चाह चर्चाः जनकपुरधामक पूर्व उपमेयर असगर अली

Byदूधमती साप्ताहिक

२७ पुष २०८०, शुक्रबार ०६:०० २७ पुष २०८०, शुक्रबार ०६:०० २७ पुष २०८०, शुक्रबार ०६:०० ,

अपने ९ कक्षाधरि अध्ययन कएने छथि मुदा तीनटा पुत्र छन्हि तीनू

शिक्षित छन्हि । एकटा व्यवसायी, एकटा बैंक मैनेजर आ एकटा चिकित्सक । जमाए सेहो शिक्षण पेशासँ आबद्ध अछि । ‘पढ़ाइकेँ महत्व हम बढि़या जकाँ बुझैत छी, तँए अपन धियापुताक मात्र नहि अड़ोसी पड़ोसीक धियापुताक पढ़ाइक लेल प्रोत्साहन करैत रहलहुँ,’ असगर अली कहैत छथि ।
‘सरस्वती माध्यमिक विद्यालयमे पढ़ैत छलहुँ, १० कक्षामे नामांकनक लेल ९ रुपैया चाहैत छल मुदा ओतेक रुपैया नहि भेलाक कारणेँ पढ़ाइकेँ निरन्तरता नहि दऽ सकलहुँ,’ असगर कहैत छथि । एहनेमे जखन ककरो देखैत छथि जे पढ़ाइमे ककरो पैसा बाधक बनैत अछि, ओ कर्जा लऽ कऽ सेहो ओकरा लेल प्रयास करैत रहैत छथि । ‘हमरा बुझल अछि पैसा स्थायी नहि होइत अछि, हमर परबाबा प्यारे मोहम्मद लग जनकपुरधाममे ७० बिग्हा जमीन छल मुदा हुनक परपोताकेँ ९ रुपैयाक लेल पढ़ाइ छोड़ए पड़ल,’ ओ कहैत छथि ।

♦ सुजीत कुमार झा

सफल व्यक्तिक खोजी कएल जाए तँ असगर अलीकेँ अग्र स्थानमे राखल जा सकैत अछि । कहल जाइत अछि जनकपुरधामक राजनीतिमे जातीवादी हाबी अछि मुदा अल्पसंख्यक भेलाक बाबजूद एहिठाम दूबेर वडाध्यक्ष आ एकबेर ओ उपमेयर भेल छथि । उपमेयरमे भलही मनोनित भेल होइत मुदा वडाध्यक्षमे जनताक मत माने रखने छल ।
अपने ९ कक्षाधरि अध्ययन कएने छथि मुदा तीनटा पुत्र छन्हि, तीनू शिक्षित । एकटा व्यवसायी, एकटा बैंक मैनेजर आ एकटा चिकित्सक । जमाए सेहो शिक्षण पेशासँ आबद्ध अछि । ‘पढ़ाइकेँ महत्व हम बढि़या जकाँ बुझैत छी, तँए अपन धियापुताक मात्र नहि, अड़ोसी पड़ोसीक धियापुताक पढ़ाइक लेल प्रोत्साहन करैत रहलहुँ,’ ओ कहैत छथि ।
असगर दर्जनो मुस्लिम युवासभकेँ पढ़ावएकेँ काज सेहो कएने छथि । बीना शिक्षाकेँ जीवन अन्धकार होइत अछि, फेर मुस्लिम समाजमे गरीबी बहुत अछि, तँए लोक कमे उमेरसँ रोजगारीमे लागि जाइत अछि । ओ स्वयं पैसाक अभावमे पढ़ाइके निरन्तरता नहि दऽ सकलथि !
