जनकपुरधामक सभसँ पुरान विद्यालयमेसँ एक कुवा पाठशालामे

कालिकान्त झा ‘तृषित’क काका पण्डित रामभद्र झा प्राचार्य रहथिन ओहिठाम ई रहैत छलथि । एकदिस आधुनिक पढ़ाइ आ दोसरादिस संस्कृति पढ़ाइ सेहो कएलन्हि । कुवा पाठशालामे संस्कृतक पढ़ाइ होइत छल । ‘शास्त्री नहि कऽ सकलहुँ मुदा ज्योतिष ओतहि पढ़ने छी, संस्कृतक ज्ञान ओतहि भेल अछि,’ ओ कहैत छथि ।
शुरुमे ई हस्तरेखा देखैत छलथि आ हिनक संगी ब्रजकान्त ठाकुर कुण्डली बनबथि मुदा बादमे सभ क्षेत्रमे ई काज करए लगलथि । ‘काम चुनौतिपूर्ण छैक मुदा मन सेहो एहि क्षेत्रमे बढ़ लगैत छैक,’ कालिकान्त कहैत छथि । ओ तँ युवासभकेँ एकर पढ़ाइमे लागए सेहो सलाह दैत छथि । हुनक थप सुझाब अछि – आजुक प्रतिस्पर्धात्मक युग मे ज्योतिषकेँ उपयोगिता एतबा जे अनुकूल समय रहए तऽ रिस्को लऽ कऽ कार्य कएल जा सकैछ, समय प्रतिकूल होए तँ विशेष व्यवहारिक पक्ष देखैत (रिस्क नहि लैत) कार्य करबाक चाही । तखन भविष्य मे समय के अनुकूलता वा प्रतिकूलता तँ ज्योतिष शास्त्रे स्पष्ट कऽ सकैत अछि ।

 

सुजीत कुमार झा

मैथिलीक चर्चित गीतकार, व्यंग्य लेखक, कथाकार कालिकान्त झा ‘तृषित’ क समाजमे अलग पहिचान अछि । ई पहिचान साहित्य क्षेत्रक लेल भलहि लगैत हुए मुदा हुनक मूल पहिचान एकटा चर्चित ज्योतिषक छन्हि । देशक नाम चलल ज्योतिषक रुपमे हिनका बुझल जाइत अछि ।
‘आब तँ उमेर बहुत भऽ गेल तँए व्यवसायिक रुपसँ ई काज छोडि़ देने छी मुदा अपन इष्टमित्रक जन्म कुण्डली बनावएकेँ काज थोर बहुत एखनो जारी अछि,’ ओ कहैत छथि । जनकपुरधाम २० रुपैठामे हिनक घर छन्हि । एखन किछु दिनसँ ओतए रहि रहल छथि । ओना काठमाण्डूमे घर छन्हि, एकटा लड़का अमेरिकामे रहि रहल छन्हि । तीनू स्थानमे आबि जाएब हुनक चलितए रहैत अछि । जतए ओ जाइत छथि, ओतए जन्मकुण्डली बनावएकेँ काज चलितए रहैत अछि । चाह चर्चाक क्रममे कहलन्हि, ‘अपन चिन्हा परिचयक लोककेँ मात्र कुण्डली बनबैत छी, एखनो घरमे १० टा कुण्डली बनावहीकेँ राखल अछि ।’
समय विज्ञान अछि ज्योतिष । एकरा तेसर नेत्र सेहो कहल जाइत अछि । ज्योतिष शब्दक अर्थ ज्योति अर्थात् इजोत वा प्रकाश होइछ । इजोत बिना जीवन सम्भव नहि होइत अछि । आँखि बिनाक जीवन अन्हारमय होइत अछि । सूर्य कहल जाए आँखि कहल जाए वा ज्योतिष कहल जाए ई सभ समानार्थी शब्द अछि । सूर्यक प्रकाश वा बिजुली आदि कृत्रिम प्रकाशमे मात्र आँखि काज करैत अछि । आँखिक क्षमता अनुसार कम वा वेसी प्रकाश भेलापर सेहो आँखि काज नहि करैत अछि इहो बातकेँ नकारल नहि जा सकैत अछि । आँखिद्वारा नहि देखएकेँ बात