कोरोनाकालमे जखन लकडाउन लागल छल, किओ घरसँ नहि

निकलैत छल एहन समय राजीव झाक समाजसेवा देखए लायक छल । जानके परवाह कएने वीना ओ कोविड १ आ कोविड २ के समयमे सडकेपर रहलथि । कोविडसँ कोना लोकके जान बचाओल जाए दिनभरि अहीमे लागल रहलथि । ‘बेसीकाल हम एम्बुलेन्सपर स्वास्थ्यकर्मीसंग घुमैत रहैत छलहुँ,’ ओ कहैत छथि ।
दबाइके व्यवस्थापन, अक्सिजन सिलिन्डर बैंकक स्थापना, चिकित्सक परामर्श सेवा, राहत वितरण, दाताक खोजी व्यवस्थापन सभमे लागल रहलथि । कोनो व्यक्ति वा संस्था असगरे एतेक काज कऽ सकैत अछि, सहजे कल्पना नहि कएल जा सकैत अछि मुदा हिनक नेतृत्वदायी भूमिकाक कारणेँ बहुत किछु सम्भव भेल । ‘ओहि समय केना एतेक काज भेलैक कहिओकाल कऽ सोचैत छियैक तँ स्वयंपर विश्वास नहि होइत अछि । कोनो दैबिक चमत्कार भेलैक जकाँ लगैत रहैत अछि,’ राजीव कहैत छथि ।

 

 सुजीत कुमार झा

परिभाषाक दृष्टि जे होइक मुदा राजनीति माने एखन भऽ गेल अछि भाय भतिजाके अवसर देब, कोनो काजमे कमिशन खाएब, पुलिससँ ककरो पकड़बा देब फेर पैसा लऽ कऽ छोड़बा देब । ई सभ सुनला मात्रसँ घृणा जकाँ लगैत अछि मुदा सभ एहिना करैत अछि, तेना नहि छैक ! एखनो किछु नेता भेटता दिनभरि ओ सामाजिक काजमे लागल रहैत छथि । एहने राजनीतिकर्मीमेसँ एक छथि राजीव झा ।
लोसपासँ आबद्ध झा राजपाके महासचिव धरि भऽ गेल छथि । जखन नेपाल सद्भावना पार्टीमे रहथि, अहुँ समय महासचिव बनल रहथि । जखन सभ मधेशवादी पार्टी मिलकऽ जनता समाजवादी पार्टी बनलैक तँ ओहुमे कार्यकारणी सदस्य हिनका बनाओल गेल । राजनीतिके शीखरपर रहलाक बादो दिनभरि स्वयंकेँ सामाजिक कार्यमे सक्रिय रखने रहैत छथि । ‘एहिमे जतेक सन्तुष्टि होइत अछि ओतेक दोसर काजमे नहि, तँए अभावक बादो दिनभरि वा कही हरेक समय राजनीतिमे लागल रहैत छी,’ ओ कहैत छथि ।
आधुनिक विश्वमे प्रवेश करितहुँ लोकमे मानवियता हेराएल नहि अछि ! हेरेबाको नहि चाही । मनुष्यमे मानवियता कायमे रहल संकेत दिन दुःखीसभक सेवा सहयोगमे आगाँ बढ़ल हातसभसँ प्रमाणित भऽ रहल अछि । एहिसँ हुनकसभक सामाजिक कार्यमे सक्रियताके संकेत करैत अछि । जतेक बेसी विज्ञान वा प्रविधिक विकास भेल होइतहुँ लोकमे मानवियताक आवश्यकता अछि ।
ई वास्तवमे एकटा पेशा सेहो अछि, जे वैज्ञानिक तरिकासँ समस्याक समाधान करैत अछि । एक अर्थमे समाजके उन्नति दिस लऽ जाएब आ टुटल मनके सियाएब सामाजिक सेवा अछि । ताहि हेतु शुद्ध मनसँ हमसभ जाहि अवस्थामा छी, ओतहिसँ समाज सेवामे लागी । सम्पत्तिक नाममे जन्मैत काल हमसभ खालिए आएल छलहुँ, मरला उपरान्त खालिए जाएब । एहि हेतु अपन गाम, ठाम आ समाजक लेल किछु करी, किछु दीअ । मुदा गाम–ठामसँ नोचि कऽ किछु नहि ली ।
