प्रजातन्त्र सेनानी निर्गुणजी यादवक निधन २०७० साल माघ ६ गते सोमदिन भेल छल । आइ हुनक स्मृति दिवस अछि । विभिन्न स्थानपर हुनक स्मृति दिवस मनाओल गेल अछि । निर्गुणजीपर निर्गुण चर्चा नामसँ एकटा पुस्तक आबि रहल अछि । ओ पुस्तकमे प्रादेश सांसद रामअशिष यादवक एकटा संस्मरण अछि । आ संस्मरण पढ़ी…

 सुजीत कुमार झा

रामअशिष यादव धनुषा निर्वाचन क्षेत्र नम्बर २ के (ख) सँ निर्वाचित प्रदेश सांसद छथि । अही क्षेत्रसँ लगातार दोसरबेर चुनाव जीतल छथि । हुनके क्षेत्रमे प्रजातन्त्र सेनानी निर्गुण यादवजीक गाम नरहिया अछि । ओ कहैत छथि, ‘निर्गुणजीक नाम बहुत सुनने छलहुँ, जखन पहिलवेर देखलहुँ तँ विश्वासे नहि भेल एतेक क्रान्तिकारी नेता एतेक सहज !’
निर्गुणजीकँे पहिलवेर ओ अपने घरमे देखने रहथि । ‘हुनकासँ हमरा घरमे परिवारिक सम्बन्ध छल । कुटमैताक हिसाबसँ हमर कनकपट्टी स्थित घर पहुँचल रहथि । बहुत देरधरि रुकल रहलथि, फेर भोजन कऽ कऽ हमरा घरसँ गेल रहथि,’ सांसद यादव कहैत छथि ।
निर्गुणजी राणाशासन विरुद्ध आन्दोलनक क्रममे रेल कब्जा कएने रहथि, प्रहरी चौकीसभ लुटने रहथि, सरकारी कार्यालयमे अगाजनी कएने रहथि ओ तँ खुंखारसन लोक होएवाक चाही मुदा एतेक सहज हुनक कल्पनासँ बाहरके लोक रहथि । सांसद यादव कहत छथि, ‘जहिआ हम पहिलवेर देखलहुँ ओहि समयमे राजनीतिमे ओ ओतेक सक्रिय नहि रहथि हँ तखन नेतृत्व क्षमता करिश्माइए छल ।’ निर्गुणजीसँ भेटवाक लेल कनकपट्टीमे भीड़ लागि गेल छल ।
लिडर उदाहरणीय होइछ, निर्देशन आ दिशा प्रदान करैत अछि । नेतृत्व करब एकटा विशेष कला अछि आ ई कला सामान्य व्यक्तिसभ भीतर नहि भेटए सकैत अछि । ई अवश्य अछि जे यदि किओ बहुत मेहनत करत, आ निरन्तर अपना भीतर नेतृत्व करए सकएके क्षमताके बढ़ावए प्रयत्न करत तँ अवश्य ई सम्भव अछि । सही ढंगसँ जीवन व्यवस्थापन करए सकब सेहो एहने व्यक्तिसभसँ सम्भव होइत अछि, जिनक भीतर नेतृत्व करएके विशेष योग्यता होइत अछि ।
नेतृत्व कला कोनो व्यक्तिक पर्सनालिटीमे अत्यन्त महत्वपूर्ण आ खास बात होइत अछि । एकटा सफल आ सन्तुष्ट जीवन कोना जीवि ई बातमे सेहो निर्भर होइत अछि जे कि अहाँं भीतर सही नेतृत्वक क्षमता अछि वा नहि ? ई एकटा एहन योग्यता अछि, जाहिसँ जखन पूर्णता पबैत अछि, तखन अहाँक व्यक्तित्व सही ढंगसँ विकसित भेल भऽ जाइत अछि ।