अमेरिका अपन आर्थिक विकाससँ संसारकेँ एकटा मजगुत उदाहरण देने अछि । ओ उदाहरण अछि – देशक आर्थिक विकासक लेल धनसम्पत्ति नहि, ज्ञान चाही । देशक आर्थिक विकासक लेल उएह ज्ञानक आवश्यकता होइत अछि । ज्ञान भेलापर धनसम्पत्ति स्वतः सृजना होइत अछि । कारण ज्ञानसँ धनक सृजना होइत अछि, धनसँ धन सृजना नहि कएल जाइत अछि । उएह ज्ञान प्रयोग कऽ अमेरिका सर्वप्रथम चन्द्रमामे पहुँचल छल वा कही विश्वक सभसँ समृद्ध देश अछि । ‘तँए ज्ञान हमरो अहाँकेँ चाही, एहीसँ सभ किछु प्राप्त होइत अछि,’ ओ कहैत छथि । मुस्लिम समाजमे आधुनिक शिक्षाके आवश्यकता उपर सभदिन ओ जोड़ दैत रहैत छथि ।
‘सरस्वती माध्यमिक विद्यालयमे पढ़ैत छलहुँ, १० कक्षामे नामांकनक लेल ९ रुपैया चाहैत छल मुदा ओतेक रुपैया नहि भेलाक कारणेँ पढ़ाइकेँ निरन्तरता नहि दऽ सकलहुँ,’ असगर कहैत छथि । एहनेमे जखन ककरो देखैत छथि जे पढ़ाइमे ककरो पैसा बाधक बनैत अछि, ओ कर्जा लऽ कऽ सेहो ओकरा लेल प्रयास करैत रहैत छथि । ‘हमरा बुझल अछि पैसा स्थायी नहि होइत अछि, हमर परबाबा प्यारे मोहम्मद लग जनकपुरधाममे ७० बिग्हा जमीन छल मुदा हुनक परपोताकेँ ९ रुपैयाक लेल पढ़ाइ छोड़ए पड़ल, इहो सत्य अछि,’ ओ कहैत छथि ।
एक साँझ नहिओ खएलासँ हेतैक मुदा एक साँझ नहि पढ़लासँ प्रतिस्पर्धामे पीछड़एकेँ डर अछि हुनक कहब अछि । असगर जखन वडा नम्बर ५ केँ वडाध्यक्ष बनलथि ओहि वार्डक बजेटसँ वडा नम्बर ६ मे २०४३ सालमे राष्ट्रिय प्राथमिक विद्यालयक स्थापना करबौलन्हि । ओ विद्यालय मुस्लिम धियापुताक लेल मात्र नहि हलखोर, मेस्तर, विल्टाउ, दुसाध, हजाम जातिक छोट बच्चासभक लेल देबदूत बनल अछि ।
एहि क्षेत्रक प्राविधिक एवं व्यवसायिक शिक्षाक प्राथमिकतामे रखैत शैक्षिक संस्थासभकेँ सञ्चालनक संगहि शैक्षिक संस्थासभकेँ स्वायतताकेँ कायम रखैत राजनीतिक हस्तक्षेपसँ पूर्ण स्वतन्त्रताक आवश्यकता अछि । तहिना सामुदायिक एवं निजि विद्यालय आ उच्च शिक्षाकेँ विकासक लेल काज करबाक आवश्यकता अछि, जनकपुरधाममे प्रदेश स्तरक ई लाइब्रेरी सञ्चालन सेहो आवश्यक अछि ओ कहैत रहैत छथि ।
२०१२ साल फागुन १२ गते माता मदीना खातुन आ पिता दीलजान कबाडीक पुत्रक रुपमे जनकपुरधाम ५ मे जन्म लेनिहार असगरक पिता किसान रहथि । ‘जनकपुरधामक वार्ड नम्बर ४, ६, ७ आ ८ मे हमर किछु खेत छल, जाहिमे अन्न आ तरकारी उब्जैत छल ओहीसँ भोजन पानी चलैत छल,’ ओ कहैत छथि । हुनक विवाह जनकपुरधाम १७ स्थित कनकपट्टी ओसरामे भेल छल । कनियाँक नाम फतमा खातुन अछि । ‘जे किछु बनल छी, ताहिमे कनियाँक धैर्यता आ सहयोगक योगदानकेँ सेहो नजरअन्दाज नहि कएल जा सकैत अछि,’ ओ गर्वक संग कहैत छथि ।
असगर कहिओ मोटर ग्यारेजमे मिस्त्रीक काज करथि, एतेकधरि कि गाडीक चालकक काज सेहो कएने छथि । ‘हम जनकपुरधामक क्याम्पस चौक लग रहल रामकुमार अग्रवालक ग्यारेजमे काज कएने छी, हुनका ट्रक बस सभ सेहो छल । जाहिमेसँ किछु गाड़ी सेहो चलेलहुँ,’ । गाडीक चालक वा मिस्त्रीक काज तँ बढि़ए मानल जाइत छैक, तखन किए छोड़लियैक ? चाहचर्चाक क्रममे ओ कहलन्हि, ‘अल्लाहके किछु आओर मन्जुर छलन्हि ! ओ नहि छोड़ने रहितहुँ तँ कनिक संघर्ष तँ भेल मुदा समाजमे जे पहिचान स्थापित भेल अछि, ओ नहि भेल रहथि !’
