राजनीतिमे लगलाक बाद कतेको चिकित्सक अपन पेशामे फिर्ता नहि आएल छथि मुदा डा. विजय कुमार सिंह आला नहि छोड़लथि । ‘जीवन पर्यन्त ई आला हमर गर्दनसँ नहि छुटत, ई आला एकटा जिम्मेवारी अछि,’ ओ कहैत छथि । राजनीति फूलटाइम नहि बनाओल जा सकैत अछि, नागरिक दायित्वकेँ बुझैत मात्र राजनीति करए पड़त । ‘फूलटाइम बनावएवलाकेँ पैसाक समस्या होइत अछि आ ई समस्या गलत दिसामे जाएकेँ खतरा सेहो रहैत अछि,’ हुनक तर्क अछि ।
एकटा दार्शनिक कहने छथि – जे मनुष्य स्वयंकेँ लेल जीबैत अछि, ओकर एकदिन मरण होइत अछि, मुदा जे मनुष्य दोसराक लेल जीबैत अछि ओकर हरेक समय स्मरण होइत अछि । डा. सिंह सेहो दोसराक लेल जीबएवला व्यक्ति छथि ।

 

 सुजीत कुमार झा

डा. विजय कुमार सिंह माने जनकपुरधामक स्वास्थ्य क्षेत्रक हस्ती । अनुभवी चिकित्सक मात्र नहि ७३ वर्षक उमेरमे सेहो सभसँ बेसी रोगी देखएवला फिजिसियनक रुपमे जनकपुरधाममे हिनक पहिचान अछि । ओ एखनो ५० टा सँ बेसी रोगी प्रत्येक दिन देखैत छथि । जखन ओ जनकपुर अञ्चल अस्पतालक मेडिकल सुपरिटेन्डेन्ट रहथि, तहिआ डेढ़ सयसँ बेसी रोगीक जाँच करैत छलथि । अस्पतालमे दैनिक राउण्ड दैते छलथि ।
‘रोगीकेँ जाँचएमे थाकन बुझएबए नहि करैत अछि, ओकरा हम दिनचर्याक रुपमे मात्र बुझैत छी,’ ओ कहैत छथि । डा. सिंह जहिआ सांसद रहथि तहिओ रोगीकेँ देखए नहि छोड़लथि, चुनाब लड़ल समयमे सेहो किछु घण्टा क्लिनिकमे बैसवए करैत छलथि । ‘यात्रामे रहलहुँ ओहि समय मात्र उपचार नहि करैत छी मुदा आन समय हमर प्राथमिकतामे रहैत अछि रोगीक उपचार,’ ओ कहैत छथि । उपचार शैलीक दृष्टिसँ डा. सिंह अपन गुरु डा. केके सिक्कासँ प्रभावित छथि । कानपुर मेडिकल काँलेजमे प्रोफेसर भेलाक बादो ओ घण्टो क्लिनिकमे सहजता पूर्वक बैसैत छलथि । जखन डा.सिंह एमबिबिएसमे पढ़ैत रहथि तँ डा. सिक्का हुनका बहुत प्रभावित कएने छल । हुनके बीमारीक प्रति दृष्टिकोण आ पथकेँ ओ निरन्तरता देलन्हि ।
जनकपुरधामक स्वास्थ्य क्षेत्रक संस्थागत विकासमे डा.सिंहक अमूल्य योगदान अछि । जनकपुर अञ्चल अस्पताल(प्रादेसिक अस्पताल)क इन्डोर विल्डिंग, प्रसुति गृह निर्माणक शुभारम्भ, नरसिंग क्याम्पसक स्थापना, वेड बढ़ावएकेँ काज, अस्पतालक स्तरोन्नति आ विभिन्न विभागक स्थापना, ट्रापिकल डिजिजक लेल स्रोत व्यक्तिक रुपमे काज कएने छथि, जकर माध्यमसँ अस्पतालमे कलाजार वार्ड, इन्सफलाइटिस वार्ड, टिवि वार्ड, डट्स सिस्टम उपचार शुरु कएल गेल छल । टिवि रोगक लेल अस्पताल बाहर सेहो महत्वपूर्ण काज कएने छथि । अस्पतालमे प्रारम्भिक आइसियू सञ्चालन करबाक श्रेय हिनके जाइत छन्हि । रेडक्रस जानकी आँखा अस्पतालक स्थापना, स्वरुप ग्रहण एवं संचालनमे सेहो हिनक सक्रिय योगदान अछि । ओ अस्पताल रेडक्रस सञ्चालित करैत अछि । ओ अस्पतालक टेक्निकल कमिटी आ संचालक समितिमे शुरुएसँ छथि । आँखा अस्पताल व्यवस्थापन समितिक अध्यक्षक रुपमे ८ वर्ष काज कऽ चुकल छथि ।