कोरोनाकालमे जखन लकडाउन लागल छल, किओ घरसँ नहि निकलैत छल एहन समय राजीवक समाजसेवा देखए लायक रहन्हि । जानके परवाह कएने वीना ओ कोविड १ आ कोविड २ के समयमे सडकेपर रहलथि । कोविडसँ कोना लोकके जान बचाओल जाए, दिनभरि अहीमे लागल रहलथि । ‘बेसीकाल हम एम्बुलेन्सपर स्वास्थ्यकर्मीसंग घुमैत रहैत छलहुँ,’ ओ कहैत छथि ।
दबाइके व्यवस्थापन, अक्सिजन सिलिन्डर बैंकक स्थापना, चिकित्सक परामर्श सेवा, राहत वितरण, दाताक खोजी व्यवस्थापन सभमे लागल रहलथि । कोनो व्यक्ति वा संस्था असगरे एतेक काज कऽ सकैत अछि, सहजे कल्पना नहि कएल जा सकैत अछि मुदा हिनक नेतृत्वदायी भूमिकाक कारणेँ बहुत किछु सम्भव भेल । ‘ओहि समय केना एतेक काज भेलैक, कहिओकाल कऽ सोचैत छियैक तँ स्वयंपर विश्वास नहि होइत अछि । कोनो दैबिक चमत्कार भेलैक जकाँ लगैत रहैत अछि,’ राजीव कहैत छथि ।
हिनक एकटा संस्था अछि क्लोथ बैंक । जाहिके माध्यमसँ जकरा कपड़ा नहि रहैत अछि ओकरा ई सभ कपड़ा उपलब्ध करबैत छथि । ई संस्था कोरोनाकालमे देवदूतक काज कएलक ।
कोरोनाके शंका लागल व्यक्तिक लेल नेपाल सरकार होम आइसोलेसनक व्यवस्था कएने छल । अपना घरमे सुरक्षित रहि कऽ स्वास्थ्य उपचार करा सकैत छथि मुदा एहि लेल कोनो चिकित्सकके सिफारिस चाही । कोरोनाकालमे जखन लोक घरसँ नहि निकलि रहल छल, ओहन समय ई सिफारिस सर्वसाधारणक लेल बहुत कठीन भऽ गेल छल एकर जानकारी होइतए राजीव कोरोनामे आमलोकक सहयोगक अभियानमे लागि गेलथि । ओ कहैत छथि, ‘काठमाण्डू जाएलेल हम पास वनावए जिला प्रशासन कार्यालय धनुषामे गेल छलहुँ, ओहि समय चिकित्सकक सिफारिसक अभावमे लोकके दिक्कत भऽ रहल जानकारी आएल, एहिके बाद विभिन्न काज सभ आगाँ बढ़ेलहुँ ।’
ओ सभसँ पहिने नेपाल उद्योग वाणिज्य संघक तत्कालीन अध्यक्ष शिवशंकर साह ‘हिरा’, माँ जानकी जनकपुरधाम यातायात प्रालिक अध्यक्ष मनोजकुमार चौधरी आ लोसपा नेता राजु चौधरीसंग वात कएलन्हि । ओसभ हरेक प्रकारक सहयोगक बचनवद्धता व्यक्त कएलन्हि । फेर चिकित्सकसभ डा. अजय मिश्रा, डा. अजय झा, डा. रवि प्रधान आ डा. अवधेश झा सेहो सहयोग करबाक बात करितए ओ मिशनमे लागि गेल छलथि ।
‘जे रोगी घरमे रहए चाहैत छथि, हुनका होम आइसोलेशनक सिफारिस मात्र नहि चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध करावएके काज सेहो शुरु कऽ देलहुँ । अवस्था मोबाइल फोनसँ रोगी कहथि आ चिकित्सकसभ हुनका सलाह दैथि । शुरुमे चारिटा चिकित्सकसँ शुरु भेल ई अभियानमे देशभरीक ७० टाधरि चिकित्सक सहभागि भऽ गेलथि । एहन सेवा जनकपुरधामसँ देशभरि शुरु भऽ गेल । रोगीके भोरसाँझ चिकित्सकेसभ फोन कऽ पुछथि आ सलाह देल करथि । एहिसँ ६ हजार गोटे लाभान्वित भेल रहथि,’ राजीव कहैत छथि ।