सेहो अत्यन्त सीमित होइत अछि । सामान्य आँखिद्वारा देखए नहि सकएवला विषय ज्योतिष विज्ञानद्वारा देखल जाइत अछि । जेना सत्तर बर्षक लोकद्वारा देखएवला वा बुझएवला बात दश वर्षक बच्चा नहि देखि सकैत अछि, नहि बुझि सकैत अछि । एतए भौतिक रूपमे बच्चाक आँखि बढि़या होइतहुँ सुदूर भविष्यधरि देखए बुझए सकएवला आँखि सत्तर बर्षक लोकमे होइत अछि । इएह तेसर नेत्रक विशेषता अछि । कहल जाइत अछि –ज्योतिष शास्त्र ओहिसँ सेहो बहुत उपर अछि । सत्तर बर्षक लोकद्वारा नहि देखल गेल, नहि बुझल विषय ज्योतिष शास्त्र देखबैत अछि ।
बहुदल एलाक बाद महेन्द्रनारायण निधि जलस्रोत मन्त्री भेल रहथि । एकदिन कालिकान्त हुनक मन्त्री निवासमे पहुँचल रहथि । बातेबातमे ओ विमलेन्द्र निधिक हस्तरेखा देखलन्हि आ कहलन्हि एकवर्षमे ई मन्त्री भऽ रहल छथि । तखन तँ महेन्द्र नारायण निधिकेँ सेहो आश्चर्य लागल छलन्हि मुदा हिनका कहलाक किछुए महिनामे ओ मन्त्री भऽ गेलाह । प्रधानन्यायधीश रामकुमार साह जहिआ पुनरावेदन अदालत हेटौडाक न्यायधीश रहथि, ओहि समय चारिटा न्यायधीश संग ओ हिनकासँ भेटए आएल रहन्हि । हुनक जन्मकुण्डली ई देखलन्हि आ फेर कहलन्हि ‘न्याय क्षेत्रमे अहाँकेँ चोटीपर पहुँचएकेँ योग देखा रहल अछि ।’ किछुए वर्षमे ओ प्रधानन्यायधीश भऽ गेलथि ।
हिनक कहल बात दोसरकेँ मात्र नहि अपनो बहुत मिलल छन्हि । ओ कहैत छथि, ‘जहिआ कृषि औजार कारखानामे छलहुँ ओहि समय कार्यालय दिससँ विदेश जाएकेँ तैयारी छल, जखन हम अपन टिपणि कुण्डलीकेँ अध्ययन कएलहुँ, योग खराब बनि रहल छल । ई बात हम अपन कार्यालयक साथीसभ लग सेहो साझा कएने रही । ठीकेँ हम जा मात्र नहि सकलहुँ, किछु खराब सेहो भेल ।’
भोरक समयमे जखन प्रसन्न भऽ गेलहुँ बुझि दिनभरि प्रसन्न हएब आ दुःखी भेलापर दिनभरि दुःखी हएब बात हमसभ दैनिक अनुभव करैत रहैत छी । लोक जन्मैत समय ओकर पृथ्वीमे प्रथम उपस्थित होबएकेँ समय कि केहन अछि आ ओ जीवनमे कोन–कोन पक्षमे सफल आ कोन–कोन पक्षमे असफल बनबैत अछि से बात कुण्डली स्पस्ट देखबैत अछि ।
ज्योतिष शास्त्र अनुसार जे व्यक्ति जाहि समयमे जन्मैत अछि ओहि समयमे कोन ग्रह कतए, कोन अवस्थामा छल आ ओ संकेत अनुसार कोन–कोन पक्ष कतेक सबल वा निर्बल अछि से बात कुण्डली देखबैत अछि । उएह ग्रह नक्षत्रद्वारा देखाओल गेल संकेत अनुसार व्यक्तिक वस्तुस्थिति वा भविष्य कथन सम्भव होइत अछि । सहज भाषामे कहल जाए तँ जन्म समयक ग्रहस्थिति देखाबएवला तस्वीर जन्म कुण्डली होइछ ।