दारु, तमाकुल, गुटखा, सिकरेट, बिड़ीसँ हुनका घृणा अछि । डराइवरी लाइन आ मिस्त्री लाइनमे ई सभ समान्य बात होइत अछि । ‘सभके दारु सिकरेट पीबैत देखलाक बाद मन नहि मानलक आ हम ओ काज छोडि़ देलहुँ,’ ओ कहलन्हि ।
एकरबाद अनिस कुरैसीसंग मिलकऽ जनकपुर चुरोट कारखानामे कबड़ाक ठिक्का लेबए लगलथि । ओहिमेसँ काठक बक्सा, पतर, प्लाष्टिकक रिंग, बोतल, पुरान ब्याट्रिकक सामानसभ किनथि जकरा भारतीय व्यापारीसँ बेचिदैथि । ई क्रम २०३६सालसँ २०४२ धरि कएलन्हि । २०३७ सालमे पशुपति जयसवालसंग मिलकऽ सर्लाहीमे खाद्य ढुवानी कएलन्हि आ जनकपुरधाममे चाउर ढुवानीक काज कएलन्हि । हिनक मूल कमाइ खराब कागजसँ भेल अछि । खराब कागज लऽ कऽ अपना कबाड़ामे अनथि आ फेर ओकरा बेचथि । ‘वेस्टेज कागजसँ ओहि समयमे पहिले दिन ३२ सय रुपैया कमाइ भेल छल, आ उएह काजसँ गरीबी हटल अछि,’ ओ कहैत छथि । कागजवला काज २०३६ सालसँ २०५९ धरि कएलन्हि ।
ओना असगर सहीमे राजनीतिक लेल बनल छथि । ‘एहिमे जतेक सन्तुष्टि आओर कोनोमे नहि अछि,’ ओ बेर–बेर कहैत रहैत छथि । राजनीति आ समाजसेवा दुनू एक दोसराक पुरक अछि, एकरे लऽ कऽ ओ चलैत आएल छथि ।
जीवन तँ धानए पड़लैक, घर व्यवहार चलावए पड़लैक, परिवार पालए पड़लैक, बेटाबेटीकेँ लालनपालन, शिक्षा संस्कार देबही पड़लैक । ई सभ करए लेल कोनो नहि कोनो व्यवसाय तँ करही पड़लैक । परिवार पालए, बेटाबेटीकेँ पढ़ावए, सम्पत्ति कमाए कहि किओ राजनीतिमे अबैत अछि, तँ ओ गलत अछि । राजनीतिमे पैसाकेँ जोड़हीकेँ नहि चाही । हमरासभ लग राजनीति कएलापर नेता भेलापर सभकिछु भेटैत अछि । चारुदिससँ पैसा कमाओल जा सकैत अछि । ऐशआरामक जीवन जीवए भेटैत अछि ओ भ्रम मात्र अछि । स्वार्थ प्रेरित राजनीति करएवला किछु व्यक्तिसभक कारण हमरसभक राजनीति धुमिल भेल अछि । जनतामे राजनीतिज्ञसभ प्रति निराशा अछि । अविश्वास बढ़ल अछि ।
‘देशक राजनीतिकेँ प्रतिष्ठा बढ़ावए, राजनीति करएवलासभकेँ अपन जीवन चलावए कोनो नहि कोनो व्यवसाय वा पेशा करही पड़त,’ हुनक कथन अछि ।
कृषि क्षेत्रमे आबद्ध भेल राजनीतिज्ञकेँ कृषिके पेशा बनावए पड़लैक, शिक्षण क्षेत्रमे भेल शिक्षणकेँ । स्वयं जाहि क्षेत्रमे छी, जाहि विषय आ दक्षतामे निपुण छी उएह क्षेत्रमे काम कएलासँ, व्यवसाय कएलासँ सहज होइत अछि । राजनीति करए सेहो पैसा चाही । पार्टीक कार्यक्रमसभमे मात्र नहि, स्थानीय तहमे आम जनताक समस्या, शिकायतसभ सुनए समाधान करए आ ओकरासभकेँ सक्षम बनावए पैसाक आवश्यकता होइत अछि । मुदा राजनीति कऽ पैसा कमाएब, आ जनताक सेवा करब से सोचो सही नहि अछि ।