दोसर शब्दमे यदि अहाँ ककरो अपनासंग सही ढंगसँ सही स्थानमे लऽ कऽ जा सकैत छी, ओकर मार्ग दर्शक बनए सकैत छी आ असल कार्य करए लेल प्रेरित करए सकैत छी तँ मात्र अहाँं एकटा असल लिडर छी । जीवनमे आगाँ बढ़ए वा देश विकास करए लेल कठिन परिस्थितिसंग सामना करए हेतु अहाँमे नेतृत्व क्षमता हएब आवश्यक अछि । एहि कारणेँ यदि अहाँं एकटा सफल लिडर बनए चाहैत छी तँ अहाँके ई गुणसभ जनबाके चाही ।
करिश्माइ लिडरक गुण सम्बन्धमे जानकारसभ कहैत अछि – सही निर्णय लेबएके क्षमता, बाजएके शैली आ व्यक्तित्व दूरदर्शी, आत्मविश्वास आ आशावादी विश्वसनीयता इमान्दारिता साहसी, जिम्मेवारीवहन करए सकएवला, विनम्र आ शालीन व्यवहार उत्साही आ परिश्रमी स्वभाव संयमता, अनुशासित धैर्यवान आ सहनशील स्वभाव उदार वा सहानुभूतिपूर्ण सोच आवश्यक अछि ।
किछु एहने गुणसभ निर्गुणजीमे देखल गेल छल । ओ आन्दोलनके उचाइपर लऽ गेलथि । ‘चौकी लुटलथि मुदा हत्या नहि कएलथि हुनकर सफलताक राज अहिंसावादी आन्दोलन छल,’ सांसद यादव कहैत छथि ।
एकटा दार्शनिक कहने छथिन –
क्रान्तिमे महत्व सामजिक परिवर्तनक अछि,
नहि कि संघर्ष आ रक्तपातक ।
एकटा सफल लिडर भीतर आत्मविश्वास आ आशावादी होबए पड़लैक, किए तँ अपन क्षमतामे कनिए, हम करए नहि सकब ताहि प्रकारक विचारसँ कोनो व्यक्तिके सफल होबए नहि देत । जे व्यक्तिमे आत्म–विश्वास अत्याधिक अछि आ निडर होइत अछि ओकरा कोनो चीजक नेतृत्व करएमे मुश्किल नहि हएत । आत्मविश्वास नहि भेल लिडरके ओकरे अधिनमे कार्य करएवला लम्बा समयधरि लिडरक रुपमे समर्थन नहि करत ।
आत्म–विश्वाससँ भरल लिडर अपन टिममे सेहो आत्म–विश्वास जगा दैत अछि आ ओकरा अपन लक्ष्य हासिल करए हेतु उत्प्रेरित करैत अछि । एकटा आत्मविश्वास भेल लिडर वास्तवमे एकटा उच्च आशावादी व्यक्ति होबए सकैत अछि । सांसद यादव कहैत छथि, ‘निर्गुणजी संग बात कएलापर किछु एहने लक्षणसभ भेटल ।’ ओ सयौवेर निर्गुणजी संग भेटलथि । हुनक पूरा जीवन शिक्षा अछि । शिक्षाक लेल उत्प्रेरणा जगावए वला काज, विवाहमे तिलक विरोधी अभियान, विवाहमे होबएवला खर्च रोकएके तरकिब प्रशंसायोग्य छल । ‘एखनो ओ काजसभके निरन्तरता देल जा सकैत अछि,’ सांसद यादव कहैत छथि ।
सत्यसंग नहि भागब आ शक्तिसंग नहि डराएब एकटा साहसी व्यक्तिक परिचय अछि । साहसी बनब एकटा सफल लिडरक लेल आवश्यक गुण अछि । साहसी होबएके अर्थ अछि – डरके जीतब, कठिन परिस्थितिक डटिकऽ सामना करब । हमरासभके मनमे ई राखए पड़त जे बिना साहस हमसभ कोनो कार्यके सफल बनावए नहि सकब । हमसभ दयावान, इमानदार, उदार वा सत्यवादी किछु बनए नहि सकब । एकटा लिडरमे बुद्धिमता आ साहससंग प्रतिकूल परिस्थितिके सामना करएमे सक्षम होबए पड़लैक । आन्दोलनक क्रममे निर्गुणजीक ई गुणसभ देखल जाइत छल ।