नेपाल रेडक्रसमे २०४२ सालसँ लागल छथि । शुरुमे जिला सचिव फेर २०४७ सालसँ २५ वर्ष लगातार अध्यक्ष रहलथि । हिनक नेतृत्वमे बल्ड बैंक सेवाक नियमित गुणवत्तापूर्ण संचालन , एम्बुलेन्सक सेवाक विस्तारक अतिरिक्त विशेष घुम्ती चिकित्सा शिविर, रक्तदान, दैवी प्रकोप उद्धार आ पुर्नस्थापनाक सहित विभिन्न बहुआयामी आ बहुउपयोगी कार्यक्रमसभ भेल अछि ।
जनकपुरधाममे ६ टा चिकित्सक मिलकऽ निजि नरसिंग होम सञ्चालन कएने रहथि । जनकपुर नरसिंग होम देशक पहिल अग्रणी अस्पतालक रुपमे स्थापित छल । एकर सञ्चालकमे नेपालक पहिल राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव, पूर्व सांसद धु्रव शर्मा, मधेश स्वास्थ्य प्रतिष्ठानक पूर्व अध्यक्ष रामकेवल साह, वरिष्ठ गाइनोकोलोजिष्ट डा. आएएन झा, डा. गंगाप्रसाद गोइत सहितक रहथि । डा. सिंह स्वयं प्रतिनिधि सभाक सांसद रहि चुकल छथि । २०४३ सालमे जखन ओ नरसिंग होमक स्थापना भेल छल, ओहि समय सभ चिकित्सक पेशामे लागल रहथि ।
नेपालमे स्वास्थ्य उपचार पद्धति प्राचीन कालसँ शुरू भेल देखल जाइत अछि । १७ अम शताब्दीमे सिंहदरबार, वैद्यखानाक स्थापना भेला संगहि आयुर्वेद उपचार पद्धतिक शुरूआत भेल देखल जाइत अछि तँ वि.सं. १९४७ मे काठमाण्डूमे वीर अस्पताल स्थापना भेलाक बाद आधुनिक चिकित्सा पद्धति शुरू भेल अछि । नागरिक स्वास्थ्यकेँ ध्यानमे रखैत राज्य एखन प्रवद्र्धनात्मक, प्रतिकारात्मक, उपचारात्मक आ पुर्नस्थापकीय स्वास्थ्य सेवासभ प्रदान कऽ रहल अछि तँ आयुर्वेद, होमियोप्याथीसँ एलोप्याथिक पद्धतिधरि प्रयोग कऽ विभिन्न स्वास्थ्य संस्थासभ मार्फत आमनागरिककेँ उपचार सेवा प्रदान कऽ रहल अछि । एहि काजमे देशभरिक चिकित्सकसभक बहुत योगदान अछि ।
डा. सिंहकेँ व्यक्तित्वक मूल्यांकन कएलापर हिनक चारिटा छबी बनैत अछि । स्वास्थ्य क्षेत्रमे सुधारक, समाजसेवी, एकटा विद्वान आ राजनीतिज्ञक । खासकऽ मधेश आन्दोलन आ मधेशीक अधिकारक लेल हिनक योगदान बहुत महत्वर्पूण अछि । राजनीतिपर चर्चा करवए करब मुदा ओहिसँ पहिने सामाजिक काजपर बात करैत छी । रेडक्रसक माध्यमसँ विभिन्न काज करवए कएने छथि । लाइन्स क्लब आ रोटरी क्लब सेहो जनकपुरधाममे महत्वपूर्ण काज कएने अछि । लायन्स क्लब विभिन्न