हुनक राजनीतिक गुरु श्रवणकुमार साह छन्हि । ‘हमरा राजनीतिमे उएह अनलथि, फेर कोनो समस्या भेल तँ एखनो सभसँ पहिने हुनकेसँ सलाह लैत आएल,’ ओ जानकारी देलन्हि । जखन असगरकेँ उपमेयरमे मनोनित कएल गेल छल तँ हुनक मेयर वा कही ओहि समयक मनोनित मेयर श्रवणकुमार साह बनल रहथि । भलहि उपमेयर असगर भेल रहथि मुदा जनतासंग सम्वाद आ विकास निर्माणसँ जुड़ल बेसी काज उएह करथि ।
‘हमरा आ श्रवणमे अन्तरे नहि अछि । तँए कोनो निर्णय हमसभ एकठाम बैसिकऽ करैत छलहुँ,’ ओ कहैत छथि । असगर पहिलबेर २०३३ सालमे गाउँ फर्कसँ राजनीतिमे आएल छथि । वार्ड नम्बर ५ क सदस्यमे ओ मनोनित भेल रहथि । २०३४ सालमे वार्ड नम्बर ६ मे नगरपालिका सदस्यक लेल चुनाब सेहो लड़लथि मुदा पराजित भेल । ‘पराजित भेलाक बादो हम सामाजिक काजमे लागल रहलहुँ, जाहिकेँ कारण राजनीतिमे आगाँ बढ़एकेँ अवसर भेटल,’ ओ कहैत छथि ।
सामाजिक कार्य वा समाज–कार्यक छोट अर्थ समाजक लेल करएवला काज अछि । ई अपन व्यक्तिगत काजसँ अलग होइत अछि । एहिमे स्वयंक घर परिवारसँ बाहर अन्य घर परिवारक पारिवारिक सदस्यसभ बड़का समूह होइत, समग्र राष्ट्रकेँ सेहो सहयोग कएल जा सकैत अछि ।
वास्तवमे सामाजिक कार्य एहन कार्य अछि, जतए सामाजिक विज्ञानक माँगमे रहल विभिन्न मानव जीवन, व्यवहार, सामाजिक समूह आ सामाजिक कार्यसभक विषयमे अध्ययन कएल जाइत अछि । एहन विज्ञानसभमे मूलरुपसँ समाजशास्त्र, मानवशास्त्र, व्यवहारिक ज्ञान, व्यवस्थापन, जनसंख्या, शिक्षा, भूगोल, इतिहास, कानून, राजनीतिशास्त्र, मनोविज्ञान, प्रशासन आदिसभ पड़ैत अछि । सामाजिक कार्यक विकास १९ अम शताब्दीक आगाँ भेल छल । सामाजिक कार्यद्वारा विभिन्न संस्थासभमे आ संस्थासभमार्फत सहयोग दिआवएकेँे काज होइत अछि ।
एकर प्रारम्भ व्यक्तिसभद्वारा देल जाएवला दान वा चन्दासँ शुरु भेल अछि । ई दान वा चन्दा धार्मिक संगठन आ निसहायसभक लेल किछु व्यक्तिसभद्वारा देबए शुरु कएलाक बाद अन्य व्यक्तिसभ सेहो शिक्षा लेलन्हि, फेर एकर अवधारणा शुरु भेल । एकर अवधारणा शुरु भेल ओहि समयमे समाजमे धर्मकेँ मानएवला बेसी रहथि । धर्मक नाममे लोकसभ नहि जनैत तरिकासँ समाजसेवा वा सामाजिक कार्यकेँ अपनाबैत गेल । ई प्रक्रियासँ विभिन्न स्थान आ देशमे नहि जनैत तरिकासँ प्रसारवादक रुप लैत गेल आ विशेष कऽ औद्योगिक क्रान्तिक बाद मूर्तरुप लेलक ।