कुण्डली स्वयंमे एकटा विज्ञान अछि । कुण्डली भीतर बारहटा कक्ष होइत अछि जे आकाशक प्रतिनिधित्वकेँ संकेत करैत अछि । आकाशमे सभ ग्रह आ अपने कक्षमे निरन्तर चलायमान होइत अछि । आकाशक इएह बारह क्षेत्रकेँ मेष वृष आदि राशिक नाम देल गेल अछि । ई नाम सेहो सार्थक अछि ।
ई आकाशीय क्षेत्रमे ग्रहसभ घुमैत गेलापर अनेक प्रकारक चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न होइत अछि । एकहिटा ग्रह अलग–अलग स्थानमे अलग–अलग प्रकारक गुरुत्वाकर्षणक प्रभावमे पड़ैत अछि आ अलग–अलग प्रकारक सुखद दुःखद वा सम अवस्थाक अनुभव करैत अछि आ ओहि अनुसारक प्रभाव देबए लगैत अछि । जेना सूर्य ग्रह मेष राशि (वैशाख महिना) क्षेत्रमे भेलापर सुख अनुभव करैत अछि आ ओहिमे रहि बहुत बढि़या प्रभाव उत्पन्न करैत अछि । पृथ्वीमे वैशाख महिनामे सूर्य बढि़या प्रभाव पार्ने रहैत अछि । आत्मा अर्थात जीवनक कारक अछि सूर्य । एकरा बिना जीवनक कल्पना असम्भव अछि । चैत वैशाखमे बसन्त ऋतुमे जीवन प्रारम्भ होबएवला हमरासभकेँ अनुभव अछि ।
तहिना पहिल राशिमे सूर्य सुखद अनुभव कएने जेना दोसर बृष राशिमे चन्द्रमा सुखद अनुभव करैत अछि । जतए सुखद अनुभव करैत अछि तकर विपरीत सातम राशिमे दुःखद अनुभव करैत अछि । ताहिकारणेँ सूर्य मेष राशिमे उँच आ तुला राशिमे नीच अर्थात् नेगेटिव मानल जाइत अछि । चन्द्रमा बृष राशिमे उँच आ वृश्चिक राशिमे नीच मानल जाइत अछि । तहिना मंगल ग्रह मकर राशिमे उँच आ कर्कट राशिमे नीच मानल जाइत अछि । उँच भेलापर सुखद अनुभव आ सुखद परिणाम देने जकाँ नीच भेलापर दुःखद अनुभव आ दुःखद परिणाम दैत अछि । ई दू अलग–अलग अवस्था मात्र नहि होइत अछि । अपन राशिमे भेलापर शत्रुक राशिमे होइत मित्रक राशिमे भेलापर सम सम्बन्ध भेल ग्रहक राशिमे भेलापर उएह अनुसार अलग–अलग फल दैत अछि ।
प्रत्यक्ष उपस्थित भऽ फल देने जकाँ दृष्टिद्वारा सेहो फल फलित होइत अछि । सभ ग्रह अपने बैसल राशिसँ सातम राशिमे पूर्ण दृष्टिद्वारा देखने अर्थात् प्रभाव पार्ने रहैत अछि । ओहि बाहेक मंगल चारिम आ आठममे, गुरु पाँचम आ नवम राशिमे, शनि तेसर आ दशम राशिमे पूर्ण प्रभाव पाड़ैत अछि । तहिना ग्रहक बाल युवा वृद्ध आदि अनेक अवस्था होइत अछि आ उएह अनुसार फल दैत आएल अछि । ई आ एहने अनेक अवस्थाक सम्पूर्ण विचार दशा विचार कऽ कुण्डली देखि ज्योतिषि फल बतबैत अछि ।
वर्तमानमे आकाशमे चलिरहल ग्रहसभक बस्तुस्थिति, जन्मसमयक ग्रहस्थिति आ वर्तमानमे चलल दशाक आधारमे भविष्यफल कहल जाइत अछि जे अस्सीसँ सय प्रतिशतधरि मिलैत अछि । अहिना कुण्डली देखि जे–जे विषयमे बढि़या होबएकेँ संकेत देखल जाइत अछि ओ विषयमे प्रयास कएलापर बढि़या सफलता प्राप्त होइत अछि आ जाहि विषयमे ग्रहक संकेत बढि़या नहि होइत अछि, तेहन विषयमे सफल होबए नहि सकत वा बहुत कठिन हएत ।
