चाह चर्चाः व्यवसायी एवं कवि विभा झासंग

Byदूधमती साप्ताहिक

१८ फाल्गुन २०८०, शुक्रबार १०:५८ १८ फाल्गुन २०८०, शुक्रबार १०:५८ १८ फाल्गुन २०८०, शुक्रबार १०:५८ , , ,

विभा कवि साहित्यकार मात्र नहि एकटा सफल व्यवयायी सेहो छथि । वारा जिलाक सिमरामे नेपोविट नामसँ हिनक टायल्स फैक्ट्री अछि । ओ फैक्ट्रीमे हरेक प्रकारक टाइल्स बनैत अछि । फेर ओ टाइल्सक नेपालभरि सप्लाइ होइत अछि । सिमरामे एकटा आओर टाइल्स फैक्ट्री खोलएकेँ काज शुरु भऽ गेल अछि । नेपालगञ्जमे हिनक सिंक फैक्ट्री सेहो अछि । ओहिमे किचन सिंक बनैत अछि । पञ्चकन्याक प्लाष्टिकक ५ शहरमे हिनक डिलर अछि । जाहिमे काठमाण्डूमे तीनटा, पोखरा, नेपालगञ्ज, दांग, नारायणघाटमे एक–एक अछि ।

 सुजीत कुमार झा

नेपाल भारतक मैथिली साहित्यकार, कला, संस्कृतिसँ जुड़ल व्यक्तिसभक जनकपुरधाममे कनि दिन पहिने एकटा जमघट भेल छल । विमर्श नाम देल गेल ओ जमघटक वा कार्यक्रमक किछुदिन धरि बहुत चर्चा रहल । बहुत चर्चा अहुकारणेँ जे ओ सम्र्पूण कार्यक्रमक संयोजक महिला छलीह । एनजिओक कार्यक्रम बाहेक कानो साहित्यिक, राजनीति वा सामाजिक कार्यक्रममे महिला आयोजनाक नेतृत्व करब बिरले भेटत मुदा एहिठाम उएह छलीह । सफलताक संग ओ कार्यक्रम सम्पन्न भेल ।
ओ महिलाक नाम अछि विभा झा । ओ एकटा कवि साहित्यकार मात्र नहि एकटा सफल व्यवसायी सेहो छथि । सम्र्पूण आयोजनाक खर्च ओ स्वयं कएने छलीह । एक अनुमानक अनुसार २० सँ २५ लाखधरि ओ कार्यक्रममे खर्च भेल छल । ‘हँ हम खर्च कएने छलहुँ, वर्षमे चन्दा, दानपुण्य सहित आओर चीजमे लोक खर्चा करैत अछि, हमसभ साहित्यिक उत्थान आ विमर्शमे खर्च कएलहुँ,’ विभा स्वीकार कएलीह । हुनक खर्चक सेहो विशेष चर्चा रहल ।
जनकपुरधामक लेल भलहि एहन एकटा कार्यक्रम भेल हुए मुदा एहि प्रकारक कार्यक्रम एहिसँ पहिने सेहो ओ कएने छथि । ओ स्वयं कहैत छथि, ‘काठमाण्डूमे ‘चनमा’ नामसँ, महोत्तरी जिलाक महोत्तरी गाममे ‘अड़हुल’, जनकपुरधाममे ‘विमर्श’ एकरबाद सेहो महोत्तरीमे ‘खोइच’ कार्यक्रम कएलहुँ अछि ।’
विभा एकटा सफल व्यवयायी छथि । वारा जिलाक सिमरामे नेपोविट नामसँ हिनक टायल्स फैक्ट्री अछि । ओ फैक्ट्रीमे हरेक प्रकारक टाइल्स बनैत अछि । फेर ओ टाइल्सक नेपालभरि सप्लाइ होइत अछि । सिमरामे एकटा आओर टाइल्स फैक्ट्री खोलएकेँ काज शुरु भऽ गेल अछि । नेपालगञ्जमे हिनक सिंक फैक्ट्री सेहो अछि । ओहिमे किचन सिंक बनैत अछि । पञ्चकन्याक प्लाष्टिकक ५ शहरमे हिनक डिलर अछि । जाहिमे काठमाण्डूमे तीनटा, पोखरा, नेपालगञ्ज, दांग, नारायणघाटमे एक–एक अछि ।
