चाह चर्चाः वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम कुमार मिश्रसंग

Byदूधमती साप्ताहिक

१३ पुष २०८०, शुक्रबार ०३:१३ १३ पुष २०८०, शुक्रबार ०३:१३ १३ पुष २०८०, शुक्रबार ०३:१३

जनकपुरधामक वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम कुमार मिश्र । कानुनक

अभ्यास शुरु कएलाक कएवर्षधरि एकटा काज हिनका नहि भेटलन्हि मुदा जखन काज भेटव शुरु भेल एकर बाद ओ पाछाँ उनटि कऽ नहि तकलथि । किछुए वर्षमे १८ हजार मुद्दा ओ देखने छथि । ‘दैनिक ५ सँ १२ टा मुद्दाक पेसी रहैत अछि,’ ओ स्वयं स्वीकार करैत छथि । जनकपुरधाममे काजक लोड एतेक बढि़ गेल छन्हि सर्वोच्च वा आन जिलाक मुद्दा नहि लऽ रहल छथि । देवानीक विशेषज्ञ होइतो देवानी आ फौजदारी दुनू मुद्दा लड़ैत छथि । किछु वर्ष इम्हर जतेक प्रमुख मुद्दासभ अछि ओहिमे अधिकांश हिनके फर्ममे आएल अछि ।

 सुजीत कुमार झा

जीवनमे सफलता बहुत कठिनसँ भेटैत अछि । यदि बीचमे कनिओ नकारात्मक बात आबि जाए तँ बाटसँ भटकएके सम्भावना रहैत अछि, आगाँ बढ़एकेँ उत्साह टूटि जाइत अछि । परञ्च यदि सकारात्मक सोचैत छी, जीवनमे प्रगति भऽ सकैत अछि । बहुतो लोक सीमित प्रतिभाके छलथि मुदा आइ अपन मेहनतक बलपर अपना क्षेत्रमे उचाइ प्राप्त कएने छथि ।
एहने व्यक्तित्वमेसँ एक छथि जनकपुरधामक वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम कुमार मिश्र । कानुनक अभ्यास शुरु कएलाक कएवर्षधरि एकटा काज नहि भेटलन्हि मुदा इहो सत्य अछि जखन काज भेटब शुरु भेल एकर बाद ओ पाछाँ उनटि कऽ नहि तकलथि । किछुए वर्षमे १८ हजार मुद्दा ओ देखने छथि । ‘दैनिक ५ सँ १२ टा मुद्दाक पेसी रहैत अछि,’ ओ स्वयं स्वीकार करैत छथि । जनकपुरधाममे काजक लोड एतेक बढि़ गेल छन्हि सर्वोच्च वा आन जिलाक मुद्दा नहि लऽ रहल छथि । देवानीक विशेषज्ञ होइतो देवानी आ फौजदारी दुनू मुद्दा लड़ैत छथि । किछु वर्ष इम्हर जतेक प्रमुख मुद्दासभ अछि, ओहिमे अधिकांश हिनके फर्ममे आएल अछि ।
मानवीय क्रियाकलाप, चालिचलन आ व्यवहारकेँ सञ्चालन, नियन्त्रण आ व्यवस्थित करए निर्माण कएल गेल सिद्धान्त आ नियमसभक संगोर कानुन अछि । समाजक क्रियाकलापसभके मर्यादित बनावए लागू कएल गेल आचारसंहिता अछि कानुन । नागरिकक हक, अधिकार स्थापित करए आ सरकारकेँ निरकुंश होबएसँ रोकए औजारक रुपमे कानुन भुमिका खेलैत अछि । समाजमे शान्ति आ सुव्यवस्था कायम राखए, मानवक वैध इच्छा आ आवश्यकतापूर्तिक अवसर प्रदान करए, प्रत्येक व्यक्तिकेँ अधिकार आ कर्तव्यप्रति उत्प्रेरित करए, समाजमे अनुशासन आ नैतिकता कायम करए, नागरिकक हक अधिकार संरक्षण करए, परिवर्तित समाज आ आधुनीकिकरण संगहि विकासकेँ व्यवस्थित करए, अपराधीकेँ कानुनक दायरा भीतर आनि कानुन बमोजिम सजाय देबए कानुनक अधिकार क्षेत्र भीतरमे अछि ।