हमराअहाँक जीवनमे सहजहि उन्नति प्रगति हुए से प्रकृतिकेँ भाषाकेँ बुझ्mए पड़ैत अछि । ग्रहसभक ई सिस्टमकेँ नहि बुझि सुखे नहि अछि, तकर संकेतकेँ अनुसरण नहि करैत सुखे नहि अछि । कोन ज्योतिषी व्यक्ति विशेष कोनो प्रश्नक उत्तर मिलाबए नहि कएलक अथवा कहल बात नहि पहुँचल तँ ओ उएह व्यक्तिक कमी कमजोरी मानए पड़त । ज्योतिष शास्त्रक कमी नहि मानल जा सकैत अछि । इएह वास्तविकताकेँ ध्यानमे रखैत हमरसभक पूर्वज हजÞारौ वर्षसँ निरन्तर कुण्डली देखए देखावए आ ओही अनुसार जीवन जीबएकेँ अभ्यास करैत आएल अछि ।
कालीकान्त सौखिया रुपसँ एकर अध्ययन कएने रहथि मुदा इएह क्षेत्र हिनक यश, पैसा सभ किछु देत से हिनका पत्ता नहि छल । ‘दूर्घटना वस एहिमे लागि गेलहुँ कहल जा सकैत अछि, नहि तँ सरकारी कर्मचारीकेँ एहि क्षेत्रमे आबएकेँ बाते नहि छल,’ ओ स्वयं स्वीकार करैत छथि । जॉन मैक्सवेल कहने छथि – सफल आ असफल लोक अपन क्षमतामे बहुत अलग नहि होइत छथि । ओ अपन क्षमताधरि पहुँचए लेल अपन इच्छामे अलग होइत छथि ।
त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँ एमकम कएलाक बाद कृषि औजार कारखानामे खरिद अधिकृत पदमे २०३० चैत १६ गते हिनक नोकरी भेल छल । ओ कारखानामे निमित महाप्रबन्धकक रुपमे सेहो रहल छथि । फेर निजि उद्योगसभमे सेहो काज कएलन्हि । अशोक स्टिलक महाप्रबन्धक, ग्यास सिलिण्डर निर्माण होबएवला एरोटिक प्रालिमे महाप्रबन्धक आ पशुपति एग्रो एण्ड केमिकल्स इण्डस्ट्रिजमे निर्देशकक काज सेहो कएने छथि । तत्कालीन प्रधानमन्त्री गिरिजाप्रसाद कोइरालाक भागिन लागएवला रमेश नेपालसंग झगड़ा भेलाक बाद कृषि औजार कारखाना एकबेर छोड़ए पड़लन्हि फेर अदालतसँ जीत ओ पुनः ओहिठाम पहुँचलथि । मुदा जुनियरकेँ नीचा हिनका राखि देलाक बाद ई ओ कारखाना छोडि़ देने रहथि । अन्तिम निजि उद्योगमे माओवादी चन्दा माँगएमे परेशान कऽ रहल छल, एकरबाद पूरासँ छोडि़ ज्योतिष क्षेत्रमे लागि गेलथि ।
‘११ वर्ष कालीमाटीमे ज्योतिष वास्तुशास्त्रकेँ सलाहक लेल कार्यालय खोलने रही फेर ओ अफिस हातिवन लगेलहुँ, कोरोनाक बाद व्यवसायिक रुपसँ कार्यालय बन्द कऽ देने छी,’ ओ कहैत छथि । सन् २००६ मे काठमाण्डूमे आयोजित दक्षिण एशियाली ज्योतिष सम्मेलनमे हिनका गोल्ड मेडल दऽ सम्मान कएल गेल छल ।