एक समय छल विभाक पति शम्भुनाथ झा काठमाण्डूमे बहुत छोटसँ काज शुरु कएने रहथि । जहिआ ओ महोत्तरी जिलाक महोत्तरी स्थित गामसँ काठमाण्डू गेल रहथि, हुनका संग एक किलो चुरा आ २ सय रुपैया मात्र छल । मुदा मेहनतक बलपर विभा आ शम्भु अपन अलग पहिचान बना लेलन्हि वा कही नेपालक व्यापार क्षेत्रक एकटा हस्ती भऽ गेल छथि । विभा एकर श्रेय अपन पतिके दैत छथि तँ हुनक पति शभ्मु हिनका दैत छन्हि । विभा अपन पुस्तक ‘नहि सीता नहि’ मे पतिकेँ सम्र्पण करैत लिखैत छथि, ‘जाहि हाथसँ सीथ भरलथि, ओहि हाथसँ आगूक बाट धरौलन्हि ।’
कहल जाइत अछि पतिपत्नी एकटा रथक दू पहिआ होइत अछि, घरकेँ चलावए लेल दुनू पहिआ चाही । हिनक व्यवसायक सफलतामे सेहो दुनू पहिआ समान काज कएने अछि ।
जखन विभाकेँ विवाह भेलन्हि ओ एसएलसी मात्र कएने छलीह आ हुनक पति स्नातकमे पढि़ रहल रहथि मुदा व्यापारमे मात्र नहि, दुनू गोटे पढ़ाइकेँ सेहो आगाँ बढ़ौलन्हि । दुनू स्नातकधरिक पढ़ाइ कएने छथि । जहिआ मिथिलामे दहेज चरमपर छल, वीना दहेजक विवाहक चर्चो नहि कएल जाइत छल ओहि समय हिनक विवाह विना लेनदेनक अर्थात आदर्श भेल अछि । विवाहक सम्बन्धमे विभा कहैत छथि, ‘२०५६ सालक समय छल हएत कातिक महिनामे छठिक खरना दिन सर(शम्भु) हमर पितिऔत भाय विमलेश झाक संग हमर घर एलथि, हमरासंग किछु बात कएलन्हि आ विवाह तय भऽ गेल आ इहो कही एक महिना नहि बितैत अगहन २३ गते विवाह भऽ गेल ।’
हुनक विवाहमे सभ किछु दोसरसँ अलग भेल । बर अपने कनियाँ देखए एलथि जखन कि ओहि समय अभिभावक मात्र देखैत वा निर्णय करैत छल । प्रायः हरेक विवाहमे दहेज लेल जाइत छल मुदा एहिमे किछु नहि लेल गेल । हिनक इच्छा छल, विवाहक बाद काज करी आ हिनक पतिक इच्छा रहन्हि गृहणीक अतिरिक्त काज करएवला कनियाँ चाही । ‘दुनूक इच्छा पूरा भऽ गेल आ विवाह तय भऽ गेल,’ विभा सेहो स्वीकार करैत छथि । हुनकासंग शम्भु पहिल भेटमे पुछने रहथि, ‘विवाहक बाद काज करए चाहबैक ?’ हिनक इच्छा अनुसार प्रश्न छल ओ आत्मविश्वास भरल जबाब देलन्हि, ‘हँ किए नहि । काजो करबैक आ पढ़ाइकेँ निरन्तरा सेहो देबैक ।’
फेर विवाह तय भऽ गेल छल । ओना टोलमे हल्ला भऽ गेलैक विभा बहुत सुन्दर भेलाक कारणेँ विवाहमे एकहुँ पैसा नहि लेल गेलैक अछि । जखन कि शम्भु सेहो देखएमे ओतबए सुन्दर छथि । जहिआ विवाह भेल रहन्हि, ओहि समय शम्भु ‘झा निर्माण समिति’क नामसँ ठीकाक काज करैत छलथि, एकटा दोकान सेहो रहन्हि । अपन निर्माण कम्पनीक माध्यमसँ सोल्टी मोड लग १२ तल्लाक ग्राण्ड होटेल निर्माण कएने रहथि ।