ई सभ काज कानुन व्यवसायीक जिम्मा रहल अछि । हिनके सभक बहसक आधारमे न्यायधीश निर्णय करैत छथि । ‘बहस बढि़या जकाँ करी आ जाहि व्यक्तिक पैरवी करैत छी ओ जीतथि ताहि लेल विशेष तैयारी करैत रहैत छी,’ वरिष्ठ अधिवक्ता मिश्र कहैत छथि ।
कोनो काजमे परफेक्ट होबए चाहैत छी तँ अभ्यास करएमे पाछाँ नहि हटी । अभ्यास करिते रहब तँ मुश्किल काजमे सेहो पारंगत भऽ सकैत छी । कोनो काजसँ अनजान हएब वा कही जानकारी नहि हएब खराब बात नहि अछि, मुदा किछु नव सीखए लेल तैयार नहि हएब गलत बात अछि । सुखी आ सफल जीवनक लेल आवश्यक अछि नव–नव बात सीखैत रहब आ अभ्यास करैत रहब ।
धनुषा जिलाक धनौजी गाउँपालिका १ लखौरी घर भेल मिश्रक माताक नाम गीता मिश्र आ पिताक नाम सुरेश मिश्र छन्हि । हिनक जन्म २०२० आसिन २४ गते भेल छलन्हि । महेन्द्र विन्देश्वरी बहुमुखी क्याम्पस राजविराजसँ विएल धरिक अध्ययन कएने छथि । वकिल बहुत प्रतिष्ठित पेशा होइत छैक से सुनि इएह बनए सोच हिनक मनमे आएल छलन्हि आ एकर ओ पढ़ाइ शुरु कएलन्हि । तहिआ रामनगिना सिंह, रामजी प्रसाद मैनाली, लक्ष्मीबहादुर निराला, युगलकिशोर लाल, सुरेश पाठक सहितक बड़का नाम छल ।
‘तहिआ समान्यतया पढ़ाइ माने डाक्टर इन्जिनियर होइत छल । सभक अभिभावक अपन धियापुताकेँ डाक्टर इन्जिनियर बनावएकेँ सपना देखबैत छलथि मुदा हमरा गाममे किछु व्यक्ति वकिलसभके बहुत चर्चा करथि । महाजन साह, बच्चेलाल ठाकुर, रामअवतार सिंह सहितक लोकसभ जे हमर ग्रामीण छलथि ओ बहुत मुद्दा लड़ैत छलथि उएहसभ वकिल पेशाक चर्चा करैत छलथि, उएह चर्चा ई क्षेत्रमे आवएकेँ प्रेरणा देलक,’ ओ कहैत छथि ।
शुरुएसँ वाकपटुतामे मिश्र बहुत तेज छथि । हिनक सफलताक एकटा कारण वाकपटुता सेहो अछि । दोसर वकिलसँ हिनका फरक, वाकपटुता सेहो बनौने अछि । फेर अध्ययनक लेल पूरा समय दैत छथि । ‘बरु एकटा मुद्दा कम लेब मुदा जे लेब ताहिमे गृह काज बढि़या करब,’ चाह चर्चाक क्रममे ओ बेर–बेर कहलन्हि ।