बेलायतसँ शुरु भेल एकर विकास आइ संसारभरि व्याप्त अछि । ई कार्य प्रगतिशील प्रकृतिक होइत अछि । ई बहुउद्देश्यीय कार्य सेहो अछि, जतए स्वयं व्यक्तिद्वारा असगरे करए किछु जटिलता अबैत अछि । मुदा असगरे नहि हएत, ओहनो नहि अछि । ई क्रमवद्ध आ चरणवद्ध सेहो होइत अछि । एना क्रमवद्ध आ चरणवद्ध अनुसार हरेक सामाजिक कार्यक लेल आवश्यक समूह आ सेवाक छनौट कऽ प्राथमिकता देल जाइत अछि ।

ओ अपांग संघ, क्षयरोग, जनकपुर जेसिज सहितक संस्थामे सेहो काज कएने छथि । मैथिली भाषा, कला संस्कृतिक विकासक लेल सेहो हिनक योगदान अछि । मिथिला नाट्य कला परिषद्क २० वर्षधरि ई सलाहकार रहथि ।
२०३८ सालमे नेपाल किसान संघक नगर उपसभापतिमे निर्वाचित भेल छलथि । धनुषा जिलामे तहिआ मकेश्वरप्रसाद सिंह आ हेमबहादुर मल्ल दुनू खेमा छल । ओ मकेश्वर खेमामे रहथि । २०४३ सालमे जनकपुरधामक ५ नम्बरक वडाध्यक्षमे पहिलबेर निर्वाचित भेल रहथि । बहुदल एलाक बाद सेहो २०४९ सालक निर्वाचनमे ई विजयी भेल छथि । २०५४ मे उपमेयरमे चुनाव लड़ल रहथि मुदा पराजित होबए पड़लन्हि । तकर पाँच वर्ष नहि बितैत ओ उपमेयरमे मनोनित भेलथि ।
एकवर्ष पूर्व भेल प्रदेश सभा सांसदक चुनाबमे सेहो पराजित भेल छथि मुदा ओ कहैत छथि, ‘पराजयसँ डेराइत नहि छी, एकटा पाठक रुपमे लैत छी ।’
निर्वाचन लोकतन्त्रक सुन्दर पक्ष अछि । उएह निर्वाचनमे प्रतिस्पर्धा होइत अछि । जतए जनमत बेसी अबैत अछि, ओतहि जीत होइत अछि । निर्वाचनमे जनताक मतकेँ सर्वपरी मानल जाइत अछि । जनता जकरा पसिन करैत अछि, ओ चुनाव जीतैत अछि आ जनप्रतिनिधि बनैत अछि । मुदा चुनाव नहि जीतएवला किछु नहि कऽ सकैत अछि, तेहन नहि होइत अछि । ओ संसदमे जनताक आवाज नहि उठा सकैत छथि मुदा बाहरसँ सम्बन्धित निकायकेँ खबरदारी करएवला काज मज्जासँ कऽ सकैत छथि । जीवनमे जय–पराजय स्वाभाविक होइत अछि । विजयमे मात्र नहि, पराजयमे सेहो शक्ति होइत अछि । ताहिसँ आगाँक यात्रा तय करए थप मार्गदर्शन करैत अछि । एखनकेँ पराजयसँ पाठ सिखैत काल्हिकेँ विजयक निमित सक्रिय होबए सकैत छी । पराजयमे असफलता मात्र नहि होइत अछि । एहिसँ खेलाड़ीक पहिचान आम रूपमे बढ़बैत अछि ।