विवाह होइतए विभाकेँ संघर्षक कथा शुरु भऽ जाइत अछि । ओना ओ एकरा संघर्ष नहि, चुनौति आ अवसरक रुपमे लैत छथि । विवाहक पाँचमे दिन पतिसंग काठमाण्डू चलि गेलथि । आ छठम दिनसँ काठमाण्डूक बाफल चौकपर रहल हार्डवेयरक दोकानपर बैसए लगलथि । हाथसँ मेहदीक रंग हटलो नहि छल, दोकानक सभ किछु जिम्मा लऽ लेलन्हि । ‘काटी जोखिकऽ देलियैक तँ हाथमे माटि लागि गेल छल, ई देखि सर(शम्भु) पञ्जा आनि देने रहथि,’ ओ कहैत छथि । भाषाक समस्या ओतवए । स्वभाविके छैक ई मैथिली भाषी रहथि आ पूरापुर नेपाली भाषी समाजमे रहए पड़लन्हि । ओ स्वयं एकटा अनुभव सुनबैत छथि, ‘काम करएवलाकेँ दछिनी (इलाइची)आनए कहलियैक मुदा दोकानवला बुझबए नहि करैक आ ओहिठाम ओकरा कि कहैत छैक से हम नहि बुझलहुँ ।’ किछु वर्ष इम्हर बहुत मैथिली भाषीसभ ओहिठाम पहुँचल अछि, सञ्चारक तीब्र विकासक कारण ओहोसभ इम्हरकेँ बात बुझए लागल छैक मुदा किछु वर्ष पूर्व एहन अवस्था नहि छल ।
किछुए दिनमे काठमाण्डूक कलंकी चौक लग एकटा जमीन किन लेलन्हि फेर एक वर्ष नहि बितैत घर बना लेलन्हि । आ अपन घरमे सेहो रहए लगलथि । हार्डवेयरक दोकान गति लइए रहल समयमे निर्माण व्यवसायमे भारी घाटा लागि गेलन्हि । नहि सोचल जकाँ ओ घाटाक प्रभाव एहन भेल जे, दोकानधरि बेचए पड़लन्हि । जीवनक गतिकेँ कोना बढ़ाओल जाए प्रश्न बनिकऽ चलि आएल छल । काठमाण्डूमे रहिकऽ संघर्ष करि वा गाम जाइ मनमे बहुतरास बातसभ आबए लगलन्हि ।
थोमस एडिसन कहने छथि –हमरसभक बड़का कमजोरी अछि कोनो चीज बीचहिमे छोडि़ लैत छी, सफल होबए लेल सभसँ पक्का उपाय अछि, एकबेर आओर करी । अरस्तु कहने छथि – बिना साहस अहाँ एहि संसारमे किछु नहि कऽ सकैत छी, ई जीवनक महानतम गुण अछि ।
‘हमर सलाह छल, जे करी आब निर्माण व्यवसाय दिस नहि लागल जाए एहिपर सर(शम्भु) सेहो स्वीकार कऽ लेलन्हि,’ विभा कहलीह । कन्फ्युसिस कहने छथि – हमरसभक महानता कहिओ खसएमे नहि, बरु प्रत्येक खसाइक बाद उठएमे होइत अछि । विभा दुनू परानी सुतल नहि रहब, निर्णय कऽ लेललन्हि ।
मुदा कएल कि जाए ? इहो एकटा प्रश्न छल । पूँजिक समस्या छल । हिनका लग १० भरि सोन छल, विवाहमे सासुरसँ आएल छल । ओ सोन ई बेचि लेलन्हि । ओहि समय १० हजारक भरी सोन छल । एक लाख नगद रुपैया तत्काले हाथपर चलि एलन्हि । फेर काठमाण्डूक घरपर लौन उठालेलन्हि । ओहिमे सेहो डेढ लाख रुपैया चलि आएल ।