अध्ययन करब माने ज्ञान आर्जन करब अछि । अध्ययन ज्ञान प्राप्तिक साधन अछि । वास्तवमे विगतक ज्ञानसभकेँ बुझब आ वर्तमानके विश्लेषण कऽ ज्ञानकँे अद्यावधिक करएके अध्ययन कहल जाइत अछि । लोक अध्ययनक माध्यमसँ विगतकेँ बुझैत छथि, वर्तमानकेँ मूल्याङ्कन करैत छथि आ भविष्यकेँ निर्धारण करैत छथि । विगतक अनुभवसभ, अतीतक अभिलेख वा संस्मरणसँ सिखएवला पद्धति ज्ञानआर्जन अछि । जे अध्ययनसँ अनुसन्धान कऽ व्यवस्थित रूपमे ज्ञान प्राप्त कएल जाइत अछि, ओकरा वैज्ञानिक अध्ययन कहल जाइत अछि ।
एकबेर हुनका प्रहरी निरिक्षक बनएकेँ अवसर आएल रहन्हि । पूर्व मन्त्री लीला कोइरालाक सिफारिससँ कएगोटे प्रहरी निरिक्षक भेल रहथि, ओहि समय हुनको कहल गेल छल । ओहि समयक लोकसभ एसएसपी आ डिआइजीसँ अवकाश लेने छथि मुदा हिनक कनियाँ नहि मानलन्हि आ ई इएह पेशामे रहि गेलथि । मिश्र कहैत छथि, ‘हमर प्राक्टिस नहि चलैत छल, दोसर क्षेत्रमे जएल जाए मनस्थिति बना लेने छलहुँ मुदा कनियाँ सुनिता जीद्द करए लगलीह आ हमरा इएह पेशामे रहए पड़ल ।’ हुनक जीद्दक भाषा छल – हम वकिलसँ विवाह कएने छी, इन्सपेक्टरसँ नहि ।
आम्दानी नहि भेलाक कारणेँ हिनक कनियाँकेँ शिक्षिकाक काज करए पड़लन्हि । हिनक माए तँ खेतीपाती करएकेँ सलाहधरि बेर–बेर दैन्हि । गाममे सेहो चर्चा होबए लागल छल, श्यामक वकिली नहि चलैत अछि । मुदा ई हिम्मत नहि हारलथि । एकटा जानकार कहने छथि बेसी मनुष्य बदनामीसँ डेराइत अछि । बहुत कम अछि जे अपन विवेकसँ डेराइत छथि । कठिन चीजके आसान बनावएकेँ प्रयास करबाक चाही । ‘जँ कनियाँ शिक्षिका बनए नहि स्वीकार करितथि तँ ई पेशामे टिकब बहुत कठिन छल,’ ओ कहैत छथि ।
गामसँ चाउर दालि चलि अबैत रहन्हि, घर खर्चा आ धियापुताक पढ़ाइक लेल कनियाँक नोकरी आधार बनल छल । हिनका दू पुत्र आ एक पुत्री छन्हि । एकटा पुत्र आ पुत्री हिनके पेशामे लागल छन्हि । तँ छोट लड़का रेडियोलाँजिष्टमे एमडी कऽ रहल छन्हि । एखन कानुन विषय दिस आकर्षण बढ़ल अछि । एसइई पार कएलाक बाद कोन विषय पढ़ी बहुतो लोक असमंजसमे रहल समय किछु विद्यार्थी निर्धक्क भऽ कानुन विषय पढ़ए लागल अछि । विद्यार्थीसभमे कानुन विषयप्रतिक आकर्षण विगतसँ बढ़ल हुनक अनुभव अछि । इएह आकर्षण हिनक धियापुताकेँ सेहो एहि दिस अनने अछि ।
ओ कहैत छथि, ‘कानुनी शिक्षाकेँ विश्व बजारमे बिक्रीयोग्य बनाएब आजुक चुनौतीपूर्ण कार्य अछि ।’ विश्व व्यापार सङ्गठनमे नेपालक संलग्नतासंग देशसँ उत्पादन होबएवला जनशक्ति राष्ट्रिय स्तरमे मात्र नहि भऽ विदेशक विश्वविद्यालयसभसँ आएल जनशक्तिसंग सेहो ठाढ़ होबए आ प्रतिस्पर्धा करए सक्षम होबए पड़लैक, एकरा लेल देशक विकासदिस अग्रसर रहल अवस्थाक लेल आदर्श आ उचित कानुनी शिक्षा होबए पड़लैक ।