२००३ आसिन २७ गते माता पञ्चमुखी देवी झा आ पिता निरशु झाक पुत्रक रुपमे जनकपुरधाम २० रुपैठामे जन्म लेनिहार कालिकान्त ८ कक्षाधरि श्री कन्टिर झा नमूना मावि बभनगामामे पढ़ने छथि । कक्षा ९ आ १० जनकपुरधामक सरस्वती नमूना मावि, आइकम, वीकम आरके काँलेज मधुवन्नी फेर एमकम त्रिभुवन विश्वविद्यालय काठमाण्डूसँ कएने छथि ।
जनकपुरधामक सभसँ पुरान विद्यालयमेसँ एक कुवा पाठशालामे हिनक काका पण्डित रामभद्र झा प्राचार्य रहथिन ओहिठाम ई रहैत छलथि । एकदिस आधुनिक पढ़ाइ आ दोसरादिस संस्कृति पढ़ाइ सेहो कएलन्हि । कुवा पाठशालामे संस्कृतक पढ़ाइ होइत छल । ‘शास्त्री नहि कऽ सकलहुँ मुदा ज्योतिष ओतहि पढ़ने छी, संस्कृतक ज्ञान ओतहि भेल अछि,’ ओ कहैत छथि । अल्फ्रेड मर्सिएर कहने छथि –हमसभ प्रसन्नतासँ जे सिखैत छी, ओकरा हमसभ कहिओ नहि बिसरैत छी ।
शुरुमे ई हस्तरेखा देखैत छलथि आ हिनक संगी ब्रजकान्त ठाकुर कुण्डली बनबथि मुदा बादमे सभ क्षेत्रमे ई काज करए लगलथि । ‘काम चुनौतिपूर्ण छैक मुदा मन सेहो एहि क्षेत्रमे बढ़ लगैत छैक,’ कालिकान्त कहैत छथि । ओ तँ युवासभकेँ एकर पढ़ाइमे लागए सेहो सलाह दैत छथि । हुनक थप सुझाब अछि – आजुक प्रतिस्पर्धात्मक युग मे ज्योतिषकेँ उपयोगिता एतबा जे अनुकूल समय रहए तऽ रिस्को लऽ कऽ कार्य कएल जा सकैछ, समय प्रतिकूल होए तँ विशेष व्यवहारिक पक्ष देखैत (रिस्क नहि लैत) कार्य करबाक चाही । तखन भविष्य मे समय के अनुकूलता वा प्रतिकूलता तँ ज्योतिष शास्त्रे स्पष्ट कऽ सकैत अछि ।
हिनक एकटा पहिचान गीतकारक सेहो अछि । मैथिली भाषामे एखनधरि एक हजारसँ बेसी गीत लिखने छथि । भक्ति गीतक सिद्धहस्त गीतकार छथि मुदा हिनक गीत, सभ रंगक अछि । एखनधरि हिनक सवा सयसँ बेसी गीत रेकर्डिग भऽ चुकल छन्हि । कुञ्जबिहारी मिश्र, दिलिप दरभंगिया, डा. आभाष लाभ, सुनिल मल्लिक, धीरेन्द्र प्रेमर्षि, नविन मिश्र, बमबम झा शास्त्री, रजनी पल्लवी, राजेशकुमार, प्रियंका मैथिल, पुनम मिश्र, कुमकुम मिश्र, सोनी चौधरी, माला झा, मानसी झा, सुषमा झा, गुरुदेव कामत, रामा मण्डल, स्मृति मिश्र, रुपा झा, विराटनगरक भगवान झा, दिल्लीक राजा ठाकुर, अक्षेन्द्र झा सहितक गायक गायिका हिनक गीत गेने छन्हि ।
‘गीत लेखनक लेल शब्द भण्डार होबहीक चाही, मात्रा बुझए पड़तैक, नव–नव शैलीक ज्ञान होबए पड़तैक एकर अतिरिक्त भावुक व्यक्ति मात्र बढि़या गीत लिख सकैत अछि,’ ओ कहैत छथि । हिनक एक गीतक अंश –
सिया धिया हे त्याग सँ तोहर,
दबल अयोध्यो धाम छै ।
जैं सीता तखनहि मर्यादा,
पुरुषोत्तम श्री राम छथि ।।
आबि धरा सँ शील प्रभा सँ,
मर्यादा रक्षित आभा सँ ।
जे आदर्श कएल स्थापित,
तँए त्रिभूवन में नाम छै ।।
जाँ सीता तखनहि………….