जखन हाथमे अढाइ लाख रुपैया चलि आएल, एकरबाद नव व्यवसायक योजना बनावएमे लागि गेलथि । विभाकेँ गाम छोडि़ शम्भु भारतक लुधियाना गेलथि । गाममे हुनकासभक विषयमे बहुतरास लोकसभ टीकाटिप्पणी करए लागल छल । एडोल्फ हिटलर कहने छथि – जखन अहाँ प्रकाशमे रहैत छी सभ अहाँकेँ संग दैत अछि मुदा जखन अन्हारमे प्रवेश करैत छी तखन अहाँक स्वयं छाया सेहो संग छोडि़ दैत अछि । विभाकेँ बुझल छलन्हि हमरा कि करबाक अछि । लोकक बातकेँ परबाह नहि कएलन्हि ।
हुनक पति लुधियानासँ जिआइ फिटिगं, पाइपसँ निप्पल बनावएवला मशिन, लेथ मशिन सहित अन्य मशिनसभ किनकऽ अनलथि । २०५८ सालक समय छल हएत काठमाण्डूमे पशुपति इन्जिनियरिगं बक्र्स खोलि काज आगाँ बढ़ौलन्हि । दिनभरिक अर्डरसभ झोड़ामे ओसभ रखैत छलथि आ फेर सप्लाइ करैत छलथि । ‘१० हजारक पाइप हमरसभक लेल बरदान बनल, एकरबाद हम पाछाँ नहि तकलहुँ,’ ओ कहैत छथि । थोमस पेन कहने छथि – संघर्ष जतेक कठिन हएत, सफलता ओतवए शानदार हएत । हिनक सफलताक द्वार खुजि गेल छल ।
ओहि क्रममे दूटा बच्चा पालएकेँ जिम्मेवारी सेहो रहन्हि । हिनक एक पुत्री आ एक पुत्र अछि । बेटी श्रुती भारतक कर्नाटकमे रहल मनिपालमे इन्जिनियरिंग कऽ रहल छथि । तँ पुत्र विमर्श देहरादूनमे १२ कक्षामे पढि़ रहल अछि । ‘जहिआ ओसभ छोट छल ओकरासभकेँ स्कूल पहुँचावए, आनए, ट्युशनधरिक जिम्मा हमरे छल आ घरक काजक अतिरिक्त व्यवसायक काज सभ करबाक रहैत छल,’ ओ कहैत छथि । एतेक व्यस्तताक बादो ओ कम्प्युटर सिखलन्हि । पढ़ाइकेँ निरन्तरता देलन्हि ।
एकरबाद बाथरुमक जतेक समान छलैक ओ भारतक दिल्ली आ जलन्धरसँ आबए लागल । फेर चाइनासँ सेहो अनलन्हि । बादमे कन्टेनरमे दुनू देशसँ सामानसभ आबए लागल । ‘ओहि समय कखन दिन होइक, कखन राति हम दुनू परानी नहि बुझलहुँ,’ चाहचर्चाक क्रममे ओ बेर–बेर कहलन्हि । एकटा दार्शनिकक विचार एक समय बहुत चर्चित भेल छल – जे अन्हार हमरा डरावएकेँ प्रयास कएलक, ओ अन्हारकेँ अन्त हम स्वयं जराकऽ कएने छी । विभा स्वयं एकटा दार्शनिकक विचारकेँ बराबर चर्चा करैत रहैत छथि –संघर्ष अहाँक क्षमताकेँ बढ़बैत अछि, अहाँक सफलताक आओर नजदीक लबैत अछि ।