सफलताक लेल दू चीज आवश्यक अछि । पहिल आत्मविश्वास आ दोसर ऊर्जा । हमरासभकेँ सही समयक लेल शक्तिक संचय करबाक चाही । मुदा बराबर होइत अछि, एकर उलट । लोक व्यर्थ काजमे अपन शक्ति लगबैत छथि । हमसभ जान–अनजानमे दिनभरिमे कतेक काज एहन कऽ लैत छी जे आवश्यक नहि अछि वा जाहिसँ हमरसभक उर्जा समाप्त होइत अछि । एहन काजसँ बचएकेँ आवश्यकता अछि । महाभारतक युद्धक समयमे भगवान श्रीकृष्ण बुझि गेल रहथि, अर्जुन भ्रममे फंसि गेल छथि । ओहि समय श्रीकृष्ण अर्जुनके गीताक उपदेश देलन्हि । भगवान बुझौलन्हि जे जखन लक्ष्य बड़का होइत अछि तँ सभ बात चैलि सकैत अछि, मुदा भ्रम नहि । ‘अपन पूरे भ्रम छोडि़कऽ मात्र अपन कर्मपर ध्यान देबाक चाही । जखन हमसभ अपन काज अधूरा मन आ भ्रमक संग करैत छी तँ सफलता नहि भेटैत अछि,’ मिश्र स्वयं स्वीकार करैत छथि ।
जनकपुरधाम ३ के घेवरचन्द्र वर्माक पहिल केश ओ लड़ल छलथि । हुनक घरमे डकैती भेल छल आ डकैत पकड़ा सेहो गेल छल । हिनक अलग पहिचान सर्लाहीक फेनरा गाविसक आगिलग्गी, ज्यान मारएवला उद्योग आ कर्तव्यजान मुद्दासँ बनल । ओहि घटनामे हरिप्रसाद राय प्रतिवादी रहथि । मलंगवा स्थित जिला अदालत सर्लाहीमे भेल बहसमे पौने १ बजेसँ साढे ५ बजेधरि ओ बहस कएने रहथि । ओहि समयक ई चर्चित घटना छल, हिनक बहस सुनए भीड़ लागि गेल छल । एकदिनक बाद जखन रामजी प्रसाद मैनाली मलंगवा पहुँचलथि हुनको आश्चर्यक सीमा नहि रहल । सभ श्याम वकिलक चर्चा करथि । ओहि समयमे ओ मैनालीजीक फर्ममे काज करथि ।
हिनक प्रतिभाकेँ मैनालीजी पहिचानि लेलन्हि आ अलग फर्म खोलए ओ सलाह देलन्हि । ‘मैनालीजीक सलाहसँ जनकपुरधामक रेल्वे स्टेशन लग २०५३ साउन १ गते ओम अम्बे लाँ चेम्बरक नामसँ फर्म खोललहुँ आ पहिले महिनामे ३०टा मुद्दा देखने छलहुँ,’ वरिष्ठ अधिवक्ता मिश्र कहैत छथि । शुरुकेँ तीनवर्ष सीताराम मण्डलसंग मिल कऽ फर्म चलौलन्हि । फेर मण्डल न्यायधीश भेलाक बाद असगरे फर्म चला रहल छथि । हरेक सफल व्यक्तिके एकटा बहुत लम्बा अतित होइत अछि जाहिपर ककरो नजरि नहि जाइत अछि उर्दुक चर्चित शायर वसीर भद्रा एकटा गम्भीर बात कहने छथि ई फुल हमरा कोनो विरासतमे नहि भेटल अछि, अहाँ हमर काँट भरल ओछायन नहि देखने छी ।
हिनक फर्ममे कानुनी सलाह लेबएवलाकेँ भीड़ लागल रहैत अछि । दोसर कानुन व्यवसायीसभ हिनक विषयमे कहैत छन्हि जे पैसाक मामलामे कनि कठोर छथि मुदा कायटा झगडि़या कहलन्हि जे हमरा निःशुल्क केश लडि़ देलन्हि अछि । ‘हमहुँ तँ मानवे छी, गरीबक कारणेँ ओ व्यक्तिसंग अन्याय भऽ जाइ ई हमर भीतरक मानवता काज नहि करैत अछि आ हम निःशुल्क काज करए लेल तैयार भऽ जाइत छी,’ ओ कहैत छथि ।
