मैथिली गीतः सियाजीक विवाह

Byदूधमती साप्ताहिक

९ मंसिर २०८०, शनिबार १२:२३ ९ मंसिर २०८०, शनिबार १२:२३ ९ मंसिर २०८०, शनिबार १२:२३

डा. विजय दत्त

मिथिलामे बाजे सहनइया
अबधसे आए रघुरैया ।

मुदित मगन भेल जनकपुर सारी
हर्षित बर्षित सब नर –नारी
नाचे छनन छनन छैया
अबधसे आए रघुरैया ।

अरछी परछी सासु लएली अंगनमा
सखि सब गावए लागल मंगल गणमा
लोढिया से गाले सेकैया
अबधसे आए रघुरैया ।

कुटे ओठंगरा लक्ष्मणा रामे
भरत शत्रुध्न ठामे ठामे
जेना कोल्हुवामे बरदा जोतैया
अबधसे आए रघुरैया ।

जनक ललीके मंत्र पढावे
जनकके अंखिया नीर वहाए
मग्न मुदित चारो भैया
जनकपुर आए रघुरैया ।

मिथिलामे बाजे सहनैया
अबधसे आए रघुरैया ।।

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