चाह चर्चाः अर्थशास्त्री डा. सुरेन्द्र लाभसंग

Byदूधमती साप्ताहिक

२६ माघ २०८०, शुक्रबार ०३:२० २६ माघ २०८०, शुक्रबार ०३:२० २६ माघ २०८०, शुक्रबार ०३:२०

दर्जनो अनुसन्धानमूलक कार्यपत्र डा. सुरेन्द्र लाभ लिखने छथि ।

अर्थशास्त्र, शिक्षा, समाजशास्त्र, संस्कृतिपर हिनक कार्यपत्र सभ अवितए रहैत अछि । देशक राजनीतिमे सेहो बढि़ए दखल रखैत छथि । देशक नाम चलल पत्रिकासभमे हिनक लेख अबैत रहैत अछि । पुस्तकक दृष्टिसँ हिनक एकटा कथासंग्रह ‘कथायात्रा’ आ व्यंग्य संग्रह ‘नरकपालिका’ प्रकाशित अछि । ‘नेपाली मैथिलीक उत्कृष्ट गल्पसंग्रह’क सम्पादन कएने छथि ।
पूर्वमे लिखल रचनासभकेँ एखन संकलनमे लागल छथि । पढ़ाइक क्रममे किछु मुज्जफरपुरमे, किछु जनकपुरधाममे किछु काठमाण्डूमे लिखने रहथि कतहुँ कतहुँ ओहिना पड़ल छल एकर खोजीमे लागल छथि । अमेरिकासँ किछुए दिन पहिने आएल छथि । ३ महिना अमेरिकामे रहथि ओहि समय खूब ‘कथा रिपोताज’ लिखलन्हि अछि । ‘कथा रिपोताज’ हिनक अलग शैलीक रहैत अछि, ओकरा पाठक खूब पसिन करैत अछि ।

 सुजीत कुमार झा

राजनीतिमे विद्यार्थीकालसँ सक्रिय छथि मुदा कोनो पद ग्रहण नहि कएने, सभदिन किछु नहि किछु लिखैत रहैत छथि मुदा एखनधरि तीनटा पुस्तक मात्र प्रकाशित छन्हि ओहँुमे मौलिक पुस्तक दूटा मात्र । देखएमे नहि छोट नहि लम्बा बीच–बीचक उचाइवला लोक । हँ तखन हुनक आकर्षणसँ दूर नहि रहि सकैत छी । प्रसन्नचीत चेहरा, विद्वताक बाते छोडू !
इएह आकर्षण डा. सुरेन्द्र लाभकेँ जनकपुरधाममे मात्र नहि देशमे सेहो अलग पहिचान बनौने अछि । नेपालक एकटा वरिष्ठ पत्रकार कहैत रहथि – डा. सुरेन्द्र माने विद्वान व्यक्तित्व । विद्वानक अर्थ होइत अछि विद्यावान व्यक्ति । जे व्यक्ति कोनो क्षेत्रमे कार्यकुशल हुए वा कोनो विषयमे पारंगत हुए, पांडित्य हासिल हुए हुनका हमसभ विद्वान कहैत छी । विद्वान विद् धातुसँ बनल शब्द अछि, विद्क अर्थ जानब होइत अछि ।
विद्वत्वं च नृपत्वं च न एव तुल्ये कदाचन् ।
स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते ।।
ई श्लोकक अर्थ होइत अछि – राजा मात्र अपन राज्यमे पूज्य होइत अछि मुदा विद्वान जे होइत अछि ओ कतहुँ अपन परचम लहरा दैत छथि आ अपन विद्वतासँ सभ स्थानपर पूज्य बनैत छथि ।
