मैथिली कविता – कोजागरा

Byदूधमती साप्ताहिक

११ कार्तिक २०८०, शनिबार ११:४२ ११ कार्तिक २०८०, शनिबार ११:४२ ११ कार्तिक २०८०, शनिबार ११:४२

 प्रो. शुभ कुमार वर्णवाल

जनक नन्दिनी सियाक भूमि

पावन मिथिला धाम यौ ।

नव वियाहल वर घर-आंगन।

नगर ‘कोजागरा’ गाम यौ ।। 1 ।।

शरद पूर्णिमा दिवस कोजागरा

आयोजन धूमधाम यौ ।

कनियाँक घरसँ पाग-वस्त्र संग

पान, फल, कौरी, मखान यौ ।। 2 ।।

धर्म सनातन धर्मावलम्बी,

पावन खीर निर्माण यौ ।

भरि राति खीर चानक आगू

अमृत चांदनी चान यौ ।। 3 ।।

लक्ष्मी भगवतीकेँ समक्षमे

दीपक ज्योति सम्मान यौ।

व्रत उपासना ओ आराधना

कृपा मातु कल्याण यौ ।। 4 ।।

शरद पूर्णिमा दिवस महारास

लीला कृष्ण भगवान यौ ।।

लक्ष्मी माता स्वयं भ्रमण पर

धन वर्षाक वरदान यौ ।। 5 ।।

धार्मिक मान्यता तिथि महत्ता

शरद पूर्णिमा महान यौ ।

‘कोजागरा’ पूजा उड़ीसा,

बिहार, बंगाल, आसाम यौ ।। 6 ।।

मिथिलाक संस्कृति जगमे नामी

सभ पावनि एहि ठाम यौ ।

संरक्षण अछि अति आवश्यक

रीति मैथिल पहिचान यौ ।। 7 ।।

 पूर्व प्राचार्य कालिदास विद्यापति साइंस काॅलेज, उच्चैठ, बेनीपट्टी, मधुबनी (बिहार)

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