चाह चर्चाः सोनचाँदी व्यवसायी पवन कुमार ठाकुरसंग

Byदूधमती साप्ताहिक

८ मंसिर २०८०, शुक्रबार ०१:५२ ८ मंसिर २०८०, शुक्रबार ०१:५२ ८ मंसिर २०८०, शुक्रबार ०१:५२

जनकपुरधामक व्यवसायी क्षेत्रक एकटा हस्ती रहल सोनचाँदी

व्यवसायी पवनकुमार ठाकुर कोलकतामे मजदूरक काज सेहो कएने छथि । हिनका कोलकाताक आरके ज्वेलर्समे चेलागिरिके नोकरी भेटल छल । चेलागिरि माने मालिकके आदेशपालक । जाहिमे पानि, चाह आनएसँ लऽ कऽ झाडुपोछा लगावएके काज छलन्हि । ओ मशीनसभ पोछबो करैत छलथि आ डाइसभके देखैत रहैत छलथि, केहन छैक । पवन कहैत छथि, ‘गरीबीक कारण कोलकतामे नोकरी नहि कएने छलहुँ, ओहि समय हमर भाग्य पलटा मारिदेने छल तँए ठीके स्थितिमे छलहुँ मुदा चाँदीके कारखाना खोलबाक अछि से मिशनमे चेलागिरिक नोकरीधरि करए पड़ल ।’ गीतामे स्पष्ट शब्दमे लिखल अछि, निराश नहि होउ, कमजोर अहाँक समय अछि अहाँ नहि ।

 सुजीत कुमार झा

जनकपुरधामक सफल व्यवसायीमे पवन कुमार ठाकुरक नाम सेहो लेल जाइत अछि । सोन चाँदी व्यवसायक क्षेत्रमे ओ एकटा चोटीक लोक छथि । जनकपुरधाममे मात्र सोनचाँदीक तीनटा दोकान छन्हि । जनकपुरधामक पुरान बजारक न्यू महालक्ष्मी ज्वेलर्सक सञ्चालक रहल पवनके पेठीया बजारमे लक्की ज्वेलरी इण्डस्ट्रीज छन्हि । ओहिठाम, ओहि नामसँ शो रुम सेहो खोल्ने छथि । रेल्वे स्टेशन लग रहल महारानी ज्वेलर्सक सञ्चालक इहे छथि । महोत्तरीक बर्दिवासमे न्यू जलपा ज्वेलर्सक नामसँ सोनक दोकान छन्हि ।
कहल जाइत अछि – इतिहास लिखबाक लेल कलम नहि, हौसलाक आवश्यकता होइत अछि ! एकटा दार्शनिक कहने छथि – संघर्ष अहाँक क्षमताके बढ़बैत अछि, अहाँक सफलताक दिस करीब लबैत अछि !
एक समय छल स्कूलमे हरियर रंगक पोशाक लागु भेलैक तँ पवनके माए लग पैसाक अभाव रहन्हि, ओ उज्जर कपड़ाके हरियर रंगसँ रंगिकऽ महिनो पहिरने रहथि । जानकी माध्यमिक विद्यालयमे एक समय हरियर रंगक पोशाक लागु भेल छल । बहुतोके जुत्ता पहिरने देखलाक बाद हिनको मनमे आयल छल, हमहुँ जुत्ता पहिरतहुँ । जुत्ता किनए लेल पैसा नहि रहन्हि, ममियौत भायवला पुरान जुत्ता पहिरए लेल अनने रहथि । पवन कहैत छथि, ‘ओ जुत्ता हमर पायरक साइजसँ छोट छल, कतेककाल धरि पायर कोचएमे लगैत छल फेर पूरे आँगुर मोड़ा जाइत छल । कनिक देरक सौखक लेल, भरिदिन नेगंराए पड़ैत छल ।’