डा. राजेन्द्र विमलसन वटवृक्षक नजदिक रहिकऽ सेहो देशमे अपन अलग पहिचान बनौने छथि । डा. विमल माने एखनके समयमे एहि क्षेत्रक सभसँ बड़का विद्वान, हुनक भाय होबएकेँ हिनका गौरव छन्हि । घरमे एकगोटे बड़का लोक भऽ जाइत अछि, ओकर अगलबगल वा कहि घरकेँ अन्य सदस्यकेँ अलग पहिचान बनाएब बहुत कठिन होइत अछि मुदा एकरबादो हिनक अलग पहिचान अछि । डा. विमल स्वयं कहैत छथि, ‘कतेक लोक एहनो अछि, डा. सुरेन्द्रक भइया कहि हमरा चिन्हैत अछि ।’ डा. लाभक माझिल भैया डा. उपेन्द्र लाभ न्यायधिश सेहो भेल छथि ।
हिनक इएह विद्वताक अलग पहिचानक कारणेँ नेपालक पहिल राष्ट्रपति डा. रामवरण यादवक जीवनमे आधारित पुस्तक ‘टाकुरोमा एक्लो मान्छे’ केँ लोकार्पण करबाक अवसर भेटल अछि । पुस्तकक लेखक भरत भूर्तेलक पुत्री आ नेपालक प्रख्यात अख्यान लेखक जगदीश घिमिरेसंग मिलकऽ ओ पुस्तककेँ लोकार्पण कएने रहथि । नेपाल सरकार २०४८ सालमे समाज कल्याण परिषद्क कोषाध्यक्षमे आ उपकार कल्याण कोषक सदस्य सचिवमे मनोनित कएने छल । निति अनुसन्धान प्रतिष्ठानमे सन् २०१८ मे तथा राष्ट्रिय योजना आयोगक सदस्यमे सन् २०२२ मे सेहो सरकार मनोनित कएने छल ।
नेपालक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री रहल डा. लाभ विहार विश्वविद्यालयसँ एलएलवी आ पिएचडी कएने छथि । हिनक पिएचडीक विषय मानव संसाधनक योजना रहल अछि । मानव संसाधन व्यवस्थापनक केन्द्रबिन्दु आमलोक अछि । संगठन आ मनुष्य दुनूकेँ एकदोसराक आवश्यकता पड़ैत अछि । दुनू एकदोसराक परिपुरक अछि । मानव संसाधन व्यवस्थापनक सरोकार संगठनक मानवीय पक्षसंग होइत अछि । ई निरन्तर चलएवला प्रक्रिया अछि । संगठनक लक्ष्यसभ प्राप्त करए मानव संसाधन महत्वपूर्ण होइत अछि । कर्मचारीसभक कार्य सम्पादनमे संगठनक प्रभावकारिता निर्भर रहैत अछि ।
मनुष्यमे शक्ति आ शारीरिक बल होइत अछि । मुदा काज करए लेल क्षमता सेहो होबए पड़त । क्षमता माने ज्ञान, सीप, मनोवृति आ विकसित होबएवला सम्भावना अछि । शारीरिक शक्ति आ मानसिक क्षमताक संगम भेलाक बाद मात्र लोक मानव संसाधन होइत अछि । मानव संसाधन व्यवस्थापन माने मनुष्यक शक्ति क्षमताक व्यवस्थापन करब अछि । ताहि हेतु ई आमलोकक क्षमताक विकास उपर जोड़ दैत अछि । मानवीय साधनक प्राप्ति, विकास, उपयोग आ अनुरक्षण करैत अछि ।