हिनक एखनधरि भंगियाक भजन, रीत केहन विपरीत, त्रिषितक फुलबारी, त्रिषितक पुष्पाञ्जलि प्रकाशित अछि । मैथिली संस्कार गीतकेँ संकलन एवं सम्पादन कएने छथि । ‘अरण्य रोदन’ नामसँ जल्दीए हिनक नव पुस्तक आबि रहल अछि । जहिना गीतमे ई सिद्धहस्त छथि, ओहिना व्यग्यं लेखन हिनक पसिनक विषय अछि । राजेश मिश्रक सम्पादनमे नेपाली भाषामे प्रकाशित विश्वदीप साप्ताहिकमे ‘टटका टोकरी’ नामसँ ३ वर्ष मैथिलीमे व्यंग्य लिखलन्हि । फेर मुसरीबाबूक दोलत्ती नामसँ सामाजिक सञ्जालमे नियमित व्यंग्य लिखैत छथि ।
वभनगामामे पढ़ैत समय साहित्य लेखन शुरु कएने रहथि । जखन ८ कक्षामे पढ़ैत रहथि ओहि समय गीत प्रतियोगितामे हिन्दीमे गीत लिख बाचन कएलाक बाद ‘कंगाल बेटी’ हिन्दी उपन्यास दऽ हिनका पुरस्कृत कएल गेल छल । शुरुमे ई हिन्दीमे लिखथि मुदा मैथिली विभागक संस्थापक अध्यक्ष एवं मैथिलीक प्रसिद्ध साहित्यकार डा. धीरेश्वर झा ‘धीरेन्द्र’क सम्पर्कमे एलाक बाद उएह हिनका मैथिलीमे लिखबाक लेल प्रेरणा देलकन्हि फेर सुन्दर झा शास्त्री सेहो जीद कऽ हिनकासँ लिखबौलन्हि । शास्त्रीक सम्पादनमे तहिआ काठमाण्डूसँ मैथिली भाषामे ‘फूलपात’ पत्रिका प्रकाशित होइत छल । एमकम मे पढ़ैत काल ई ओ पत्रिकामे गीत, गजल, कविता, कथा आ व्यंग्य लिखैत छलथि ।
हिनक प्रगतिमे कनियाँ मिना झाक बहुत योगदान अछि । ‘बच्चाकेँ जिम्मेवार बनावएसँ लऽ घरक व्यवस्थापन एतेकधरिक कि हमर साहित्य रचनाकेँ व्यवस्थित कऽ कऽ राखएमे हुनक उल्लेखनिय योगदान रहल,’ कालिकान्त कहैत छथि । हुनक दूटा पुत्र अछि । जेठ पुत्र विवेक झा चार्टर एकाउन्टेन्टक पढ़ाइ कएने छथि । ओ नेपाल लाइफ इन्स्युरेन्सक महाप्रबन्धक रहि चुकल छथि । छोट लड़का डा. प्रविण झा सिभिल इन्जिनियरिगंक पढ़ाइ कऽ अमेरिकामे कार्यरत छन्हि । दूटा पुत्री छन्हि निलु झा आ प्रिति झा मिश्र, दुनूकेँ विवाह भऽ चुकल छन्हि । दुनूक पति इन्जिनियरक पढ़ाइ कएने छन्हि । हिनक दुनू बेटी कमर्शसँ स्नातक छथि । जेठकी पुतहुँ अनुपमा झा ग्रीन महिला बहुउदेश्यी सहकारी संस्था जनकपुरधामक अध्यक्ष छथि तँ छोटकी पुतहुँ ई.मनिषा चौधरी अमेरिका स्थित माइक्रोसफ्ट कम्पनीमे कार्यरत छथि ।
