि चलल । अन्ततः रंगदर्पण नामक नाट्य संस्था खोलि कऽ ओ अखन मैथिली कला संस्कृतिके बढावा देबएमे लागल छथि । रितेश कहैत छथि एहि संस्थाक माध्यमसँ हम नव नव कलाकारके जोडि कऽ मैथिली कला संस्कृतिके बढावा देबएमे लागल छी आ लागल रहब ।

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