मुदा चिकित्सकीय परामर्शसँ सभ किछु सम्भव नहि भऽ रहल छल । अक्सिजनक भारी समस्या होबए लागल छलैक, एहनमे अपन टीमसंग सलाह लऽ अक्सिजन बैंक शुरु कऽ देलन्हि । १८ टा अक्सिजन किनलथि आ होम आइसोलेशनमे रहल व्यक्तिसभके जहिना आवश्यकता पड़ैत छल, ओ उपलब्ध करबैत छलथि । पिपिए कीट, फेस शिल्ड, हाइफलोनोजल कैनुला धरिक निशुल्क सेवा शुरु कएलन्हि । एतेकधरि कि एकटा दाताक सहयोगमे काठमाण्डूसँ भेन्टिलेटर अनलथि आ कोरोनाभरिक लेल प्रादेसिक अस्पताल जनकपुरधामके उपलब्ध करौलथि । भारतक दिल्लीमे रहल साथीसभक सहयोगसँ एकसय रोगीक लेल आवश्यक दबाइ ओहि समय जनकपुरधाम अनवेलन्हि । ई दबाइ बहुत रोगीके बचवएमे सहयोग कएलक ।
हिनक अक्सिजन सिलिण्डर काठमाण्डू, राजविराज, विराटनगर मात्र नहि भारतक दरभंगाधरि गेल । ‘मानवतापर संकट छल, जतए आवश्यक ओतए हमसभ पहुँचैत छलहुँ,’ ओ कहैत छथि । अक्सिजन लगावएसँ लऽ कऽ अन्य काजक लेल अहेब मनोज पण्डितके किछु महिनाक लेल नियुक्त कएलन्हि । ओ घरमे जा कऽ रोगीसभके सहयोग करैत छल । २ सयसँ बेसी लोकके सिलिण्डरसँ सहयोग भेल छल ।
कोरोना समाप्त भेलाक बादो हिनकसभक अक्सिजन सिलिण्डर दीर्घरोगीसभक लेल काज कऽ रहल अछि । समाजक सेवा आ रुपान्तरण सभ्यताक प्रतीक अछि, हमसभ समाजक एकाइ छी आ समाज हमरसभक मुल्य आ मान्यताक धरोहर अछि । समाज सेवा विकासोन्मुख देशक विकासक लेल एकटा मेरुदण्ड अछि, सभके बुझए पड़त ।
जखन कोविड शुरु भेल तत्काले सीमा सिल कऽ देल गेल । नेपालसँ भारत जाएवला आ भारतसँ नेपाल आबएवला हजारौ व्यक्ति सीमापर असमंजसक अवस्थामे छल । एकदोसरा देश जाए नहि दऽ रहल छल, एहनमे ओकरासभक भोजनक सेहो समस्या भऽ गेल । क्लोथ बैंक राजु चौधरीक नेतृत्वमे जटही सीमापर निशुल्क भोजन शुरु कएलक । कएदिन चलल ई भोजनसँ, बहुतो लोकके राहत भेटल ।
कोरोनाकालमे एम्बुलेन्सक बहुत समस्या भऽ गेल छल । बाहर ओसभ जाए नहि मानैत छल, जएबो करैत छल तँ बहुत पैसा लैत छल । एहनमे क्लोथ बैंकक पहलमे एम्बुलेन्स सञ्चालकके बैसार करबौलन्हि । ओ बैसारसँ एम्बुलेन्सक रेट निर्धारण कएल गेल । प्रत्येक दिन दूटा एम्बुलेन्स क्लोथ बैंकक जिम्मा देल गेल । एकर संयोजन क्लोथ बैंक दिससँ सामाजिक कार्यकर्ता सरोज राय कएलन्हि । प्रशासनक एहिमे महत्वपूर्ण सहयोग रहल ।
ओहि समयमे जनकपुरधामक किछु स्थानमे निशुल्क भोजनक व्यवस्था कएल गेल छल । ओहिमे सेहो ई सभ सहयोग करैत रहलथि । ‘एतेक बड़का अभियान मात्र एक गोटे वा एकटा संस्थासँ मात्र सम्भव नहि छल । मुदा उत्प्रेरित कएल जा सकैत छलैक, ओहिमे सेहो हमसभ लागल रहलहुँ,’ राजीव कहैत छथि ।
