पवन कुमार मण्डल नेपालीसँ एमए एमएडक अध्ययन कएने छथि ।

विएड कएलाक बाद शिक्षण अभ्यासक लेल २०५१ सालमे ओ विद्यालयमे आएल रहथि । समय समाप्त भेलाक बाद तत्कालीन प्रधानाध्यापक शशिनाथ झा हुनका हटादेने छल । किछुए महिनामे हिनक विद्यार्थी बीच लोकप्रियता एतेक बढि़ गेल छल जे एकरबाद विद्यार्थीसभ पवन सर चाही कहैत विद्यालयमे तालाबन्दी कऽ देने छल । विद्यालय व्यवस्थापन समिति हिनका नाथपट्टीसँ पुनः बजा ओ विद्यालयक निजिस्रोतक शिक्षकमे रखने छल । २०५४ माघ ३० गते माध्यमिक विद्यालयक अस्थायी शिक्षकमे । फेर २०६३ साल आसिन १९ गते शिक्षक सेवा आयोगक परीक्षामे उर्तीण भेल रहथि । २०६८ भादव १८ गतेसँ प्रधानाध्यापकमे कार्यरत छथि । जहिआ प्रधानाध्यापक ई भेल रहथि तहिआ ओ विद्यालयमे १० टा कक्षाकोठा, १ टा कार्यालय, १ टा पाइप आ १ टा मात्र शौचालय छल । मुदा दातासभकेँ खोजिकऽ विद्यालयक आम्दानीसभकेँ साकारात्मक काजमे लगौलाक बाद विद्यालयमे परिवर्तन अनने छथि ।

 सुजीत कुमार झा

सामुदायिक विद्यालयमे सेहो विद्यार्थी पढि़ सकैत अछि, किनको देखबाक हुए तँ धनुषा जिलाक विदेह नगरपालिकाक तिनकोरिया चौकमे रहल श्री जनता नमूना माध्यमिक विद्यालय गिद्धा वेलापट्टीमे एलासँ हेतैक । ओ विद्यालयमे ६ हजार एक सय ६५ विद्यार्थी अध्ययन कऽ रहल अछि । नेपालमे कोनो सामुदायिक विद्यालयमे सभसँ बेसी विद्यार्थी रहएवला श्रेणीमे ई तेसर अछि । मधेश प्रदेशक बात कएल जाए तँ संख्याक दृष्टिसँ मात्र नहि, गुणस्तरीय शिक्षाक मामालामे सेहो नम्बर एक अछि ।
कोनो चीजक सफलता कुशल नेतृत्वक बीना सम्भव नहि होइत अछि । इहो विद्यालयसंग किछु एहने जुड़ल अछि । विद्यालयक प्रधानाध्यापक पवन कुमार मण्डलक तपस्याक फल ई देशक नमूना विद्यालय बनए सफल भेल अछि । कोनो नदीकेँ उल्टा बहब प्रकृतिक विपरीत अछि मुदा इहो सत्य अछि संसारमे किछु एहनो नहि सोचल काज सभ भेल अछि ! बिहारक दशरथ माँझी जिनका ‘माउण्टेन मैन’ क रूपम पहिचान अछि । बिहारमे गयाक नजदिक गहलौर गामक ओ एकटा गरीब मजदूर रहथि । मात्र एकटा हथौड़ी आ छेनी लऽ कऽ ओ असगरे ३६० फिट लम्बा ३० फिट चौड़ा आ २५ फिट ऊँच पहाड़केँ काटि एकटा सड़क बना देलन्हि । २२ वर्षक परिश्रमक बाद दशरथद्वारा बनाओल गेल सड़क अतरी आ वजीरगंज ब्लाकक दूरीकेँ ५५ किमीसँ १५ किलोमीटरमे परिणत भऽ गेल ।
नेल्सन मंडेला कहने छथि –शिक्षा सभसँ शक्तिशाली हथियार अछि, जाहिसँ अहाँ संसारकेँ बदलए हेतु उपयोग कऽ सकैत छी । महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन कहने छथि –हमरामे कोनो विशिष्ट प्रतिभा नहि अछि । हमरा मात्र जुनूनक हदधरि उत्सुकता अछि । पवन सेहो हरेक समय विद्यालयमे कोना सुधार कएल जाए सोचैत रहैत छथि, जानकारसभसँ सलाह लैत रहैत छथि । जकर फल विद्यालयमे देखल गेल परवर्तनसँ बुझल जा सकैत अछि ।