स्थानपर स्वास्थ्य शिविर करैत छल । जनकपुरधाममे पहिल निजि स्कूल भोला सिंह लायन्स मिथिला इंगलिस स्कूल सञ्चालन कएलक । एक समय ओ विद्यालयक बहुत नाम छल । रोटरी क्लब जानकी वृद्धाश्रम व्यवस्थापनमे महत्वपूर्ण योगदान कएने अछि । सकल भवन कन्या माध्यमिक विद्यालयमे छात्रा शौचालय, जनकपुरधाम बस स्टैण्डमे शौचालय निर्माण कएने अछि । वृक्षारोपण अभियानमे सेहो रोटरीक योगदान अछि । दुनू संस्थाक ई नेतृत्व कएने छथि । दूधमती नदीमे संघीय सरकारक माध्यमसँ जे काज भऽ रहल अछि ताहिमे तत्कालीन सचिवकेँ ओ कन्भिन्स कऽ काज आगाँ बढ़बौलन्हि ।
हिनक पिता भोला सिंहद्वारा महोत्तरीक डाम्हीमे स्थापना कएल गेल श्री दूर्गा विषहरा मन्दिरकेँ आधुनिकीकरण करएकेँ काज हिनक नेतृत्वमे भेल अछि । ओ मन्दिर एखन ओहि क्षेत्रमे आकर्षणक केन्द्र बनल अछि । चैती दशमी आ आसिन महिनाक दशमीमे ओतए मेला लगैत अछि ।
जॉन मैक्सवेल कहने छथि – सफल आ असफल लोक अपन क्षमतामे बहुत अलग नहि होइत अछि । ओ अपन क्षमताधरि पहुँचए लेल अपन इच्छामे अलग होइत अछि ।
डा. सिंहकेँ एकटा विद्वान व्यक्तिक रुपमे सेहो पहिचान अछि । चिकित्सा मात्र नहि धर्म, कला संस्कृति, शिक्षा आ इतिहासक सम्बन्धमे ई किछु नहि किछु लिखतए रहैत छथि । विभिन्न स्थानपर कार्यपत्रसभ प्रस्तुत करितए रहैत छथि । एखन ‘मिथिलाक इतिहास’ लिख रहल छथि । ‘ओ इतिहास हिन्दी आ अंग्रेजी दुनू भाषामे किछुए दिनमे आओत,’ चाह चर्चाक क्रममे ओ जानकारी देलन्हि । जनकपुर एफएमसँ प्रशारित होबएवला लोकप्रिय कार्यक्रम ‘यक्ष प्रश्न’ क सञ्चालक डा. सिंह रहथि । यक्ष प्रश्नमे मिथिलाक कला संस्कृति भाषा, अर्थ व्यवसाय, अधिकार सहितक विषयपर अन्तरक्रिया शैलीमे अन्तरवार्ता लैत छलथि । ओ एफएमक संचालक सेहो छथि । जनकपुरधामसँ सञ्चालित जनकपुर टिभि आ किछु वर्ष सञ्चालन भेल तहलका नेपाल दैनिकक सेहो ई सञ्चालक छथि ।
जहाँधरि राजनीतिक प्रश्न अछि राजनीति हिनक विरासतमे भेटल अछि । हिनक जेष्ठ भाय महेश्वर प्रसाद सिंह बहुदल एलाक बाद मन्त्री भेल रहथि । विपि कोइराला जखन बम्बइ (मूम्बइ) मे सिके प्रसाइक नेतृत्वमे बनौने कमिटीमे महेश्वर प्र. सिंह महामन्त्री रहथि तँ ओ कमिटीक उपाध्यक्ष रामचन्द्र सिंह रहथि । ओ सेहो हिनके परिवारक । नेपाली कांग्रेस महोत्तरीक अध्यक्ष रहि चुकल चिन्ताहरण सिंह, नेपाल कम्युनिष्ट पार्टीक पोलिटब्यूरो सदस्य रहिचुकल महावीर सिंह सेहो हिनके परिवारकेँ रहन्हि । ससुर विन्देश्वरी प्रसाद सिंह सेहो पञ्चायत कालमे मन्त्री रहथि ।