क्लोथ बैंक एखन जिला समन्वय समिति धनुषाक दूटा रुममे सञ्चालित अछि । एकरा उपयोगिता आ प्रस्तुति देखैत चारुदिससँ सहयोगसभ आबए लागल । पूर्वउपप्रधानमन्त्री एवं लोसपा नेता राजेन्द्र महतो अपन संसदीय बजेटसँ १० लाख रुपैया एहिसंस्थाके सहयोग कएलन्हि । मधेश प्रदेश सरकार पुरना बस स्टैण्डमे भवन बनावए बजेट सेहो छुटियौलक मुदा ओहिठाम जनकपुरधामक तत्कालिन मेयर लालकिशोर साह खलनायिक भूमिकामे एना लगलथि जे समस्या भऽ गेल । महतोजीक संसदीय बजेट फ्रीज करबादेलन्हि, भवन बनावएमे बेर–बेर रोकावट करैत रहलथि । ‘लालकिशोरजीक अवरोध तत्कालक लेल भलहि किछु समस्या अनलक मुदा समाजसेवा अभियान नहि रुकल, नहि रुकत,’ चाह चर्चाक क्रममे ओ कहैत छथि ।
जखन कोरोना कम भेल एकरबादो सीमा खुजि नहि रहल छल जाहिसँ सीमामे रहल दुनू देशक जनताके समस्या भऽ रहल छल । एहनमे ओ नेपाल भारत खुल्ला सीमा सम्बाद समूहक माध्यमसँ सीमामे आन्दोलन शुरु कएलन्हि । ओ संस्थाके अध्यक्ष राजीव स्वयं छथि । ओ कहैत छथि, ‘नेपाल भारतक ४९ टा नाकापर ३० सँ लऽ कऽ ४७ दिनधरि धर्ना आ प्रदर्शन कएलहुँ । ओहि आन्दोलनमे दुनू देशक जनता सहभागि रहथि । जनताक दबाबक कारणेँ सरकार सीमा खोलए बाध्य भेल, पैदल यात्री, दू चक्काबाहनक आबाजाही शुरु भेल फेर सभकिछु समान्य भऽ गेल ।’
नेपाल भारत खुल्ला सीमाके लऽ कऽ एखन ओ विशेष अभियान चला रहल छथि । नेपाल भारत दुनू देशक प्रवुद्ध व्यक्ति (इ.पि.जी) एहिसम्बन्धी विस्तृत अध्ययन कऽ नेपाल आ भारतबीचक सन् १९५० क शान्ति आ मैत्री सन्धी परिमार्जन वा खारेज कऽ ओहिठाममे नव सन्धी करए सुझाव देने कार्यके राजीवसभ विरोध करैत छथि । ओ सभ सीमासँ नजदिक रहल २७ टा जिलामेसँ २४ टा जिलामे कएवेर दुनूदेशक जनताके राखि कार्यक्रम कएने छथि ।
सन् १९५० मे कएल गेल ‘शान्ति तथा मैत्री सन्धि’ क बाद नेपाल आ भारतक बीचक भौगोलिक सिमाना घोषित रुपमे खुला रहल अछि । ओ सन्धीक बुँदा नम्बर ७ मे लिखल अछि, ‘भारत आ नेपालक सरकारसभ आवास, सम्पति उपरक स्वामित्व, वाणिज्य तथा व्यापारमे सहभागिता, आवत–जावतक सुविधा आ एहने प्रकृतिक अन्य सुविधासभमे एकटा देशक नागरिकके दोसर देशक भूमिमे पारस्पारिक आधारमे समान सुविधा प्रदान करए मंजुर करैत अछि, ई पालना दिस दुनू सरकारद्वारा कार्य करए पड़त ।’
राजीव नेपाल भारत खुल्ला सीमा राजनीतिक आ सामाजिक सम्बन्धक विषयमे भारतक सिएमजे युनिर्भसीटीसँ पिएचडी सेहो कऽ रहल छथि ।