समाजमे सभसँ बहुमूल्य चीज यदि कोनो अछि तँ ओ अछि ‘ज्ञान’, मानवक मूलभूत अधिकारमे ज्ञानक प्राप्ति प्राथमिकतामे होएबाक चाही । हरेक व्यक्तिक पहिल सपना शिक्षित व्यक्ति बनएकेँ होएबाक चाही कारण शिक्षित व्यक्ति समाजमे परिवर्तन लाबि सकैत अछि । जॉन देवे कहने छथि – शिक्षा जीवनक तैयारी नहि अछि, शिक्षा जीवन अछि ।
‘गाम दिससँ जनकपुरधाम दिस विद्यार्थी पढ़ए अबैत छल ई देखि मनमे अबैत छल कि उम्हरके लोक कहिओ गाम दिस पढ़ए आबि सकैत अछि मुदा बहुत दिन सेहो नहि लागल, पढ़ए मात्र कि होस्टलमे रहिकऽ पढ़ए सेहो विद्यार्थी चलि आएल,’ प्रधानाध्यापक मण्डल कहैत छथि । एखन ओ विद्यालयमे जनकपुरधामक मात्र नहि महोत्तरी, सर्लाही, सिरहा, सप्तरी आ सिन्धुलीधरिक विद्यार्थी पढ़ए आएल अछि ।
जखन ओ विद्यालयक प्रधानाध्यापक भऽ २०६८ साल भादव १८ गते विद्यालयमे आएल रहथि तँ साढ़े ३ सय विद्यार्थी मात्र छल, शिक्षक कर्मचारी मिला मात्र १० गोटे रहथि । एखन अर्थात मात्र ११ वर्षमे विद्यार्थी तँ बढ़बए कएल अछि ७२ टा शिक्षक आ ५ टा कर्मचारी ओहिठाम कार्यरत अछि ।
सुनलासँ सिनेमा जकाँ बुझाएत वा कोनो चमत्कार मुदा किछुए वर्षमे पवन एहन विद्यालय बनाकऽ देखा देलन्हि अछि । देशभरिक अनुसन्धानकर्तासभक लेल सेहो ई विद्यालयक सफलता रहस्य बनल अछि । ‘जखन विद्यालयमे एलहुँ तँ कनिमनि नहि बहुत परिवर्तन करएकेँ आवश्यकता छल, ताहि हेतु विद्यार्थी आ अभिभावककेँ आत्मविश्वास बढ़ावएकेँ छल तीनूपक्ष मिललाक बाद असम्भव नहि छल हमर सपना पूरा होबएमे,’ ओ कहैत छथि । एकटा दार्शनिक कहने छथि – एक हजÞार मील सफलताक यात्राक शुरुआत सेहो एक डेगसँ होइत अछि ।
ओ विद्यालयक प्रमुख विशेषता अछि एकटा घण्टी लिजर नहि जाइत अछि, जे विषयके घण्टी रहत उएह विषयक पढ़ाइ हएत । शिक्षक बिदामे रहथि नहि रहथि ओहिसँ रुटिनमे कोनो फरक नहि परैत अछि । पवन कहैत छथि, ‘विद्यालयमे एकटा विषयकेँ कएटा शिक्षक छथि ताहि कारणेँ शिक्षक अनुपस्थितिसँ पढ़ाइमे कोनो प्रभाव नहि परैत अछि ।’
जाहि विषयकेँ आइ पढ़ाइ हएत पाठ योजना अनुसार शिक्षककेँ पढि़कऽ आबए पड़ैत अछि । शिक्षक पढि़कऽ आएल कि नहि, हुनक पढ़ाइ स्तर कि अछि तकर दैनिक अनुगमन होइत अछि । ‘कक्षा शुरु होइतए विद्यालयक मूलद्वार बन्द कऽ देल जाइत अछि, एकघण्टी पढ़ाकऽ शिक्षक खेतपर पनिपियाइ पहुँचावए चलि जएता ओ परिपाटी एहिठाम नहि चलैत अछि । फेर शिक्षक आ विद्यार्थीकेँ पोशाकेमे आवए पड़ैत छैक जे नहि आएल हुनका दण्ड देबए पड़ैत अछि,’ ओ कहैत छथि ।