‘राजनीतिप्रति आकर्षण शुरुएसँ छल जखन गजाधर सिंह माध्यमिक विद्यालय सिंहबाहिनी स्कूल विहारमे पढ़ैत रही, ओहि समय पत्रिकासभ पढ़ए लागल छलहुँ । दिनमान, कादम्बिनी, धर्मयुग आ साप्ताहिक हिन्दुस्तान पढ़ैत रही ओहिसँ सेहो राजनीति बुझएमे सहयोग भेल,’ ओ कहैत छथि । नेपाली कांग्रेसमे सक्रिय नहि रहथि मुदा प्रजातान्त्रिक आन्दोलनमे लागल रहथि । सरकारी अस्पतालमे काज कएलाक बादो कएबेर गिरिजाप्रसाद कोइराला हिनक जनकपुरधाम स्थित निवासमे बैठक कएने छन्हि । ‘बैठकमे विभिन्न बौद्धिक पेशाकर्मी संगे हमहुँ बैसैत रही आ ओकर व्यवस्थापन सेहो हम करैत छलहुँ,’ ओ कहैत छथि । २०४२ साल आ २०४६ सालक आन्दोलनमे सेहो ई सहभागि रहथि । २०४६ सालमे जनकपुर अञ्चल अस्पतालसँ एकटा जुलुस निकलल छल तकर नेतृत्व डा. सिंह आ डा. धु्रव शर्मा कएने रहथि । २०४६ चैत २४ गते ब्रह्मपुरीमे भेल गोलीकाण्डमे महोत्तरी खुट्टापिपराढीक रामविलास ठाकुर शहीद भेल रहथि । ठाकुरकेँ लासकेँ देबए पुलिस दबाब देने छल मुदा अस्पतालमे एलाक बाद विना पोस्टमार्टम कएने नहि जाए देब अडान हिनकर छलन्हि । जखनधरि ई अस्पतालमे रहथि ताधरि लास ओसभ नहि लऽ गेल । जहिना ई घर एलथि, ओ लासकेँ पुलिस उठाकऽ लगेल छल ।
जनकपुर नरसिंग होम सेहो प्रजातन्त्रवादीद्वारा खोलल गेल छल । ओ नरसिंग होमक माध्यमसँ सेहो प्रजातन्त्रवादीसभकेँ निःशुल्क उपचारक अतिरिक्त आर्थिक मदत सेहो कएल जाइत छल । एकटा दार्शनिक कहने छथि– कोनो मिशनक सफलताक लेल, रचनात्मक नेतृत्व आवश्यक होइछ ।
मधेश आन्दोलन शुरु भेल, एहिमे डा. सिंह शुरुएसँ सक्रिय रहथि । उपेन्द्र यादवक नेतृत्वमे भऽ रहल आन्दोलनमे ई बहुत सक्रिय रहथि । हिनक निवासपर कतेको मिटिंग भेल अछि । सीतानन्दन रायक अध्यक्षतामे गठित बुद्धिजिवी फोरमक उपाध्यक्ष रहथि बादमे कार्यबाहक अध्यक्ष सेहो ई भेल छथि । ‘संगठन भीतरक किछु राजनीतिक अभ्यास आ व्यवहार हमरा बहुत पसिन नहि आएल, असहजताक अनुभूति भेल, एकरबाद हम ओहिसँ अलग भऽ गेलहुँँ,’ ओ कहैत छथि ।
जखन महन्थ ठाकुर नेपाली कांग्रेस छोडि़कऽ मधेश आन्दोलनमे सक्रिय भेलथि आ तराइ मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी गठन भेल तँ जनकपुरधामक बैसारक ओ अध्यक्षता कएलन्हि आ फेर कार्यसम्पादन समितिमे रहलथि । ओ पार्टी दिससँ २०७० मे सभासद सेहो भेलथि । पहिल संविधानसभामे सेहो पार्टी सभासद्क लेल हिनक नाम सिफारिस कएने छल । मुदा राजिनामामे समस्या भेलाक कारणेँ ओहिबेर सभासद् नहि भऽ सकलथि ।