मुदा जखन परिवर्तन भेल आइ पवन लग सभ किछु छन्हि । किछु लाख ओ समाज सेवामे खर्च करैत छथि । ‘हम गरीबी देखने छियैक, तँए दोसराक पीड़ाक हमरा अनभूति अछि । ओहन समस्यामे पड़ल लोकके देखलहुँ, हमर हाथ सहयोगक लेल नहि रुकि सकैत अछि ।’
दू वर्ष पूर्व रामजानकी विवाहपञ्चमीक अवसरपर जनकपुरधाममे विश्व हिन्दू परिषद् सामुहिक विवाह शुरु कएने छल, पहिल साल ५१ गोटेक विवाह भेलैक । विवाह भेल सम्र्पूण कनियाँके सोनक मंगल सूत्र पवन अपना दिससँ देलन्हि । विभिन्न समयमे भेल ७ टा विवाहक सम्र्पूण खर्च ओ देने छथि । ‘जकरा लग छैक ओकरा सहयोग करएके बाते नहि मुदा जिनका नहि छन्हि, हुनका सहयोगमे कहिओ पाछाँ नहि रहैत छी,’ चाह चर्चाक क्रममे ओ कहैत छथि । पवन आम्दानीक किछु भाग सामाजिक काजक लेल छुटियौने छथि । हिनक भाय आ भतिजासभ सेहो एहन काजसभमे लागल रहैत अछि । भाय आ भतिजासभक सेहो सोनाक कारोबार छन्हि । भाय भतिजा आ अपन मिला हिनक ९ टा सोनाक शोरुम दोकान छन्हि । कारखाना अलगसँ ।
सयौ विपन्नके किछु वर्ष इम्हर ओ सहयोग कएलन्हि अछि । जनकपुरधामक प्रसिद्ध शनिदेव मन्दिरमे १० लाखक सहयोग कएलन्हि अछि । पगलाबाबा धर्मशालामे दूटा रुम बना देने छथि, राम चौकक राम टावरक निर्माणक लेल तीन लाखसँ बेसीक हिनक लगानी अछि, प्रसिद्ध देवी बौधिमाता मन्दिरक सम्र्पूण सौन्दर्यीकरणक काज पवन कएने छथि । ओ कहैत छथि, ‘देवीक आशीर्वाद हमरा भेटल अछि, ओहिठाम कतबो काज करब कमे हएत ।’
ओ स्वीकारैत छथि, ‘देवीक आशीर्वादसँ पुत्र प्राप्त भेल अछि ।’ पवनके चारिटा बेटी आ एकटा पुत्र छन्हि । बेटी लगातार होइत गेलन्हि मुदा पुत्र नहि भऽ रहल छलन्हि । माता बौधिके कबुला कएलन्हि जे दशमी भरि ५१ टा अखण्ड दीप बारब । चारि वर्ष भेलो नहि छल, हिनका पुत्र प्राप्ति भेल । दशमीमे ६ वर्षधरि लगातार अखण्ड दीप बरल । एखनो ५१ टा दीपक स्टैण्ड बना दीप बारैत छथि । विवाहपञ्चमीमे जनकपुरधाम आएल यात्रीसभक लेल वितल १० वर्षसँ चाह–बिस्कुटक स्टाँल लगबैत छथि । हिनक स्टाँलमे मात्र १५ हजारसँ बेसी लोक निःशुल्क चाह पिबैत अछि ।
जखन संसार हमरा कहैत अछि हार मानि लिअ, ओहि समय उम्मीद हमरा कानमे कहैत अछि, एकबेर आओर प्रयास करु । एकटा दार्शनिक कहने छथि – तहिआधरि अपने काज पर काज करु, जखनधरि अहाँ सफल नहि भऽ जाइ ! पवनक जीवनमे ई बातसभ काज कएने अछि ।