फेरसँ क्लोथ बैंक दिस आबि । ओ संस्थाक माध्यमसँ १० हजार लोकके राजीव नव कपड़ा वितरण कएने छथि । एकर प्रारम्भ कोना भेल सम्बन्धमे ओ कहैत छथि, ‘विद्यापति समारोहमे भारतक बेनीपट्टी गेल छलहुँ ओहिठामक कोमलकान्त झा वर्षभरि लोकसभसँ कपड़ा लऽ जम्मा करैत छथि फेर प्रत्येक वर्ष २ अक्टुबर कऽ वितरण करथि । हुनक ई काज पसिन आएल, जनकपुरधाममे सेहो कएल जाए ओतहि प्रण कएलहुँ । एहिठाम एलाक बाद तत्कालीन सिडियो (प्रमुख जिला अधिकारी) प्रदीप कडेल सलाह देलन्हि पुरान कपड़ा लेबएमे लोकके दिक्कत होइत अछि, नव कपड़ा देल जाए फेर हुनके सलाहे अनुसार २०७५ सालमे कपड़ा देब शुरु कएलहुँ ।’
जिनक लग कपड़ा अछि ओ क्लोथ बैंकके कपड़ा उपलब्ध करबैत छथि आ जिनका लग नहि अछि ओ कपड़ा लेबए पहुँचैत छथि । दुनू काज किछु वर्षसँ निरन्तर चलि रहल अछि । ओतवए नहि, अन्य सामाजिक काजमे निरन्तर राजीव लागल रहैत छथि ।
वि.स. २०७२ बैशाख १२ गते जखन बड़का भूकम्प अएल छल लोक काठमाण्डूसँ तराइदिस भागि रहल छल मुदा ई भूकम्पक दोसरेदिन राहत लऽ कऽ काठमाण्डू पहुँच गेलथि । भूकम्पक त्रासक समय ओ २७ दिन ओहिठाम रहि, पहाडक जिलासभमे राहत वितरण कएलन्हि । जनकपुरधामक लोकसभ जे भारतक विभिन्न स्थानमे रहल अछि, हुनकासभसंग समन्वय कऽ २५ ट्रक राहत वितरण कएलन्हि । ओहि समय काठमाण्डूसँ तराइ आबएवला लोकके अपन गाड़ीधरि उपलब्ध करादैथि । अहीक्रममे हिनक गाड़ी सेहो दूर्घटना भऽ गेल । एकरबादो ई राहत काज नहि रोकलथि । सप्तरीक कोइलाडीमे आगि लगलाक बाद प्राते भिने ई राहत लऽ कऽ पहुँच गेलथि । ओहिठाम प्रत्येक पीडि़त सदस्यके ५ सेट कपड़ा आ भाड़ाबर्तन उपलब्ध करौलन्हि । वारा जिलामे चक्रबाती तुफान आएल समय सातटा चिकित्सक टोलीसंग ओतए पहुँचल रहथि । ओहिठाम सेहो तत्कालीन प्रदेशक मन्त्री जीतेन्द्र सोनलके दबाइ हस्तान्तरण कएलन्हि ।
सबैलामे करेन्ट लगलाक बाद होइक वा सप्तरीक बाढि़पीडि़त आगिलागि, धनुषा, महोत्तरीमे दैवी प्रकोप भेल समय एकटा सामाजिक कार्यकर्ताक रुपमे राहतके लऽ कऽ सभ दिन आगाँ रहैत छथि । जाढ़ बढ़ल समय रातिमे सड़क पेटीमे सुतलसभके कम्बल ओढ़ावएके अभियान किछु वर्षसँ ओ करैत छथि । ई अभियान बहुत प्रभावकारी देखल गेल अछि ।
विपतक कठिन समयमे पीडि़तके तत्काल सहयोग कऽ उद्धार, राहत आ पुनस्र्थापना करब माने नजदिकक स्वयंसेवी भावना भेल लोकेसँ सम्भव अछि । ई पूर्णतः मानवीय कार्य समेत अछि । दुःख आ संकटमे परल मानव समुदायके भूगोल, जाति, राजनीतिक आस्था आ स्वार्थक दायरासँ उपर उठि कऽ सहयोग करब हमरसभक मौलिक चरित्र समेत अछि, जकर उदाहरण राजीवक काजसभ कहि दऽ रहल अछि ।