मानव संसाधनक विकास आ व्यवस्थापन कोनो निश्चित संस्थाक परिधि भीतर सीमित करए सकएवला विषय नहि अछि । एकटा परिवारसँ समाज होइत देश सुखी आ समृद्ध बनावए जनशक्तिक विकास आ व्यवस्थापन महत्वपूर्ण अछि । एहि अर्थमे देशक समग्र जनसंख्याकेँ कोना सार्वजनिक सेवा, अनुसन्धान, उत्पादन सहितक क्षेत्रमे परिचालन करएवला विषय अछि जनशक्ति व्यवस्थापन । उद्योग, पर्यटन, जलविद्युत्, निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, वन सहितक योजनाबद्ध विकासक लेल राज्यद्वारा क्षेत्रगत जनशक्ति प्रक्षेपण करए पड़त । एना जनशक्ति प्रक्षेपण कऽ आवश्यक जनशक्ति विकासक योजना बनावएकेँ आवश्यकता अछि । डा. लाभ कहैत छथि, ‘राज्यसंग भविष्यक आवश्यकता अनुरूप जनशक्ति प्रक्षेपण आ विकास करएवला अभ्यासक अभाव मात्र नहि भऽ वर्तमानमे कोन क्षेत्रमे कतेक संख्यामे केहन जनशक्तिद्वारा काज कऽ रहल तकर यकिन तथ्यांकधरि नहि अछि ।’
सन् १९५४ जुन १९ मे जनकपुरधाम १० मे डा. लाभक जन्म भेल छल । हिनक माताक नाम सुशिला देवी आ पिताक नाम कुशेश्वर लाभ रहन्हि । ६ भायबहिन रहथि जाहिमे ३ भाय आ ३ बहिन छल । सीताराम प्राथमिक विद्यालय अरगज्जासर पोखरि जनकपुरधामसँ प्राथमिक पढ़ाइ कएने छथि तँ सरस्वती नमूना माध्यमिक विद्यालयसँ एसएलसी, राराव क्याम्पस जनकपुरधामसँ आइए आ विए तथा लंगर सिंह महाविद्यालय मुज्जफरपुरसँ अर्थशास्त्रमे एमए कएने छथि ।
होरेस मैन कहने छथि – बिना शिक्षा प्राप्त कएने कोनो व्यक्ति अपन परम ऊँचाइकेँ नहि छू सकैत छथि । डा. लाभ सेहो कहैत छथि – पढाइ ओ पढ़ाव अछि जे अहाँकेँ ऊँचाइधरि लइए जाएत, मात्र पढ़ाइके रोकू नहि । एकटा दार्शनिकक बिचार ओ बेर–बेर कहैत रहैत छथि –समय आ शिक्षाक सही उपयोगे व्यक्तिकेँ सफल बना दैत अछि ।
हिनक पत्नीक नाम डा. पुनम लाभ अछि । ओहो शिक्षण पेशासँ जुड़ल छथि । ओ राराव क्याम्पसमे अध्यापन करा रहल छथि । २ पुत्री आ एक पुत्र छन्हि । जेठ पुत्री स्निग्धा शुभम भैरहबामे चिकित्सक छथि तँ दोसर पुत्री स्वप्निल स्नेहम एमइ कऽ अमेरिका स्थित गुगलमे काज कऽ रहल छथि । पुत्र पावेल प्रत्युश अमेरिकासँ पिएचडी कऽ रहल अछि । धियापुताक पढ़ाइक व्यवस्थापन आ घरक व्यवस्थापनक श्रय कनियाँ पुनमकेँ ओ दैत छथि । ओ कहैत छथि, ‘जीवनक हरेक डेगमे पत्नीक सहयोग नहि भेल रहथि तँ आइ जे अवस्थामे छी ओ नहि पहुँच सकल रहितहुँ । कतेकबेर ओ विमार रहथि, एकरबादो हुनका छोडि़कऽ जाए पड़ल ।’
घरक बगलमे जानकी एफएम छल, ओहिमे ओ अन्तरवार्ता कार्यक्रम चलबैत छलथि । कनियाँकेँ ४ डिग्रीसँ बेसी बोखार रहन्हि एकरबादो ओ कार्यक्रम चलावए गेल रहथि । बोखारक अवस्थामे एकबेर पोखराक लिटरेचल फेस्टिवलमे जाए पड़लन्हि । कतहुँ नहि कतहुँ कहियो कार्यपत्र प्रस्तुत करए, कतहुँ विशेषज्ञक रुपमे प्रवचन देबए, कतहुँ समारोहमे सहभागि होबए जाइतए रहैत छथि मुदा सभ दिन जीवनसंगीनीक रुपमे डा. पुनम हिनका सहयोग करैत रहलन्हि अछि । बीमार रहलापर ई नहि जाए चाहितो पत्नी दबाब दऽ पठबैत रहैत छथि । ‘बीमारकेँ सेहो हमरा प्रगतिमे ओ बाधा नहि बनए देलथि,’ ओ कहैत छथि ।