पवन जन्मसँ गरीब नहि रहथि मुदा स्थिति हिनका किछु वर्षक लेल गरीब बनादेने छल । हिनक बाबा सरोबर ठाकुर रहन्हि । ओ जनकपुरधाममे सोनचाँदी क्षेत्रक सभसँ बड़का हस्ती रहथि । हिनक पिताक मृत्यु आ परिवार भीतरक कलहक कारण हिनका सभकेँ गरीबी जीवन वितावए पड़लन्हि । पवन साढ़े ३ वर्षधरि कारिगरक काज कएने छथि । ओ कहैत छथि, ‘१७ वर्षक उमेरमे कारीगरक काज कएने छी ।’
परिवर्तन कोना अएलैक हरेक सफल व्यक्तिसँ किछु एहने प्रश्न कएल जाइत अछि । आमव्यक्ति सेहो हुनकासँ इएहसभ सुनए चाहैत छथि । भलहि एना जे, हिनक बाबा सरोबर ठाकुरक जनकपुरधामक पुरान बजारमे रहल शंकर स्वर्णकारमे ताला लागि गेल । ओ महावीर चौकपर जा नव दोकान खोलि लेलन्हि । सरोवरक दूटा विवाह छलन्हि दोसर कनियाँक सखासंतानके मात्र ओ अपनेने रहथि । एहनमे पवन आ हुनक घरक सम्र्पूण सदस्यक भोजनपर सेहो आफत भऽ गेल छलन्हि ।
कहल जाइत छैक – पतझड़ भेल बिना गाछपर नव पात नहि अबैत अछि ! ठीक ओहि तरहेँ परेशानी आ कठिनाइ सहल बिना मनुष्यके बढि़या दिन नहि अबैत अछि ! ओ शंकर स्वर्णकार दोकानक असोरापर एकटा छोटका हथौड़ी लऽ कऽ बैसि गेलथि ।
एकटा जानकार कहने छथि – कठिन परिश्रमसँ सफलता भेटैत अछि, आलस्यसँ पराजय आ अहंकारसँ कठिनाइ ! तत्काले ओही दिन एकदूटा काज एलन्हि आ बगलक दोकानक सञ्चालक सीताराम सिकारिया आ रामजी ठाकुरसँ सापट लऽ काज शुरु कएलन्हि । सापट फिर्ता कएलाक बाद हिनका ६ सय रुपैया एकहि दिनमे आम्दानी भेल ।
आम्दानी असोरापर किए नहि भेल रहए दोकान तँ बाबाक छल कि कएल जाए ? किशोर बुद्धि लग एकर उत्तर नहि भेट रहल छल । ओ काका स्व.मोती ठाकुरसंग सलाह लेलन्हि । मोतीक सलाह अनुसार पैसा बाबाके देबएके ओ निर्णय कएलन्हि । फेर बाबा सरोबरके आजुक कमाइ ई भेल कहैत ओ ६ सय रुपैया हुनका दऽ देलन्हि मुदा बाबा ओ रुपैया हिनका फिर्ता कऽ देलन्हि । पवन कहैत छथि, ‘बाबा ई पैसा तोरे भेलह कहैत हमरा दऽ देलन्हि आ हम ६ सय रुपैया अपन कुर्तामे पजिअबैत बिदा भऽ गेलहुँ आ एहिके बाद हमर जीवनक नव ढंगसँ शुरुवात भऽ गेल ।’
घाइल तँ एतए हरेक चिड़ै अछि, मुदा जे फेरसँ उडि़ सकल उएह जीवित अछि ! ओ स्वयं स्वीकारैत छथि एहिके बाद ओ पाछाँ नहि तकलन्हि । असोरापर चारिवर्र्ष अहिना काज कएलथि । दिनभरि असोरापर बैसि कमाइत छलथि, रातिमे पेटीमे सभ सामान राखि सीताराम सिकारियाक दोकानमे राखि दैत छलथि । ओ कहैत छथि, ‘आइ जे किछु छी ताहिमे सिकारिया, हरिद्वारी लाल सिंघानिया आ शंकर प्रसाद साहक कारण । ओसभ विना लिखापढीके कर्जा दैत रहलथि । दूदिन चारिदिनमे ओ कर्जा हम फिर्ता करैत रहलहुँ । विश्वास कहिओ नहि तोड़लहुँ जाहिके कारण हुनक सभक सहयोग निरन्तर भेटैत रहल ।’ ओ अपन नाना रामविलास ठाकुरक सहयोगक सेहो बेर–बेर चर्चा करैत छथि ।