‘हम जनकपुर अञ्चल अस्पतालसँ राजिनामा दऽ देने रही, स्वीकृत सेहो भऽ चुकल छल । बहुतो दिन भऽ गेल छल मुदा तत्कालीन स्वास्थ्यमन्त्री ओ राजिनामा फाइल गुम कऽ देलाक कारण समस्या भऽ गेल । ओहि समय अदालत जइतहुँ तँ हमरे पक्षमे निर्णय होइत मुदा पार्टीपर सेहो मुद्दा देबए पड़ैत ई हम नहि कऽ सकैत छलहुँ,’ ओ कहैत छथि । जखन दोसर संविधानसभामे सभासद भेलथि ओ मैथिली भाषामे सपथ लेने रहथि । अपन संसदीय बजेटसँ मैथिली भाषा सिखावएवला पुस्तक ‘मनोरम पोथी’के प्रकाशन कएने छथि । ओ पुस्तककेँ लेखक रहथि विजय दत्त ‘मणि’ । मैथिलीक वरिष्ठ साहित्यकार डा. रेवतीरमण लालक ‘मिथिलाक पावनितिहार’ पुस्तककेँ सेहो सभासद् होबएसँ पहिने प्रकाशन कएने छथि । एखन ई वृषेशचन्द्र लाल नेतृत्वक तमलोपामे छथि । ओ पार्टीमे वरिष्ठ नेताक पद हिनका देल गेल अछि । इएह पार्टीसँ २०७९ सालमे महोत्तरीसँ चुनाब सेहो लड़ल रहथि । ओना ओ चुनाबमे ई पराजित भेल छथि ।
डा. सिंहक जन्म १२ जुन १९५१ मे महोत्तरीक महोत्तरी गाउँपालिकाक डाम्ही मड़ैइमे भेल छल । हिनक माताक नाम सीता देवी आ पिताक नाम भोला सिंह रहन्हि । ई चारि भाय आ दू बहिन रहथि । भायसभमे महेश्वर प्रसाद सिंह, चन्द्रशेखर प्रसाद सिंह, ध्रुव नारायण सिंह आ विजयकुमार सिंह छलथि । बहिनमे चन्द्रमूखी सिंह आ बदन सिंह रहन्हि । हिनक विवाह महोत्तरीक फुलहट्टाक विन्देश्वरी प्रसाद सिंहक पुत्री निर्मला देवी सिंह भेल छल । हिनक दू पुत्र आ एक पुत्री अछि । हिनक संतानक नाम निरज, विवेक आ विनिता अछि । तीनू चिकित्सक पेशासँ छथि । दुनू पुतुहुँ आ जमाए सेहो चिकित्सक छन्हि ।
डा. सिंहक प्रारम्भिक पढ़ाइ घरेमे भेल छल । घरेलग गाछक नीचामे पटिया ओछा पढ़ाइ शुरु कएने छथि । महादेवलाल क्यास्थ हिनक पहिल गुरु अछि । ‘उएह गुरु शुरुक भट्ठा धरौने छथि, ४ बजे भोरे पटिया ओछा हमसभ पढ़ए लेल बैसि जाइत छलहुँ,’ ओ कहैत छथि । ३ कक्षामे हिनक नामांकन बलवा सरपल्लोमे रहल योगकुमार माध्यमिक विद्यालयमे भेल छल । मुदा किछुए दिनमे जनकपुरधामक बसहिया माध्यमिक विद्यालय चलि एलथि । ३ कक्षासँ ७ कक्षाधरि बसहियामे पढ़लथि । फेर भारतक सनौल स्कूलमे किछुदिनक लेल गेल रहथि । ६ महिना ओ विद्यालयमे बितलो नहि छल कि हिनक नामांकन गजाधर माध्यमिक विद्यालय सिंहबाहिनी बिहारमे भेल । ओहिठामसँ ११ कक्षा धरि अध्ययन कएलन्हि । ओहि विद्यालयमे रहैतकाल पुस्तकालयमे बहुत पुस्तककेँ अध्ययन करएकेँ अवसर भेटल रहन्हि । ओहि पुस्तकालयमे दिनमान, धर्मयुग, कादम्बिनी, साप्ताहिक हिन्दूस्तानक अतिरिक्त बहुत किताब पढ़ने छथि । हिनक पुस्तकालय प्रेम देखि प्रधानाध्यापक वैद्यनाथ सिंह आ शिक्षक निर्मल सिंह पुस्तकालयक इन्चार्ज बनादेने रहन्हि ।