चुनौतिके स्वीकार करए पड़त कठोर परिश्रम गुणक होबए पड़लैक । ई ध्यानमे रखबाक चाही जे एकटा दृढ अठोट लऽ कऽ चलएवला लोक इतिहास कोरए आ परिवर्तन करए सकत । एकटा बढि़या लिडरमे बड़कासँ बड़का समस्याक बीच सेहो संतुलित, संकल्पित आ सहनशील बनल रहबाक चाही । २०१५ साल फागुन ७ गते होबएवला नेपालक चुनावमे नेपाली कांग्रेस पार्टीक उम्मेदवारी तय करए विपी कोइरालाक अध्यक्षतामे एकटा संसदीय समिती बनल छल । चुनावक लेल ककरा टिकट देल जाए निर्णय करए वि.पी. सरोज बाबू (सरोज प्रसाद कोइराला) क जनकपुरधामक व्रह्मपुरीमे रहल घरमे पार्टी कार्यकर्तासभके बैसार कएलन्हि । ओहि बैसारमे करीब ५०–६० गोटे पार्टीक शीर्ष कार्यकर्ता पहुँचल छल । विपी कहलन्हि एहि क्षेत्रसँ ककरा टिकट देल जाए । एहिपर राम नारायण मिश्रजीक विचार आएल जे मजगुत विरोधीसंग प्रतिस्पर्धा करए हमरासभके तराइक लोकेके उठाएल जएबाक चाही । फेर ई यादव बाहुल्य क्षेत्र छैक कोनो यादवके टिकट देल जाए । विरोधीसभ प्रभावशाली राजपूत नेता जमुना प्रसाद सिहके उठौने छल । हुनक काटमे कोनो यादव थरक नेताक उठाओल जाए चारुकातसँ उठल यादवमे निर्गुणजीक नाम आएल छल ।
‘हमर नाम अएलाक बाद हम कहलहुँ, ‘हमरा नहि, सरोज बाबूके टिकट भेटबाक चाही । हमसभ जतेक गोटे छी हुनके वनाएल कार्यकर्ता छी । यदि जातिक आधारपर टिकट देबाक अछि तँ नेपाली काँग्रेस किए बनेलहुँ…, निर्गुणजी स्वयं अपन जीवनीमे लिखैत छथि ।’
‘जे नेता बनेलन्हि ओकरा ओ नहि छोड़लाह इतिहास अहीसभक कारणेँ हुनका आदरक संग स्मरण करैत अछि,’ सांसद यादव कहैत छथि ।
भारतक महान क्रान्तिकारी नेता एवं शहीद भगत सिंह कहने छथिन – कोनो मनुष्यके मारब आसान अछि, परञ्च ओकर विचारके नहि । महान साम्राज्य टूटि जाइत अछि, तबाह भऽ जाइत अछि, जखनकी हुनक विचार बचि जाइत अछि ।
सांसद यादव भगत सिंहके बातके जोड़ैत कहैत छथि, ‘निर्गुणजीके एतेक आन्दोलन कएलाक बादो व्यक्तिगत रुपसँ किछु नहि भेटल मुदा हुनक विचार कृति जीबैत अछि, सदा जीबैत रहत ।’
शहीद भगत सिंहक बातसँ अन्त्य करए चाहैत छी । ओ कहने छथि –हम एहि विषयपर जोड़ दैत छी जे हम महत्वकांक्षा, आशा आ जीवनक प्रति आकर्षणसँ भरल छी । परञ्च आवश्यकता पड़लापर ई सभ त्यागि÷छोडि़ सेहो सकैत छी, आ उएह सही बलिदान अछि ।

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