बहुत स्वभिमानी लोक छथि । अपनलेल कतहुँ पैरवी करब हिनक शब्दकोषमे अछिए नहि । जकर उदाहरण हिनक शुरुक समयसँ देखल जा सकैत अछि । पटनासँ ‘मिथिला मिहिर’ पत्रिका प्रकाशित होइत छल । ओहिमे एक दूटा रचना पठौलन्हि ओ नहि छपलक । जखन डा. राजेन्द्र विमलक भाय छी वा डा. धीरेन्द्रक पैरबीकेँ उपयोग कएने रहितथि ओ तँ छपाबएमे कोनो कठिनाइ नहि होइत । एकरबादो किछु समयधरि प्रयोगक रुपमे किए नहि सही महिलाक नामसँ ई लिखैत रहलथि आ ओहिमे छपाइत रहलैक ! जनकपुरधाममे ओ महिला लेखक के छथि बहुत खोजी होबए लागल छल, बादमे ई स्वयं डा. विमल लग ई पोल खोलने रहथि । ‘भैया जीवनमे पहिलबेर हमरापर तमसाएल छलथि, छद्म नमक लऽ कऽ ! एकरबाद हम लगातार अपने नामसँ लिखए लगलहुँ,’ ओ कहैत छथि । कोनो पद लेबाक लेल कहिओ पैरवी नहि कएलथि स्वयं ओ स्वीकार करैत छथि ।
दर्जनो अनुसन्धानमूलक कार्यपत्र लिखने छथि । अर्थशास्त्र, शिक्षा, समाजशास्त्र, संस्कृतिपर हिनक कार्यपत्र सभ अवितए रहैत अछि । देशक राजनीतिमे सेहो बढि़ए दखल रखैत छथि । देशक नाम चलल पत्रिकासभमे हिनक लेख अबैत रहैत अछि । पुस्तकक दृष्टिसँ हिनक एकटा कथासंग्रह ‘कथायात्रा’ आ व्यंग्य संग्रह ‘नरकपालिका’ प्रकाशित अछि । ‘नेपाली मैथिलीक उत्कृष्ट गल्पसंग्रह’क सम्पादन कएने छथि ।
पूर्वमे लिखल रचनासभकेँ एखन संकलनमे लागल छथि । पढ़ाइक क्रममे किछु मुज्जफरपुरमे, किछु जनकपुरधाममे किछु काठमाण्डूमे लिखने रहथि कतहुँ कतहुँ ओहिना पड़ल छल एकर खोजीमे लागल छथि । अमेरिकासँ किछुए दिन पहिने आएल छथि । ३ महिना अमेरिकामे रहथि ओहि समय खूब ‘कथा रिपोताज’ लिखलन्हि अछि । ‘कथा रिपोताज’ हिनक अलग शैलीक रहैत अछि, ओकरा पाठक खूब पसिन करैत अछि ।
कविता कथा आ नाटक समान रुपसँ लिखैत छथि । ‘लोकक जीवनमे सुधार होइक ई सोचक संग रचना करैत छी कहिओकाल कऽ लगैत अछि मनक भ्रास सेहो निकालैत छी, सामाजिक चेतनाक लेल काज करैत छी अलग–अलग ध्रुब छैक जकर कड़ी साहित्य सेहो अछि,’ ओ कहैत छथि । साहित्य लेखन डा. विमल, डा. रेवतीरमण लाल आ युगेश्वर वर्मासँ प्रभावित भऽ शुरु कएने रहथि । हिनक लिखल १० टा नाटक अछि । विभिन्न समयमे ओ मञ्चन भेल अछि । ‘नेताकेँ भगवान बनाउ’ हिनक नाटक खूब चर्चित भेल छल । नाटकमे शुरुक समय अभिनय सेहो कएने छथि । मानक भाषामे नहि मैथिलीक जनभाषामे ‘धधरा’ पोष्टर पत्रिका जनकपुरधामसँ निकलल रहैक जकर ओ सम्पादन कएने छलाह । तहिना मिथिलाञ्चल पत्रिकाक सम्पादनमण्डलमे सेहो ई रहथि ।