हुनक पति घड़ी आ क्यालेण्डरकेँ बहुत महत्व दैत छथि । कतहुँ जाएकेँ रहैत अछि १० बजे तँ ओ १० बाजिकऽ ५ मिनेटमे जाइमे पसिन नहि करैत छथि, तहिना जहिना महिना शुरु होइत अछि ई महिना कि कि करए पड़त सभ किछुके चिन्ह कलेण्डरमे लगा लैत छथि । आ ई पालन करए चाहैत छथि, हुनक ई अनुशासन अछि । ‘हम सेहो हुनक अनुशासनक पथपर बढ़ैत छी । पुरुषक पयरमे पयर मिलाकऽ मात्र नहि हुनकासँ एक डेग बढ़ी हमर जिज्ञासा रहैत अछि,’ ओ कहैत छथि ।
ओ सानो भरयांगमे जमीन लिजपर राखि काज शुरु कएने रहथि । एखन ओतए अपने जमीन भऽ गेल छन्हि । कलंकीमे गोदाम शुरुएसँ रखने छथि ।
विभाक जन्म ४ अक्टूबर १९७८ के महोत्तरी मनरा गाविस स्थित बथनाहामे भेल छन्हि । हिनक माताक नाम गायत्री देवी झा आ पिताक नाम सुखचन्द्र झा छन्हि । बाबा गिरिधर झा ज्योतिष रहन्हि । ओ तीन भाय आ दू बहिन छथि । श्री भैगुलो मावि बथनाहासँ २०५२ सालमे एसएलसी कएने छथि । फेर स्नातकधरिक पढ़ाइ काठमाण्डूसँ कएने छथि ।
साहित्य प्रतिक लगाब हिनक किशोर अवस्थासँ छल । ‘नहि सीता, नहि’ कविता संग्रह किछुए दिन पूर्व प्रकाशित भेल अछि । ओ ओहि पुस्तकमे लिखैत छथि, ‘साहित्य प्रति लागएकेँ मूल अछि बाबूजी आ हुनक सन्दूकमे राखल पोथी भण्डार । नेनपनसँ सन्दूककेँ सैत–उसार करैत आ बाबूजीक पढ़ैत देखि पोथीक प्रति अनुराग क्रमशः प्रगाढ़ होइत गेल ।’
कथा, गीत गजल सेहो लिखैत छथि । बाक कला सेहो गजब छन्हि । अपन बात राखएकेँ विभाक तरिका देखि वा सुनि विना प्रभावित भेने लोक नहि रहि सकैत अछि । शिक्षाक विषयमे कहल जाइत अछि शिक्षा एकटा एहन वृक्ष अछि, जे हृदयमे उगैत अछि, मस्तिस्कमे पलाइत अछि आ मुँहसँ फल दैत अछि । विभाक बाकपटुता सुनि कोनो विदूषि जकाँ बुझाइत अछि ।
एकटा सफल उद्यमीकेँ अपन विचार आ क्षमता सभपर पूर्ण विश्वास होएबाक चाही । हुनका कठिनाइ आ चुनौतिक सामना करए हेतु तैयार रहबाक चाही । उद्यमिता एकटा जोखिम भरल व्यवसाय अछि । एकटा सफल उद्यमीकेँ जोखिम लेबए लेल तैयार रहबाक चाही । हुनका ई बुझबाक चाही जे सफलताक लेल असफलता सेहो आवश्यक अछि । सकारात्मक दृष्टिकोण राखब आवश्यक अछि । हरेक समय आगाँ बढ़ए आ सफल होबएकेँ इच्छा रखबाक चाही । लोकसँ जुड़ए आ सम्बन्ध बनावएकेँ क्षमता होएबाक चाही । अपन कर्मचारी, ग्राहक आ अन्य व्यवसायक संग प्रभावी ढंगसँ सम्वाद करएमे सक्षम होएबाक चाही । प्रतिस्पर्धी होएबाक चाही । अपन व्यवसायकेँ आगाँ बढ़ावए आ सफल होबए हेतु अन्य व्यवसायसँ आगाँ निकलए लेल तैयार रहबाक चाही ।