एहनो व्यक्तिसभ देखल गेल अछि, कपड़ा फाटल अछि आ हुनक चेम्बरमे आबि गेल ओ कपड़ा किन देलहुँ, कतेककँे भोजनो कड़ा देलहुँ । ‘खेत घड़ारी बेच कऽ तँ ई सभ नहि करैत छी ! दशटासँ कमाइत छी तँ एक दूटामे खर्च सेहो कऽ देलहुँ,’ ओ कहैत छथि । कानुनीए पेशासँ अपन आर्थिक हैसियत ई बना लेने छथि ।
सामाजिक काजमे सेहो ई अगे रहैत छथि । गरीबक बेटीक विवाह भेल, ताहिमे ओ खर्च करैत छथि । ‘देखलहुँ एहिमे कोन सामानक आवश्यकता अछि, हम किन देलहुँ, दर्जनो एहन विवाहमे सहभागि भेल छी,’ ओ कहैत छथि । धार्मिक काजमे तँ ई खर्च करितए रहैत छथि ।
पुराणमे गृहस्थ जीवनकेँ पृथ्वीक स्वर्ग कहल गेल अछि । जे सुख परिवारक संग जीवन जीबएमे भेटैत अछि, ओ संसारक कोनो चीजमे नहि भेटैत अछि । जाहि तरहेँ हमसभ अपन गृहस्थ जीवनक पालन करैत छी । उएह तरहेँ भगवान संसारक लालन पालन भरण पोषण करैत छथि । आइ हमरासभ लग भगवत कार्य करए लेल समय नहि अछि, जखनकी ईश्वर सभकेँ दैनिक २४ घण्टाक समान समय देने छथि । एहिकारणेँ व्यक्तिकेँ धार्मिक कार्यक लेल सेहो समय निकलबाक चाही । मनुष्यकेँ जीवनमे धर्मक महत्व हुनक जीवनक तौरतरिकासँ अछि ।
व्यक्तिक जीवनकेँ सम्पूर्ण उमेरके कोना बितावएके अछि, कोन–कोन क्षेत्रमे हुनका कि करबाक अछि, कोन–कोन विषयकेँ पालना करए पड़त, कि सही अछि कि गÞलत ई सभ धर्मपर निर्भर करैत अछि ।
वरिष्ठ अधिवक्ता मिश्र धार्मिक काजमे सभ दिन आगाँ रहलथि अछि । काठमाण्डूक पशुपतिमे भेल रामनाम संकीर्तन महायज्ञकेँ अध्यक्ष रहथि । वनारसमे भेल २४ मण्डपीय रामनाम संकीर्तन विष्णु महायज्ञक अध्यक्ष एवं मूल जजमान रहथि । भारतक बथनाहामे भेल यज्ञमे सेहो सहभागि रहथि । एक वर्ष पूर्व भेल रंगभूमि मैदानक यज्ञक सेहो हर्ताकर्ता छलाह । ओ यज्ञ पगलाबाबा उपस्थितिमे भेल छल । ‘धार्मिक कार्यमे सक्रिय करावएमे पगलाबाबाक बहुत योगदान अछि,’ ओ कहैत छथि ।
विवाहपञ्चमीक अवसरपर पगला बाबा धर्मशालामे वितल १५ वर्षसँ रामनाम संकीर्तन आ भण्डारा करैत छथि । विवाहपञ्चमी दिन आ ओहिसँ एकदिन पहिने दिनभरी भोजन चलितए रहैत अछि । ओहि समय तीनदिनक भण्डारा होइत अछि । जतेक यज्ञमे सहभागि भेल छथि, सभक भण्डारामे हिनक सभसँ बेसी योगदान रहल अछि । ‘अपनो भोजन करए बढ़ मन लगैत अछि, ओहिसँ बेसी लोककेँ भोजन करावएमे स्वभाविक छैक बराबर भण्डारा करितए रहैत छी,’ ओ कहैत छथि ।