बिना पूर्व जानकारीकेँ विना पोशाकमे आएल शिक्षककेँ सेहो दण्डस्वरुप एकदिनक ५० रुपैया कटाजाइत अछि । शिक्षकक हाजिरी १० बजेकेँ बाद नहि होइत अछि । ५ मिनेट अबेर भेल कि हाजिरी रजिष्टरमे लाल लगा ओ रजिष्टरके अनमिरामे बन्द कऽ देल जाइत अछि । बायोमेट्रिक प्रणालीसँ सेहो शिक्षक कर्मचारीकेँ हाजिरी होइत अछि । ‘हमसभ अपने अनुशासनमे रहबैत तँ स्वभाविक छैक विद्यार्थीकेँ सेहो रहए पड़तैक । टिपिनमे भागिजाएब, बिना पोशाककेँ आएब वा अबेरसँ आएब ई अनुशासनहीन काज हम वर्दास्त नहि कऽ सकैत छी,’ पवन कहैत छथि । १० रुपैया विद्यार्थीसभकेँ सेहो जरिवाना लगैत छैक ।
विद्यालयक प्रागंणमे सिसि क्यामरा जडान छैक, ओहिकेँ माध्यमसँ सेहो अनुगमन होइत रहैत अछि । विद्यालयमे अनुपस्थिति घटावए लेल हरेक दिन फोनिगं कार्यक्रम राखल जाइत अछि । विद्यालयमे परामर्श कक्षक स्थापना कएल गेल अछि ओहिमे अभिभावककेँ सेहो जागरुक बनाओल जाइत अछि । ५०–६० गोटे अभिभावककेँ प्रत्येक दिन परामर्श देल जाइत अछि ।
मासिक, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक आ वार्षिक परीक्षा नियमित होइत अछि । ओहिमे जे विद्यार्थी अनुतीर्ण भेल ओकरामे कतए कमजोरी भेलैक ताहिमे विद्यार्थी, अभिभावक आ शिक्षक छलफल करैत अछि । ओ विद्यालयक एकटा आकर्षण प्रार्थनासभा सेहो अछि । ओहिसभामे प्रार्थनाक बाद २ टा विद्यार्थी आ २ टा शिक्षक उत्प्रेरणा मन्तव्य दैत छथि । वृहस्पतिदिनकऽ कोनो उत्प्रेरक व्यक्ति आनि हुनका ओहिठाम बाजए देल जाइत अछि । विद्यार्थीक अवस्था सुधारए आ शिक्षककेँ अतिरिक्त ज्ञान वढ़ावए देशक नाम चलल व्यक्तिसभकेँ प्रशिक्षकक रुपमे समय–समयमे आनल जाइत अछि । इन्द्रमणि श्रेष्ठ, विद्यानाथ कोइराला, इन्द्रमणि राय आ सुमन महर्जन सहितक ओहिठाम आएल छथि । एकटा दार्शनिक कहने छथि – हमरा विश्वास अछि जे प्रत्येक व्यक्ति एकटा प्रतिभाक संग जन्म लैत छथि, मात्र हमरासभकेँ आवश्यक होइत अछि ओहि प्रतिभाकेँ निखारएके । हमरासभकेँ हरेक समय किछु उपयोगी चीजकेँ जानए आ सीखएकेँ इच्छा रखबाक चाही ।
कमजोर विद्यार्थीक लेल ओहिठाम अतिरिक्त कक्षा सेहो सञ्चालन कएल गेल अछि । प्रत्येकदिन भोर ६ बजेसँ ९ बजेधरि आ साँझमे ५ बजेसँ ६ बजेधरि ओ कक्षा सञ्चालन होइत अछि । एसइइक विद्यार्थीक लेल सार्वजनिक विदा आ शनिदिन सेहो पढ़ाइ होइत अछि ।
एकदिस पढ़ाइ होइत अछि तँ रुचि अनुसार टिम बना अतिरिक्त क्रियाकलापमे सेहो विद्यार्थीसभ सक्रिय रहैत छथि । शुक्र दिन खेलकूद, गीत, नृत्य, वक्ततृत्वकला, हाजिरी जबाब, साहित्य सृजना, चित्रकला, अभिनय प्रतियोगिता होइत रहैत अछि । एकसंग ४४टा कार्यक्रम एकटा विद्यालयमे होइत रहल दृश्य गजबकेँ रहैत अछि । ई कार्यक्रमसभसँ फाइदा विद्यार्थीसभकेँ व्यक्तित्व विकासमे पडि़ रहल अछि । ‘एहि क्षेत्रमे जतेक अतिरिक्त क्रियाकलाप अनुसार प्रतियोगिता होइत अछि, ताहिमे हमरसभक विद्यालयकेँ छात्र–छात्रा कब्जा जमौने रहैत अछि मात्र नहि आइकाल्हि सरकारी नोकरीमे सेहो एहि विद्यालयमे पढ़ने विद्यार्थीक दबदबा अछि,’ पवन कहैत छथि । अबीगैल एडम्स कहने छथि – शिक्षा अचानकसँ प्राप्त नहि कएल जा सकैत अछि, एकरा उत्साह आ परिश्रमकेँ द्वारा मात्र प्राप्त कएल जएबाक चाही ।
