मैथिली कविताः कोजगरा

Byदूधमती साप्ताहिक

११ कार्तिक २०८०, शनिबार १२:०० ११ कार्तिक २०८०, शनिबार १२:०० ११ कार्तिक २०८०, शनिबार १२:००

♦ रमन कुमार झा

धवल इजोरिया सउसे पसरल
सुप सन नमहर चान यौ
बाबु भैया मखान बटैइ छथि
दाय माय करथि चुमान यौ
धवल इजोरिया सउसे पसरल
सुप सन नम्हर चान यौउ
बिच अंगनमे डाला सजल
डाली मे दूबि–धान यौ
ब्रह्मण बाबू दुर्वाक्षत दए छथि
गजबे मिथिलाके विधान यौ
धवल इजोरिया सउसे पसरल
सुप सन नम्हर चान यौ
भौजी संग पचीसी खेलब
कौरी भरल थार यौ
के जीतल के हारल सखी हे
चर्चा गामे गाम यौ
धवल इजोरिया सउसे पसरल
सुप सन नम्हर चान यौ
धोती कुर्ता पाग पहिरने
मुँह भरल छन्हि पान यौ
सुन्नर सन सुकमार दुल्हा
मिथिला हमर महान यौ
धवल इजोरिया सउसे पसरल
सुप सन नम्हर चान यौ

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