ओ विद्यालयमे रहैतकाल फुटवल आ भलिवल सेहो खेलथि मुदा हिनक बेसी समय पुस्तकालयमे बितैत छल । पुस्तकालयक विषयमे कहल जाइत अछि – ई ज्ञान सामग्रीक एकटा अमूल्य निधि अछि । मानव सभ्यताक एकटा चित्र संग्रह सेहो अछि । पुस्तकालय बौद्धिक निर्माणक आधारशिला अछि । सभ्यता तथा संस्कृतिक अमूल्य सम्पति अछि । कोनो देशक कला, संस्कृति, शिक्षा विकासक पौरख अछि । पुस्तकालय एकटा ज्ञानक पवित्र भण्डार अछि । एकटा कहाबत अछि – पुस्तकालय नहि भेल तँ मनुष्यक अस्तित्व समाप्त भऽ जाएत । नहि विगत रहत, नहि भविष्य । डा. सिंह कहैत छथि, ‘तहिआक पुस्तकालयमे अध्ययन करएकेँ आदत एखनोधरि अछिए, प्रत्येक दिन किछु नहि किछु पढि़तए रहैत छी ।’
१२ कक्षा आरडिएस काँलेज मुज्जफरपुरमे ओ पढ़लथि । फेर भारतीय दूतावासक माध्यमसँ एमविविएस पढ़ए कानपुर चलि गेलथि । गणेशशंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल काँलेजमे हिनक नामांकन भेल छल । ओहिठाम उतीर्ण होइतए एमडीमे हिनक नामांकन पिजिआइ एम ई आर ( पोस्ट ग्रैजुएट मेडिकल रिर्सच ईन्स्टीच्यूट ) चण्डीगढ़मे भऽ गेलन्हि । भारतभरिक विद्यार्थीक प्रतिस्पर्धामे ओ काँलेजमे हिनक नाम आएल फेर ओ काँलेजमे हिनक नामांकन भेल छल । ओहिठाम १८सँ २० घण्टाधरि काज करथि । ‘कएदिन तँ डेरा जएबो नहि करैत छलहुँ मेडिकल काँलेजमे भोजन कऽ सुतिरहैत छलहुँ,’ ओ कहैत छथि । हिनक काज करएकेँ जुनुनसँ पिजिआइक प्रोफेसर डा. शुक्ला बहुत प्रभावित भेल रहथि । ओ जम्मुके रहथि, ओ ओहिठाम काज करए हिनका बेर–बेर दबाब दैथि । ओ तँ हिनका एतेकधरि कहन्हि दू वर्षक लेल बेलायत पठादेब आ फेर एतहि काज करथि । ‘एमडिक अन्तिम वर्षमे बाबूजी स्वर्गीय नहि भेल रहितथि तँ एतए नहिओ घूरि सकैत छलहुँ मुदा बाबूजीक मरलाक बाद माए लग रहएकेँ निर्णय कएलहुँ,’ ओ कहैत छथि ।
पढ़ाइ पूरा होइतए जखन नेपाल एलथि तँ हिनक अस्थायी नोकरी बन्दीपुरमे भेल छल । ओहिठाम १५–२० दिन मात्र रहलथि । फेर जनकपुरधाम चलि एलथि । एकरबाद सभदिन एतहि रहलथि । ‘२०३९ साल पुससँ लगातार जनकपुरधामेमे छी, बीचमे पोखरा, विराटनगर सहितक ठाम बदली भेल मुदा पहिलदिन हाजिरी करए जाइत छलहुँ फेर एतहि चलि आबी,’ ओ कहलन्हि । किछु लोक हिनका काठमाण्डूमे काज करए सेहो सलाह देने रहन्हि मुदा ई जनकपुरधाम छोडि़ कतहुँ नहि गेलाह ।
राजनीतिमे लगलाक बाद कतेको चिकित्सक अपन पेशामे फिर्ता नहि आएल छथि मुदा ई आला नहि छोड़लथि । ‘जीवन पर्यन्त ई आला हमर गर्दनसँ नहि छुटत, ई आला एकटा जिम्मेवारी अछि,’ ओ कहैत छथि । राजनीति फूलटाइम नहि बनाओल जा सकैत अछि, नागरिक दायित्वकेँ बुझैत मात्र राजनीति करए पड़त । ‘फूलटाइम बनावएवलाकेँ पैसाक समस्या होइत अछि आ ई समस्या गलत दिसामे जाएकेँ खतरा सेहो रहैत अछि,’ हुनक तर्क अछि ।