असगर राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी धनुषाक संस्थापक सदस्य रहल छथि तँ महन्थ ठाकुरक नेतृत्वमे गठन भेल तराइ मधेश लोकतान्त्रिक पार्टीक केन्द्रिय सदस्य रहथि । राजपा आ लोसपाक सेहो केन्द्रिय सदस्य रहि चुकल छथि । वृषेशचन्द्र लालक नेतृत्वमे गठन भेल तमलोपाक एखन केन्द्रिय सदस्य छथि । ओ मधेश आन्दोलनमे सेहो सक्रिय रहल छलथि । जहिआ राप्रपामे रहथि ओहुँ समय मधेश मुद्दाक बात उठावएवला ओ पार्टी भीतरक अग्रणी नेता रहथि ।
जनकपुरधामक कोना विकास कएल जाए ? चाह चर्चाक क्रममे ओ कहलन्हि, ‘धार्मिक सांस्कृतिक रुपमे मात्र एहि शहरकेँ आगाँ बढ़ाओल जा सकैत अछि ।’ जहिना लुम्बिनीक विकासक लेल सरकार काज कऽ रहल अछि ओहिरुपसँ एकर विकास करए पड़लैक ओ बेर–बेर सभा समारोहमे उठबैत रहैत छथि ।
जनकपुरधाम माता जानकी, विदेहराज जनक, सर्वज्ञानी याज्ञवल्क्य, विदूषी गार्गी, महाऋषि अष्टावक्रक पावनि भूमि अछि । प्राचीन अध्यात्म दर्शन, सनातनी संस्कृति एतएकेँ प्रमुख संस्कृतिक रुपमे रहितो एहि धरापर जैन मुनि, बौद्ध भिक्षु एवं मुस्लिम धर्म गुरु, सुफी सन्त सभ सेहो गहन ध्यान एवं तपस्या सभ कएने छलथि । मुदा प्राचीन प्रखरतामे दिनप्रतिदिन कमी होइत आबि रहल अछि । ताहिसँ एकर गरिमाक संरक्षणक लेल काज करबाक ओ माँग करैत रहैत छथि ।
ओ कहैत छथि, ‘जहिना वनारसमे बाबा विश्वनाथ कोरिडोर बनलैक अछि तहिना जनकपुरधाममे बनावएकेँ राजा वीरेन्द्रक सपना रहन्हि । ओहिमे जानकी मन्दिर, राम मन्दिर, शिव मन्दिर, राम सागर, धनुष सागर, गंगा सागर, अरगज्जा सर, दशरथ तलावकेँ एकहिटा प्रागंणमे राखएकेँ छलैक, जकर प्रारम्भ विवाहमण्डपक निर्माणसँ शुरु भेल छल मुदा २०४६ सालक बाद ओ आगाँ नहि बढि़ सकल ।’
‘जनकपुरधाममे ऐतिहासिक पोखरि आ सार्वजनिक जमीनकेँ अतिक्रमण करब एकटा फैशन जकाँ चलि आएल अछि ओ रोकब सभसँ बड़का चुनौति रहल,’ ओ आगाँ कहैत छथि । जनकपुरधामक धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्थानक लेल गुठी संस्थानक अनावश्यक दबाव एवं कुचक्रसँ मुक्तिक लेल गुठी सम्बन्धि प्रादेशिक ऐन लएबाक आवश्यकता अछि हुनक सुझाब अछि ।
गुठीक व्यवस्थापनमे अपने महत्वर्पूण भूमिका खेलने ओ दाबी करैत छथि । गुठी जमीनमे पूजा कलम, नगदी, कोलैती, मनखप, विटौरी, लोकाभारकेँ कोना लोकक रैथानी बनैक ताहिमे लगलहुँ जाहिसँ लोककेँ जमीन प्राप्त भेलैक आ ई शहरकेँ व्यवस्थितिमे योगदान पहुँचल,’ ओ कहैत छथि ।