विद्यालयमे आइसिटी लैब, आधुनिक पुस्तकालय अछि । ओ पुस्तकालयमे ३ लाखसँ बेसी अफलाइन आ अनलाइन किताब पढ़ल जा सकैत अछि । तालिम हँल अछि जाहिमे भिजुअल क्लास सेहो होइत अछि । हँलमे ६५ इन्चकेँ स्मार्ट टिभि, वाइफाइ जडान, प्राजेक्टर सभक सुविधा अछि । पुरुष छात्रावास अछि, ओहिमे एखन डेढ़ सय विद्यार्थी रहि रहल अछि । जनकपुरधामक संस्कृत विद्यालयक बाद मात्र उएह सामुदायिक विद्यालय अछि, जाहिमे एखन छात्रावास सञ्चालित अछि । ‘जल्दीए गल्र्स होस्टल खोलएकेँ तैयारीमे छी, छात्र–छात्रा मिला ५ सय विद्यार्थी ओ दुनू छात्रावासमे रहत,’ प्रधानाध्यापक मण्डल कहलन्हि ।
भौतिक सुविधाक दृष्टिसँ सेहो धनुषाक नमूना विद्यालय बनावए ओ सफल भेल छथि । विद्यालयक प्रागंणमे तीनतलाक ७ टा बिल्डिंग अछि । तीनतलाक तँ क्यान्टिन अछि । विद्यालय भीतरमे १५टा कल अछि २०टा खानेपानीकेँ धारा जडान अछि । प्रशोधित पानिवला ओ धारामे १० टा छात्राक लेल आ १० टा छात्रक प्रयोगक लेल अछि । शौचालय ६२ टा अछि, एकसंग ४० गोटे कऽ छात्र पेशाब कऽ सकैत अछि क्षमता भेल पेशाबघर अछि । छात्राक लेल १५ टा एहन एकसंग पेशाब करएवला पेशाबघर अछि । तीनूतला मिलाकऽ ४२ टा शौचालय अछि, जाहिमे १४ टा छात्राक लेल । एतेक शौचालय भेलाक बादो सफाइमे कानो सम्झौता नहि कएल गेल अछि । पूरे चकाचक देखल जाइत अछि । पवन कहैत छथि, ‘सफाइक लेल ५ टा कर्मचारी रखने छी जाहिमे २ टाकेँ डियूटी कल आ शौचालयक सफाइक लेल लगादेने छियैक, घर जकाँ सफाइ पूरे विद्यालयमे देखएमे आओत ।’ विद्यालयक प्रागंणमे सरस्वती माता आ हनुमानजीक मन्दिर अछि । फुलबारी अछि, उपरका तल्लासभमे गमलासभमे फुलसभ राखल गेल अछि । खेलकूदक लेल बढि़या खेल मैदान अछि ।
नमूना विद्यालयक लेल निजि स्रोतमे रखने शिक्षककेँ तलब वापत मात्र वार्षिक ६७ लाख विद्यालयकेँ देबए पड़ैत अछि । मासिक विजुलीमे मात्र ५० हजार खर्च होइत अछि तँ ४० हजारकेँ मार्कर आ ओकर इन्कमे खर्च होइत अछि, इहो मासिक । ओ विद्यालयक अनुसार वार्षिक अढ़ाइ करोड खर्च होइत अछि । बालविकाससँ लऽ कऽ स्नातकधरिक ओ विद्यालयमे पढ़ाइ होइत अछि । विविएस, विएड आ पशु विज्ञानक पढ़ाइ होइत अछि । एहिवर्षसँ अग्रेजी माध्यमसँ सेहो अलग पढ़ाइ शुरु कएल गेल अछि । सम्र्पूण पढ़ाइ निशुल्क भऽ रहल अछि । ‘भौतिक निर्माणक काजसभमे बचत आ नमूना विद्यालयक कारण आएल अनुदानक रकमसँ खर्च व्यवस्थापन भऽ रहल,’ विद्यालयक प्रधानाध्यापक मण्डल कहैत छथि ।