‘काज करएवलाके पैसाके अभाव नहि होइत अछि । कोनो विपत आएल, हम आगाँ एलहुँ १० टा हात सहयोगक लेल पाछाँसँ बढि़ जाइत अछि । आश्चर्य लागत जखन राहतक लेल घरसँ निकलैत छी बहुत बेसी पैसा वा सामान नहि रहैत अछि मुदा स्थानपर पहुँचैत–पहुँचैत एना चैल अबैत अछि जेना कोनो दैबिक चमत्कार होइक,’ ओ कहैत छथि ।
सामाजिक कार्यमे विशेष कऽ असहाय, दुःखी व्यक्ति आ समुदायसभमे सेवाक भावना, ओकरसभक आत्मसम्मानक कदर, ओकरसभक सामाजिक सम्बन्धक सम्मान, अपन इमान्दारिता आ नैतिकताक प्रदर्शन, काम कएलापर सदति सामाजिक न्यायमे जोड़ आ अपन सम्बन्धित कार्यमे निपूण भेल होबए पड़लैक । नहि तँ सामाजिक कार्य, सामाजिक कार्य नहि भऽ आओर काज भऽ जाएत आ ओहिसँ सामाजिक कार्यक प्रकृति प्रतिए प्रश्नचिन्ह उठए सकैत अछि । छोटमे कहल जाए तँ ओ सामाजिक कार्य नहि भऽ सामाजिक काज करब कहएवला व्यक्ति आ संस्थाक व्यक्तिगत उद्देश्य पूर्ति मात्र पूरा होबए सकैत अछि, सामाजिक कार्य असामाजिक कार्य होबए सकैत अछि । ताहि कारणेँ ओ व्यक्ति आ समाजके थप पीड़ा दैत अछि ।
सामाजिक कार्य एतेक सुन्दर भेल होइतहुँ हमरसभक देशमे सामाजिक कार्य जतेक सुन्दर होबाक चाही, ओतेक नहि अछि जेना लगैत अछि । विद्यालयक गुरु, गुरुमातासँ गैरसरकारी संघसंस्था आ सरकारी संघ संस्थासँ राजनीतिक दलधरिक भूमिका सेहो ओतेक आशा लागल नहि देखल जाइत अछि । एहनमे एहि क्षेत्रमे जे किओ लागल छथि, हुनका सर्तकता अपनाएब आवश्यक अछि ।
२०३३ आसिन १४ गते धनुषाक विदेह नगरपालिकाक गोबराहीमे जन्म लेनिहार राजीवक माताक नाम बच्ची झा आ पिताक नाम गंगेश झा छन्हि । धर्मशास्त्र आ नेपालीमे स्नातकोत्तर रहल हिनक पिता प्रधानाध्यापकक रुपमे विद्यालयसभमे वर्षो काज कएने छथि । दश भायबहिन छथि, जाहिमे ६ बहिन आ चारि भाय छथि । २ पुत्री आ एक पुत्रक पिताक रुपमे रहल राजीवक दू पुत्रीमेसँ एकटा इन्जिनियरिगंमे पढि़ रहल छन्हि आ एकटा चार्टर एकाउण्टेन्टमे । पुत्र ८ कक्षामे पढि़ रहल छन्हि ।
जीवनक प्रगतिमे कनियाँ सोनी झाक योगदानके ओ बेर–बेर चर्चा करैत छथि । ‘सशस्त्र समूहमे काज करएके होइक वा राजनीतिक सामाजिक क्षेत्र सभमे । काजमे संघर्ष बहुत बेसी होइछ, एकरबादो धर्मपत्नीक भूमिकामे ओ खड़ा उतरल छथि । बच्चाक व्यवस्थापनक जिम्मेवारी सेहो उएह निर्वाह कएने छथि,’ ओ बेर–बेर कहैत छथि ।
राजीव किछु वर्ष भूमिगत जीवन सेहो बितौने छथि । बाध्यतावश भूमिगत होबए पड़ल स्वीकार करैत ओ कहैत छथि, ‘हमर लेखन बढि़या छल तँए सशस्त्र समूहमे लागल जयकृष्ण गोइत आ ज्वाला सिंह हमरासँ प्रेस विज्ञप्ति सभ लिखबैत रहथि । इएह क्रममे सन् २००७ मे ज्वाला सिंह भारतमे बुद्धिजीवीसभसंग एकटा बैसार कएलन्हि, जाहिमे जनकपुरधामसँ एकसय गोटे गेल रहथि, ओहि सयमे हम सेहो रही । ओतएसँ जहिना नेपाल एलहुँ पुलिस हमरा खोजए लागल । एतएधरि कि मारएके तैयारीमे छल, एकरबाद बाध्यतावश भूमिगत होबए पड़ल ।’