किछु दिन पहिने राजनीतिमे सेहो सक्रिय छलथि मुदा आब ओहिसँ दूर भऽ रहल देखल जाइत अछि । ‘निश्पक्ष राजनीति नहि रहि गेल, एहनमे हमसभ फिट नहि भऽ सकैत छी,’ ओ कहैत छथि ।
राजनीतिप्रति आम बुझाइ अछि – पैसा, पावर आ पहुँच चाही । त्याग, तपस्या, इमानदारिता, नैतिकता छायाँमे पड़ैत गेलासँ राजनीतिप्रति वितृष्णा बढि़ रहल अछि । सत्तामे पहुँचलाक बाद राजनीतिक दर्शन, सिद्धान्त आ जनतासँ बेसी पैसा आ शक्ति आर्जनमे मात्र नेतासभ लगलासँ राजनीतिप्रति नव पुस्ताक आकर्षण समेत घटैत गेल अछि । राज्य सत्ता फेक कऽ आनल गेल संघीय गणतान्त्रिक व्यवस्थाद्वारा राज्यक पुनर्संरचना करैत तीन तहक सरकार गठन भेल । मुदा प्रशासकीय आ राजनीतिक चरित्र पुराने अछि । ताहि कारणेँ राजनीतिप्रति जनताक शिकायत बढ़ल अछि ।
दलसभ संघीयताके लेल लड़ल । मुदा सिस्टम चलावए आ डेलिभरी करए नहि सकल, ताहि कारणेँ लोकतन्त्र ‘दलतन्त्र’ बनल । दलतन्त्र ‘नेतातन्त्र’क पर्दामे देखल गेल । ‘राजनीतिक दल नेतासभक कम्पनी बनल,’ हुनक कहब अछि ।
पुरान नेतृत्व पुस्ता एखनो राजनीतिमे सक्रिय अछि । युवा पुस्ता वा नव व्यक्तिकेँ अपन विज्ञता आ अनुभव हस्तान्तरण करए नहि चाहैत छथि । गुटगत, व्यक्तिगत स्वार्थ, पद आ शक्तिक पाछाँ एखनो पुरने नेतृत्व दौडधुपमे अछि । राजनीतिमे भ्रष्टीकरण देखल गेल अछि । ताहि कारणेँ सामाजिक मनोविज्ञानमे नकारात्मक असर पड़ल अछि । ‘नेताद्वारा गलत व्यक्तिकेँ संरक्षण देलासँ समाजमे राजनीतिप्रति वितृष्णा बढ़ल अछि,’ ओ कहैत छथि ।
वरिष्ठ अधिवक्ता मिश्र कानुन पेशासँ सन्तृष्ट छथि । एखनो घण्टो पुस्तकसभ अध्ययन करैत रहैत छथि । ‘कोनो केश ओहिना नहि लड़ल जाइत छैक ओकरा लेल अनुसन्धान आवश्यक होइत छैक, ओ अनुसन्धानक लेल अध्ययन आवश्यक छैक,’ वरिष्ठ अधिवक्ता मिश्र कहैत छथि । ओ वार एशोसिएशन जनकपुरधामक २०६१–०६३ धरि अध्यक्ष रहथि । २०६३–०६७ धरि डेमोक्रेटिक लोयर्स एशोसिएशनक केन्द्रिय उपाध्यक्ष आ २०७६–०८१ क लेल नेपाल कानुन व्यवसायी परिषद्क मधेश प्रदेशक काउन्सिलर छथि ।
जीवनमे सुख–शान्ति भेटत वा नहि, ई बहुत हदधरि हमरसभक सोचपर निर्भर करैत अछि । यदि हमरासभक विचारे नकारात्मक अछि तँ हमरासभकेँ कोनो स्थितिमे शान्ति नहि भेटत । विचार सकारात्मक हएत तँ दुःखक दिनमे सेहो मन शान्त रहत । नकारात्मकतासँ बचए हेतु बढि़या लोकक संग रहबाक चाही, बढि़या सोच आ बढि़या चीजसभकेँ अध्ययनक विषय बनएवाक चाही । पेशाक सबालक प्रसंग अछि – जाहिमे विज्ञता प्राप्त अछि, ओकरे आगाँ बढ़ेबाक चाही ।

 

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