एतेक मजगुत विद्यालय भेलाक बादो विद्यालय व्यवस्थापन समितिक चुनाब सर्वसम्मतिसँ भऽ जाइत अछि । ‘किछु करएवला लोकसभ मात्र एहिठाम जुड़ैत अछि, जखने स्वार्थसँ उपर उठिकऽ काज करबैक तँ कोनो विवाद नहि हएत सभ मिलकऽ बढ़त,’ ओ कहैत छथि ।
पवनक जन्म २०३० जेठ १९ गते धनुषा जिलाक शहीदनगर नगरपालिका ८ स्थित नाथपट्टीमे भेल छन्हि । ओ एखन जनकपुरधाम ४ स्थित रहि रहल छथि । हिनक माताक नाम समुन्द्री देवी आ पिताक नाम नागेश्वर मण्डल अछि । ओ दू भाय आ एक बहिन छथि । हिनक विवाह २०४२ सालमे अमिरती देवीसँ भेल छल । हिनक एक मात्र पुत्र अजय कुमार मण्डल सशस्त्र प्रहरीमे प्रहरी निरीक्षक पदपर छथि ।
ओ नेपालीसँ एमए एमएडक अध्ययन कएने छथि । विएड कएलाक बाद शिक्षण अभ्यासक लेल २०५१ सालमे ओ विद्यालयमे आएल रहथि । समय समाप्त भेलाक बाद तत्कालीन प्रधानाध्यापक शशिनाथ झा हुनका हटादेने छल । किछुए महिनामे हिनक विद्यार्थी बीच लोकप्रियता एतेक बढि़ गेल छल जे एकरबाद विद्यार्थीसभ पवन सर चाही कहैत विद्यालयमे तालाबन्दी कऽ देने छल । विद्यालय व्यवस्थापन समिति हिनका नाथपट्टीसँ पुनः बजा ओ विद्यालयक निजिस्रोतक शिक्षकमे रखने छल । २०५४ माघ ३० गते माध्यमिक विद्यालयक अस्थायी शिक्षकमे । फेर २०६३ साल आसिन १९ गते शिक्षक सेवा आयोगक परीक्षामे उर्तीण भेल रहथि । २०६८ भादव १८ गतेसँ प्रधानाध्यापकमे कार्यरत छथि । जहिआ प्रधानाध्यापक ई भेल रहथि तहिआ ओ विद्यालयमे १० टा कक्षाकोठा, १ टा कार्यालय, १ टा पाइप आ १ टा मात्र शौचालय छल । मुदा दातासभकेँ खोजिकऽ विद्यालयक आम्दानीसभकेँ साकारात्मक काजमे लगौलाक बाद विद्यालयमे परिवर्तन अनने छथि ।
प्रधानाध्यापक मण्डलकेँ राष्ट्रपतिद्वारा प्रवलजन राष्ट्रिय पुरस्कार, शिक्षा मन्त्रालयद्वारा उत्कृष्ठ प्रधानाध्यापक सम्मान, पत्रकार समाज काठमाण्डूद्वारा उत्कृष्ठ प्रधानाध्यापक सम्मान, मिथिला नाट्यकला परिषद्द्वारा महामूर्ख सम्मेलनक अवसरपर डपोरशंख सम्मान देल गेल छन्हि ।
एकटा दार्शनिक कहने छथि – अपन मिशनमे सफल होबए लेल अहाँकेँ अपन लक्ष्यक प्रति एकचित भावस समर्पित होबए पड़त । पवन सेहो एहने समर्पणक संग लागल छथि । पवनकेँ एक गोटे किछु वर्ष पहिने कहने रहन्हि ई प्रसंगक चर्चा बराबर करैत रहैत छथि – सोच जतेक बड़का हएत, सफलता ओतवए बड़का हएत । एक हारसँ बेसी विद्यार्थीकेँ जनकपुरधामसँ ओहिठाम पढ़ावएकेँ सोच रखने छथि । गामसँ शहरमे नहि शहरसँ गाममे लोक पढ़ाए आओर बेसी संख्यामे आवए एकर बातावरण वनावएमे ओ लागल छथि ।
एकटा दार्शनिक बिचारक संग एकरा अन्त्य करए चाहैत छी – परिवर्तन प्रकृतिक नियम अछि, बदलावसँ डेराउ नहि, ओकरा स्वीकार करु । किछु परिवर्तन सफलता दियाउत तँ किछु सफल होबएकेँ गुण सिखाओत ।

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