ओ भूमिगत कालमे सेहो अन्य सशस्त्र समूह जकाँ बदनाम नहि भेलथि । सशस्त्र समूहद्वारा कएल जाएवला हत्याके ओ विरोध करथि । अपराध हिसाबसँ दण्डित करबाक सोचक लोक रहथि । ‘ई बात जखन हम सशस्त्र समूहक बैसारमे करैत छलहुँ, गोइत, ज्वाला, राजन मुक्तिसभके ई पसिन नहि छलन्हि । ताहिहेतु हम अलग सोचवला लोकसंग मिलकऽ काज करैत छलहुँ,’ ओ कहैत छथि ।
कएवर्ष भूमिगत रहलाक बादो एकहुटा प्रहरी केश हिनकापर नहि छलन्हि । ‘अपराधी आ राजनीति व्यक्ति अलग–अलग चीज होइत अछि, ई बात हम बढि़या जकाँ बुझैत छियैक,’ राजीव कहैत छथि ।
ओहु समय ओ सामाजिक काजमे सक्रिय रहथि । विद्यालयकालसँ दोसराक सहयोग करी हिनकामे भावना रहल छन्हि । बेटी विवाह, मरणहरणसभमे सेहो हिनक सहयोग होइतए रहैत अछि । ई निडर छथि, जुझारुक छथि, लडाकु छथि, सन्तुष्ट आ उमङ्गसँ सशक्त छथि, ककरो ओ नकारात्मक दृष्टिसँ नहि देखैत छथि, ककरो खसावएके बात नहि करैत छथि, स्वयं बढि़या काज करैत छथि ई देशसँ बढि़या हमर जीवन नहि अछि कहैत छथि, व्यवहारिकतामे सेहो किछु ओहने देखबैत छथि ।
घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें,
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए ।
निदा फाजलीक ई शेर सेहो बहुत खूब अछि । ओना ओ कनैत बच्चाक उदाहरण देने छथि, मुदा यदि एकर सामान्यीकरण करी तँ एकर तात्पर्य हएत जे यदि अहाँ कोनो कनैतके हँसा सकी तँ ओ सेहो भगवानक प्रार्थना बराबरक हएत ।
क्यामरा आगाँ महान् समाजसेवी कहेलासँ पेसा एवं व्यवसाय छोडि़ समाजसेवाके पूर्णकालीन बनबैत लऽ जाएब तँ हमरसभक परम्परा आ संस्कृतिमे रहल समाजसेवा विकृत, बदनाम आ प्रभावहिन बनैत जाएत बातमे कोनो दूमत नहि अछि । समाजसेवी कार्यमे प्राप्त होबएवला सहयोगमे पारदर्शिता परीक्षण, वितरणमे निष्पक्षता, शून्य चुहावट वा खर्चमे आधारित समाजसेवाक प्रर्वद्धन करब आवश्यक अछि ।
समाजसेवाके आम चरित्र बनाएब, स्वयंसेवी आ मानवीय भावनाक सही संरक्षण करब, अपन पेसा भीतरसँ समाजसेवा जगेर्ना करब आ समाजसेवाके अलग पेसासँ होबएवला जोखिमसँ रक्षा करब आजुक प्रमुख चुनौति रहल स्वयं राजीव सेहो स्वीकार करैत छथि ।
एकटा दार्शनिक कहने छथि – हरेक समय प्रसन्नतामे इन्भेस्ट करु, जतेक बेसी प्रसन्नता बटोरब ओतवए बढि़या अनुभूति हएत । दोसर दार्शनिकक विचारसँ एकर अन्त करए चाहैत छी – जाहि व्यक्तिमे आत्मविश्वास होइत अछि ओ दोसराके सेहो विश्वास हासिल करैत अछि ।

 

 

 

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