कालिकान्त पिताक स्मृतिमे रुपैठामे मनोकामना सिद्ध हनुमान मन्दिर बनौने छथि तँ पितामह चिन्तामणि झाक स्मृतिमे रुपेश्वरनाथ महादेव मन्दिर । ओ दुनू मन्दिर बहुत आकर्षक अछि । पूजापाठ करएवलाकेँ ओ मन्दिरमे भीड़ लागल रहैत अछि । सामजिक काजमे सेहो बहुत सक्रिय रहैत छथि । ककरो विवाहदानमे सहयोगसँ लऽ कऽ आँखि उपचारमे सेहो कतेको व्यक्तिके सहयोग कएने छथि ।
वृक्षारोपणमे सेहो ई लागल रहैत छथि । एकदर्जनसँ बेसी लोककेँ ई रोजगारी देने छथि । हिनक जेठ पुत्र सेहो एक दर्जनसँ बेसी अपन ग्रामीणकेँ नोकरी देने अछि । एकटा दार्शनिक कहने छथि – किओ व्यक्ति अहाँ लग तीन कारणसँ अबैत अछि । भावसँ, अभावसँ आ प्रभावसँ । यदि भावसँ अबैत अछि तँ ओकरा प्रेम दी, अभावसँ आबए तँ मदत करी आ यदि प्रभावमे आबए तँ प्रसन्न भऽ जाइ जे भगवान अहाँकेँ एतेक क्षमता देने अछि ।
एकवर्ष पूर्व भेल विवाहक वर्षगांठक अवसरपर सभ धियापुता मिलकऽ हिनका एकटा कार गिफ्ट देने अछि । एखन ओ उएह कार चढ़ैत छथि । सामाजिक काजमे कालिकान्तकेँ खूब मन लगैत छन्हि ।
एकटा दार्शनिक कहने छथि – स्थान (मंजिलि) हुनके मिलैत अछि, जिनक सपनामे जान होइत अछि ! पाँखिसँ किछु नहि होइत अछि, हौसलासँ उड़ान होइत अछि ! कालिकान्तक जीवनकेँ देखलासँ किछु एहने अनुभव होइत अछि ।
अब्राहम लिङ्कनक एकटा बिचारसँ ई लेखकेँ अन्त्य करए चाहैत छी – अहाँक मूल्य एहिसँ तय नहि होइत अछि अहाँ कि छी, ई एहिसँ तय होइत अछि जे अहाँ स्वयंकेँ कि बनावएकेँ क्षमता रखैत छी । असम्भव शब्द कर्मठ व्यक्तिक शब्द कोषमे नहि होइत अछि । लड़ब अहाँक नियत अछि । ओहिसँ भागि नहि सकैत छी । बाट पृथक देखाइ देत । मुदा यदि लड़एकेँ अछि । लड़ब अहाँक असफलता नहि अछि । मुदा असफल भऽ कऽ लड़ब छोड़ब असफलता अछि, एकटा कायरता सेहो अछि ।
नीक सोचक संग आगाँ बढ़बैक तँ सफलता भेटबए करत, एकर उदाहरण कालिकान्त छथि ।

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