मैथिली कविता – कोजगराक चान

Byदूधमती साप्ताहिक

११ कार्तिक २०८०, शनिबार १३:०३ ११ कार्तिक २०८०, शनिबार १३:०३ ११ कार्तिक २०८०, शनिबार १३:०३

 राकेश कुमार झा ‘रसिक’

देखू उगलैह कोजगराक चान ।
आयल ससुरारिसँ पान मखान ।
देखू शरद पुर्णिमाक चान ।।
देखू उगलैह कोजगराक चान ।।

सार बहिनोइ पचिसी खेलैत अछि ।
कौड़ी पचिसीक वनल मैदान ।
देखू उगलैह कोजगराक चान ।।

समधियनासँ अनेक पकवान आयल अछि ।
बाबू बटैत छथि पान मखान ।
देखू उगलैह कोजगराक चान ।।

आयल ससुरारिसँ अनेक पकवान ।
देखू उगलैह कोजगराक चान ।।

पान मखानक विशेष स्थान रहल अछि ।
पान, मखानपर रहैत अछि ध्यान ।
देखू उगलैह कोजगराक चान ।।

समधिके गारिसं गुनगान होइत अछि ।
होइत अछि भाभीक सेहो गुनगान ।
देखू उगलैह कोजगराक चान ।।

जनकपुरधाम २०

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