स्वस्थ देश, स्वस्थ विश्वक आधार अछि । हरेक देश सहज, प्रभावकारी आ समतामूलक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करएवला आधार तय कऽ नागरिकक स्वास्थ्यकेँ मुख्य प्राथमिकतामे राखि ओही अनुसारक कार्यक्रम आ व्यवस्थापन करए सकलापर मात्र हमसभ स्वस्थ विश्व बनावएकेँ अभियानमे योगदान कएने बुझल जाएत । स्वास्थ्य प्रणाली सुधार करए सम्बन्धमे एकटा संकल्प लेबही पड़त कहैत डा. सिंह चाह चर्चाक क्रममे आगाँ कहैत छथि, ‘सहज आ बिमारी मैत्री एवं समतामूलक स्वास्थ्य सेवा प्रवाह, तकर वैज्ञानिक तथ्यांक संकलन, भण्डारण कऽ ओही तथ्यांककेँ उपयुक्त नीति निर्माणक आधार बनबैत आवश्यक जनशक्ति, कार्यक्रम, बजेट आदिक प्रभावकारी संयोजनमे मात्र स्वस्थ देशक कल्पना कएल जा सकैत अछि ।’
समस्याक पहिचान कऽ किछु नीतिगत परिवर्तन आ किछु कार्यान्वयन तहमे व्यवस्थापकीय कुशलता मात्र प्रदर्शन करए सकब तँ नेपालक स्वास्थ्य क्षेत्रमे बड़का सकारात्मक परिवर्तन हएत निश्चित प्रायः अछि ।
एकटा दार्शनिक कहने छथि – जे मनुष्य स्वयंकेँ लेल जीबैत अछि, ओकर एकदिन मरण होइत अछि, मुदा जे मनुष्य दोसराक लेल जीबैत अछि ओकर हरेक समय स्मरण होइत अछि । डा. सिंह सेहो दोसराक लेल जीबएवला व्यक्ति छथि ।
डा. सिंह बागवानी प्रेमी छथि, ककरोसँ छिपल नहि अछि । हिनक एकटा इहो पहिचान अछि । जनकपुरधामक अरगज्जा सरक उत्तर पश्चिम कोणापर रहल निवासमे एतेक फूल लगौने छथि घर वागवानी जकाँ लगैत अछि । हिनक गाम डाम्ही आ काठमाण्डूक घरमे सेहो ओतवए फूल लागल अछि । ‘विद्यार्थी कालमे जतए पढ़ैत छलहुँ, ओहुँठाम हम फलफूल लगबैत छलहुँ,’ ओ कहैत छथि । एखनो फुर्सतक समय हाथमे खुर्पी लऽ फूलक गाछसभकेँ कोरियबैत रहैत छथि ।
प्रकृति अर्थात् प्रेमक जननी । माटिसंगक प्रेम, हावासंगक प्रेम, पानिसंगक प्रेम, बन्यजन्तु तथा वनस्पतिसंगक प्रेम । ई श्रृष्टिमे तेहन कोनो चिज नहि अछि, जकर प्रेम प्रकृतिसंग जुड़ल नहि हुए । प्रकृतिमे आनन्दीत होबए लेल कोनो सीमा, कोनो बान्ह, आनन्दक लेल कोनो सम्वाद वा कोनो विवाद नहि चाही । प्रकृतिमे हरेक समय आनन्दीत भऽ सकैत छी । जीवनक गतिकेँ नव तरिकासँ अलग प्रवाहमे चलावए प्रकृतिक साथ अपरिहार्य होइत अछि । एहि बातक ज्ञान डा. साबकेँ बढि़या जकाँ छन्हि तएँ ओ फुलवारीमे सेहो प्रसन्नता खोजैत छथि ।

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