असोरापर एहनो दिन भेल छलैक जे हिनक देहपर पानि पड़ैत रहैत छल आ ई काज करैत रहथि । पवन वाउटीवला बाला, नथिया, टीका, हार आ मंगलसूत्र बढि़या बनबैत छलथि । जखन काजक गति बढ़लन्हि कारिगर सेहो रखलथि आ अपने २ बजे रातिधरि काज करैत छलथि । ओ अपन कमाइसँ पहिलवेर टेपरेकर्डर किनने छथि । ओ टेप रेकर्डर आ काठक एकटा अनमिरा एखनो हिनक घरमे सुरक्षित अछि ।
चाँदीक कारखाना खोलए लेल ओ कोलकतामे मजदूरक काज सेहो कएने छथि । हिनका कोलकाताक आरके ज्वेलर्समे चेलागिरिके नोकरी भेटल छल । चेलागिरि माने मालिकके आदेशपालक । जाहिमे पानि, चाह आनएसँ लऽ कऽ झाडुपोछा लगावएके काज छलन्हि । ओ मशीनसभ पोछबो करैत छलथि आ डाइसभके देखैत रहैत छलथि, केहन छैक । पवन कहैत छथि, ‘गरीबीक कारण कोलकतामे नोकरी नहि कएने छलहुँ, हमर भाग्य पलटा मारिदेने छल तँए ओहि समय ठीके स्थितिमे छलहुँ मुदा चाँदीके कारखाना खोलबाक अछि से मिशनमे चेलागिरिक नोकरीधरि करए पड़ल ।’ गीतामे स्पष्ट शब्दमे लिखल अछि, निराश नहि होउ, कमजोर अहाँक समय अछि अहाँ नहि ।
डाइसभके मुयना करैत ओ कारखानाक मुख्य कारिगर हिनका देखि लेलन्हि । ओकरा भान भऽ गेलैक । आबएके उदेश्य पवन सही–सही कहि देलन्हि । एकरबाद ओ हिनका सिखाइओ देलकन्हि । सामानसभ लइएकऽ ओ जनकपुरधाम एलथि ।
उएह कारिगरसभ हिनका जनकपुरधाममे कारखाना स्थापित करा देलन्हि । २०५० साल बैशाख १ गते लक्की ज्वेलर्सक नामसँ पेठिया बजारमे कारखाना स्थापित कएलन्हि । कोलकाताक कारिगढ़ महँग पड़ैत छल, स्थानीय युवासभके एहिमे ई प्रशिक्षित कएलन्हि । ओ कहैत छथि, ‘बेरोजगारसभके एहिमे रखलहुँ, कएटा तँ एहन छल दिनभरि बदमासी करैत रहैत छल मुदा आइ ओसभ सेहो बढि़या कारिगर भऽ गेल अछि ।’
कारखाना खोलबाक योजना कोना बनलैक एहिपर ओ कहैत छथि, ‘इजोरिया राति रहैक । रातिमे जलपानक संग एक गिलास पानि देने छल । गिलासके देखि लागल किए नहि एहन चाँदीके बनाएल जाए आ फेर कारखाना मिशनमे रातिएसँ लागि गेलहुँ ।’ ओ स्वयं स्वीकारैत छथि कोनोकाजक संकल्प अपरझट लैत आएल छी । एकटा जानकार कहने छथि – सोचके लऽ जाउ अपन ओहि शिखरपर ताकि ओहिसँ आगाँ तारा (सितारा) सेहो झुकि जाए । दोसर जानकार कहने छथि – सफलता अहाँधरि नहि आओत, अपितु अहाँके स्वयं ओकराधरि जाए पड़त !