हुनक किछु माँग सभ अछि जकरा ओ बराबर उठबैत रहैत छथि । ‘मन्दिर, मस्जिद, ऐतिहासिक पोखरि, नदी सहितकं धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक केन्द्रसभकेँ सौन्दर्यीकरण एवं उचित व्यवस्थापन, शिशु वृद्धवृद्धा, गरीब एवं जोखिममे पड़ल व्यक्तिसभकेँ आवश्यक स्वास्थ्य उपचारक लेल विशेष स्वास्थ्य कार्ड मादे उपचार करेबाक व्यवस्था करए पड़त, प्रादेशिक अस्पताल जनकपुरधाम सहित अन्य स्वास्थ्य केन्द्रमे थप उपचार सभक व्यवस्था कए, अस्पतालकेँ आधुनिक सुविधा सम्पन्न बनाएबाक लेल आवश्यक काज करए पड़त,’ ओ कहैत छथि
टोल–टोलमे मोहल्ला क्लिनिक सञ्चालनक लेल जोड़ देबए पड़त, गर्भवती एवं प्रसुती महिलाक लेल निःशुल्क एम्बुलेन्सक व्यवस्था करए पड़त, कुपोषित धियापुताक लेल विद्यालयमे पोषणकेँ थप सुव्यवस्थिति करए पड़त, जेष्ट नागरिकक सम्मान सुरक्षाक लेल सदैव तत्पर रहएकेँ आवश्यकता संगहि अपांग असक्त आ असहायसभक सहयोगक लेल विशेष योजना लएबाक सेहो हुनक माँग अछि, बेरोजगार युवासभक लेल प्रदेशमे अधिकतम रोजगार श्रृजनाक आवश्यकता अछि ।
जनकपुर जयनगर चलएवला नेपाल रेल्वेसँ मालवाहक रेल सञ्चालन कराएबाक लेल आवश्यक काज करए पड़त, जनकपुर जटही भन्सार थप सुव्यवस्थित कऽ जनकपुरधामक आन्तरिक व्यापार वृद्धि पर जोड देबए पड़त, जनकपुरधामक सांस्कृतिक मेलासभकेँ प्रदेश सरकारकेँ पर्यटन प्रवद्र्धन योजना अन्तर्गत अलगे मेला प्राधिकरण स्थापना करए पड़त । एहनसभ हुनक सोच अछि ।
समाजमे बढल विकृति आ युवासभकेँ दूव्र्यवसनी रोकबाक लेल विद्यालयसभमे जनचेतना अभियान चलाबए पड़त, जनकपुरधामक खेल मैदानसभक स्तरीयकरण कऽ नियमित रुपसँ खेलकूद प्रतियोगिता करावए पड़त, एहि क्षेत्रक सरसफाइ, सुलभ शौचालय आ शुद्ध खानेपानीक उपलब्धताक लेल विशेष काज करए पड़त ओ बेर–बेर उठबैत छथि ।
आगाँ जानकी मन्दिर आ पाछाँ मस्जिद । एकदोसराक पावनि तिहारमे दुनू समुदायक लोक सक्रिय रहैत छथि, जे उदाहरणीय अछि । दोसरठामक लोक सेहो एहिठामसँ प्रेरणा लैत अछि । एहिमे दुनू समुदायक लोकक योगदानक नजरअन्दाज नहि कएल जा सकैत अछि । असगर स्वयं कहैत छथि, ‘हम हिन्दू मुस्लिम बीच पुलक काज करैत छी ।’

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