एकटा अपूर्ण कलाकृतिक रूपमे हमसभ वा कही मानव जन्म लैत छी । हमरसभक जन्मसँ मृत्युधरिक यात्रा नहि मात्र जीबू आ जीबए दीक उदेश्यसँ होइत अछि अपितु अवगुणसँ गुणक दिस, अपूर्णतासँ पूर्णत्वक दिस, अन्हारसँ प्रकाशक दिस, दोषसँ निर्दोषताक दिस अज्ञानसँ ज्ञानक दिस निसर्गतः होइत अछि । गुण जीवमात्रक सद प्रवृति अछि जकर कारण ओ विशिष्ट बनबैत अछि । अंग्रेजीमे एकरा लेल ‘वर्चू’ शब्द अछि जकरा लैटिन भाषाक ‘वर्चुअस’ शब्दसँ बनल अछि । मनुष्यक नैतिक उत्तमताकेँ गुण कहल जाइत अछि । गुण, उत्तमताक एकटा प्रवृति वा लक्षण अछि । व्यक्तिगत गुण व्यक्तिकेँ महान बनावएवला लक्षण अछि । एहिकारणेँ एकरा उत्तमतासँ परिभाषित कएल जाइत अछि । गुणक विपरीतार्थक ‘अवगुण’ होइछ । हमसभ अर्थात सभ मनुष्य होमोसेपियंस सेपियंसक प्रजाति अबैत छी नहिकि दोसरग्रहक प्रजातिसँ । एनामे ई ध्यानमे छोडि़कऽ जे हम स्पेशल छी, अलग छी, यदि एहि बातपर ध्यान दी जे सार्वभौमिक कि अछिं, कि अछि जे हमरा सभमे समान अछि तँ हम अपना लेल आ अपन समाजक लेल बहुत किछु बढि़या कऽ पाएब ।
त्रिभुवन विश्वविद्यालयमे करिब ४० वर्ष डा. लाभ प्राध्यापन कएलन्हि । प्रोफेसरसँ अवकाशप्राप्त छथि । जनकपुरधामक प्रमुख निजि क्याम्पस मोडेलमे सेहो वर्षो अर्थशास्त्र पढ़ौलन्हि । ट्युशन पढ़एवलाकेँ दिनभरि देवी चौक स्थिति हिनक घरमे भीड़ लागल रहैत छल । दर्जनो पुरस्कार एवं सम्मानसँ ओ सम्मानित छथि ।
अबीगैल एडम्स कहने छथि – हरेक काज आसान होइत अछि मात्र अहाँक भीतर ओकरा करएकेँ जुनून होएबाक चाही ।
चाह चर्चाक क्रममे हुनकासँ एकटा जिज्ञासा राखिए लेलहुँ नेपालमे संघीयता हटावएकेँ माँग कैसि कऽ उठए लागल अछि । सहीमे नेतासभ असफल बनादेलकैक ? एहिपर ओ प्रतिप्रश्न करैत छथि –प्रदेश किए संघिय सरकारक काज सेहो संतोषप्रद नहि अछि तँ कि ओकरो हटादेल जाए ! ओ इहो कहैत छथि – राजनीतिमे अवसरवादी आ सत्ताधारी प्रवृति हाबी भऽ रहल अछि, उएह दूरावस्थाकेँ कारण अछि । केन्द्रियवादी मानसिकताकेँ हटावए पड़त । नेपाली कांग्रेस वा एमाले माओवादी मात्र नहि मधेशवादी दलमे सेहो केन्द्रिय मानसिकता अछि, एखनो ओहोसभ काठमाण्डूसँ देश चलावए चाहैत छथि ! एहिमे सुधार करए पड़त ।