२०२० कातिक ६ गते माता रामेश्वरी देवी आ पिता छबिलाल ठाकुरक पुत्रक रुपमे जन्म लेनिहार पवन चारि भाय बहिन छथि । दश कक्षाधरि अध्ययन कएने ओ अपने भलही पढ़ाइ आगाँ नहि बढ़ा सकला मुदा छोट भायके इन्जिनियर आ भतिजाके डाक्टर बनौने छथि । लड़का सेहो पढ़ाइ आ व्यवसाय दुनूमे लागल अछि । पुरान बजारमे रहल न्यू महालक्ष्मी ज्वेलर्सक जिम्मा लड़केके छन्हि । ‘कोनो व्यवसायमे गुडविल बनाकऽ राखब तखने प्रगति कऽ सकैत छी,’ ओ बेर–बेर कहैत रहथि छथि । अपन प्रगतिक मूल कारण इएह रहल सेहो ओ स्वीकार करैत छथि । एकटा जानकार कहने छथि – सिक्का दुनूके होइत अछि, हेडके सेहो, टेलके सेहो, मुदा समय मात्र ओकर होइत अछि, जे पलटिकऽ उपर अबैत अछि ।
पढ़ाइके हिसाबसँ भलेही लिखपढ़ मात्र कएने छथि मुदा मस्तिष्क हिनक बहुत तीक्ष्ण अछि । निर्णय लेबएके क्षमता हिनकामे अद्भूत अछि । हिनक निर्णय क्षमताक फाइदा एकबेर हिनक घरमे भेल डकैतीक क्रममे सेहो भेल छल । हिनक घरमे किछु वर्ष पूर्व बम आ गोली सहित डकैतक एक टोली पहुँच गेल छल । ओ शीघ्र गेट लग चदरापर लोहासँ आवाज लगावए लगलथि । जाहिसँ ओ टोलक लोकके किछु गलत काज भऽ रहल अछि भान भेल आ सभ हिनक घरमे पहुँच गेल छल । अपन चतुरतासँ बड़का दूर्घटना होबएसँ ओ बचेने रहथि ।
हिनक विवाह भारतक कम्तौलमे भेल अछि । ओ विवाहक सेहो रोचक कथा अछि । कम्तौलमे पहिनहिसँ हिनक परिवारक दूटा कुटमैती छल । हिनक फुआ आ पितिऔत भाय मोहन ठाकुरक विवाह भेल छल । फुआक बेटीक विवाहमे कम्तौल गेल रहथि ओहिठाम विवाहक गीतसभ चलि रहल छल, ओहि समय एकटा लड़की बीचमे सँ उठि बाहर जाए लगलीह हुनका देखि ई मोहित भऽ गेल छलथि । बादमे हुनकेसँ हिनक विवाह भेल ।
पवन कहैत छथि, ‘उएह कनियाँसँ विवाहक लेल साढे ३ वर्ष प्रतीक्षा कएने छलहुँ । शुरुमे हमर भैया स्व. विजय ठाकुर ओहि गाममे विवाह नहि करब कहैत अस्वीकार कऽ देलन्हि । मुदा विधिक आगाँ ककरो नहि चलैत छैक आ अन्तमे हुनकेसँ विवाह भेल ।’ ओ स्वीकारैत छथि हुनका लेल कनियाँ निर्मला लक्की साबित भेल अछि ।
व्यवसायक अतिरिक्त सामाजिक काजमे दिनभरि सक्रिय रहैत छथि । चैम्बर अफ कमर्शक मधेश प्रदेश अध्यक्ष, हिन्दू स्वयंसेवक संघ नेपालक धनुषा, महोत्तरी, सर्लाही जिलाक विभागिय संचालक, जानकी वृद्धाश्रमक उपाध्यक्ष, सीताराम गौशालाक सदस्य, जनकपुर सूनचाँदी व्यवसायी संघक अध्यक्ष छथि । पूर्वमे जनकपुर उद्योग वाणिज्य संघक कोषाध्यक्ष, राम युवा कमिटीक अध्यक्ष रहि चुकल छथि ।
जनकपुरधाममे एकटा होटल खोलएके तैयारीमे छथि । एक समय छल माछमाउसक बहुत सौखिन रहथि मुदा किछु वर्षसँ पूरा शाकाहारी भऽ गेल छथि । इच्छाके जे व्यक्ति अपना वशमे कऽ लैत अछि उएह आगाँ बढ़ैत अछि, शाकाहारी जीवन किछु एहने प्रतिवद्धतासँ हुनक शुरु भेल छल । ओ एकटा बात बराबर कहैत रहथि छथि, ‘संघर्ष कहिओ समाप्त नहि होइत अछि, ओकरासँ दू–दू हाथ हरेक दिन करब आवश्यक अछि ।’ अपन संतानसभके ई बातक मन्त्र सेहो सिखबैत रहैत छथि ।

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