किछु अन्य गुणमे उद्यमिता एकटा लगातार सीखएवला अनुभव अछि । एकटा सफल उद्यमीकेँ नव चीज सीखए आ अपन व्यवसायकेँ बढि़या बनावए लेल तैयार रहबाक चाही । विभिन्न कार्य आ लोककेँ समन्वय करएके क्षमता होएबाक चाही । हुनका अपन व्यवसायक सभ क्षेत्रकेँ एकसंग चलावएमे सक्षम होएबाक चाही । एकटा सफल उद्यमीकेँ नव विचार आ समाधानकेँ निर्माण करएमे सक्षम अर्थात सृजनशीलता चाहबए करी । समस्याकेँ पहिचान आ ओकर समाधान करएमे सक्षम होएबाक चाही । अपन व्यवसायकँे लेल योजना बनावए आ ओकर कार्यान्वयन करएमे सक्षम होबए पड़लैक । अपन कर्मचारी आ अन्य लोककेँ प्रेरित करएमे सक्षम होबए पड़लैक ।
‘ई विशेषता कोनो उद्यमीक लेल आवश्यक अछि, चाहे ओ छोट व्यवसाय शुरू कऽ रहल होथि वा एकटा बड़का व्यवसायकेँ नेतृत्व कऽ रहल होथि,’ विभा कहैत छथि । जोखिम मोल लेबएसँ कहिओ ओ नहि घबराइत छथि । सिमरामे टाइल्सक फैक्ट्री खोललन्हि आ किछुए दिनमे कोबिडक कारणेँ सभ किछु बन्द भऽ गेलैक । एकरबादो ओ डेढ़ सय कर्मचारीकेँ बन्दक समयमे सेहो तलब देलन्हि । व्यवसायीसभक हिम्मत जबाब दऽ रहल समय हिनक जोखिम लेबएकेँ तरिकाकेँ सभ सैलुट कएलक । तत्कालक लेल जोखिम लागएवला चीज एखन फाइदे कऽ रहल ओ स्वयं स्वीकार करैत छथि ।
महिला उद्यमिताकेँ कोनो देशक आर्थिक प्रगतिक एकटा महत्वपूर्ण साधन मानल जाइत अछि । महिला उद्यमी नहि मात्र स्वयंकेँ आत्मनिर्भर बनबैत अछि, अपितु दोसराक लेल सेहो रोजगारक अवसर बढ़बैत अछि । इएह कारण अछि, विभाक सफलता संगहि लोकप्रियता सेहो बढि़ रहल छन्हि ।
एखन हिनका लग व्यवसायिक पूरे टीम अछि । ओ पूरे हिनक व्यवसाय देखैत अछि मुदा एक समय छल, एकाउण्टक काज ओ स्वयं करैत छलीह । ‘एखन कोन काज केना भऽ रहल अछि एकर अनुगमन मात्र हमरा दुनू परानीकेँ करए पड़ैत अछि,’ ओ कहैत छथि । चाह चर्चाक क्रममे विभा कहलीह, ‘हम रुकल नहि छी, बहुतरास सपना पूरा करबाक अछि ।’
जहिआ बहुत किछु नहि रहन्हि ओहि समय पहिलबेर काठमाण्डूमे घर बनेलथि तँ कारपोटक स्थान सेहो रखने रहथि, गार्ड रुम सेहो । गामक लोक ई सभ देखिकऽ जाए तँ कुट करैन्हि । काठमाण्डूक अड़ोसिया–पड़ोसियासभ सेहो कहल करन्हि एतेक जगहमे एकटा रुम भऽ जाइत । मुदा ई बातसभकेँ परबाह नहि कएलन्हि । आइ हिनका लग सभ किछु अछि । ओस्कर वाइल्ड कहने छथि – अहाँ स्वयं जे छी ओ बनू, कारण बाँकी सभ प्रयोग भऽ चुकल अछि । विभाक एकटा बातसँ चाह चर्चाक अन्त्य करए चाहैत छी – जखन संसार हमरा कहैत अछि हारि मानि लिअ, ओहि समय उम्मीद हमरा कानमे कहैत अछि, एकबेर आओर प्रयास करु !

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