मधेसमे तीनबेर (२०६३, २०६४ आ २०७२) आन्दोलन भेल । सर्वप्रथम ओ आन्दोलन किए भेल, कथि लेल भेल ताहि विषयमे बुझए पड़त । डा. लाभ कहैत छथि, ‘ओे एक प्रकारक मुक्तिक आन्दोलन छल, सामानताक आन्दोलन छल, पहुँचक आन्दोलन छल । मुदा ओ आन्दोलनक बावजुद जनताकेँ जे भेटबाक चाही, ओ नहि भेटल । बरु नेता मात्र पद पौलन्हि, पैसा पौलन्हि, सभकिछु हुनके सभक अचरामे गेल । जनतामे खाएपिबएवला लोक लग किछु गेल । जे बड़का लोक छल वा नेतासभक नजदीकक लोक छल, ओसभ आन्दोलनक भरपुर फाइदा लेलक । मुदा सोझ जनता, जे नेताके कहलापर सडकमे आबि जाइत अछि, ओ किछु नहि पेलक । उएह कारण जनतामे एकप्रकारक असन्तुष्टि देखल गेल अछि ।’
एहन असन्तुष्टि देशभरि देखल गेल अछि । मुदा मधेसमे अलगे प्रकारक अछि । बेर–बेर आन्दोलन भेल भूमि मधेस अछि । एतए विभेद, असमानता, अत्याचार, दमनक विरोधमे आन्दोलन भेल छल । ताहिकारणेँ अन्य स्थानक तुलनामे एतएकेँ जनतामे इच्छा कनि उर्वर भऽ कऽ आएल ।
ओ कहैत छथि, ‘जनता एकटा आकांक्षा लऽ कऽ आन्दोलन कएने छल – असमानता आ विभेद समाप्त होइत अछि, बराबरक अधिकार भेटत । मुदा ओ प्राप्त नहि भेलापर एखन असन्तुष्टि बढ़ल अछि । विभेद आ असमानता अन्य स्थानमे नहि भेल तेहन नहि अछि । मुदा ओतएकेँ अवस्था मधेसक जेहन नहि अछि ।’ मधेसमे पहाडक दलितसँ बेसी समस्या अछि, पहाडक महिला, जनजातिसँ बेसी मधेसक महिला, जनजातिसभमे समस्या अछि । डा. लाभ कहैत छथि, ‘विभेदक खधिया पहाडसँ मधेसमे गहिर अछि । खधिया भरएकेँ काज नहि होबएधरि एहन असन्तुष्टिसभ होइतए रहत । चिन्ताक विषय माने, ई असन्तुष्टि फस्र्टेसनदिस जा रहल अछि ।’
राष्ट्रिय योजना आयोग अर्थ मन्त्रालयकेँ एकटा शाखाक रुपमे काज कऽ रहल छैक जकरा पूर्व सदस्यक रुपमे अस्वीकार नहि कएला । ओ कहलन्हि, ‘ओकरा एकटा अलग निकाय बनावही पड़तैक । एखन सरकार जे जे कहलक उएह बनावएकेँ काज मात्र करैत अछि । देशक आवश्यकता ओकर सूचिमे नहि अछि ।’
परिवर्तन हरेक समय विकास नहि लबैत अछि, मुदा परिवर्तनक विना कोनो विकास नहि होइत अछि । राज्यकेँ ई सत्यकेँ समयमे बुझब आवश्यक होइछ । एकटा दार्शनिक कहने छथि – हमरासभक अपन उर्जा पुरान बातपर नहि अपितु भविष्यक लक्ष्यपर खर्च करबाक चाही, इएह सफलताक मूल मन्त्र अछि । डा. लाभ सेहो इएह बातकेँ बेर–बेर उल्लेख करैत रहैत छथि ।

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