मैथिली गीत – चितचोरवा पाहुन

Byदूधमती साप्ताहिक

२३ मंसिर २०८०, शनिबार १६:०१ २३ मंसिर २०८०, शनिबार १६:०१ २३ मंसिर २०८०, शनिबार १६:०१

 डा. विजय दत्त

कारी –कारी नयनाके
शोर मचलै,
चहुं ओर मच लै ।
जैसन ऐलै चितचोरवा
हरोर मचलै ।।

श्यामल वरण घुमरल केश कारी
कियो गोर कियो खुट खुट कारी
अजगुत सखि घनघोर मचलै
हो घनघोर मचलै
जैसन ऐलै पहुनमा
हरोर मचलै ।।

सरिस रंग सीय अलस पहुनमा
नयन वयन देखि हरखित मनमा
देखि दुल्हा सलोनमा विभोर मचलै
हो विभोर हो विभोर मचलै
जैसन ऐले चितचोरवा हरोर मचलै।।

कहत ‘विजय’परिछु आब पहुना
जुनि बिलम्व करि सुदिन सुहाउना
फुल बरसै असमनमा मनमौर मचलै
हो मनमौर मचलै ।
जैसन ऐलै चितचोरवा हरोर मचलै ।।

नीर नयन भेल सिन्दुर दनमा
सोचे सखिसब हमर पहुनमा
दुर भेली ‘वहिनियां’ किलोल मचलै
हो किलोल मचलै
जैसन ऐलै चितचोरवा हरोर मचलै ।।

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