मैथिली कविता – साहित्य सरिता

Byदूधमती साप्ताहिक

११ कार्तिक २०८०, शनिबार ११:३० ११ कार्तिक २०८०, शनिबार ११:३० ११ कार्तिक २०८०, शनिबार ११:३०

 काशीकान्त झा

हम साहित्य सरितामे कऽ रहलहुँ स्नान
साहित्य हमर साहित्यिक हम कऽ रहलहुँ रसपान
हम गागर भरि सभदिन लाबी साहित्यिक धारसँ
अपन समाजके पार लगाबी जीवनके मझेधारसँ
करी कल्पना नित्य नवीन हम रहे सदा मुस्कान
साहित्य हमर……..

साहित्यिक हो सभदिन चर्चा तेहने किछु बनाबी
मूर्ख चपाट अज्ञानी के एहने किछु पाठ पढ़ाबी
हुए समाजक सभ अंगमे साहित्यिक गुणगान
साहित्य हमर………
भक्तिभाव राजनीतिपर कसिक कलम चलाबी
वर्तमान समाजक सभटा दुर्गूण कोसो दुर भगाबी
बस साहित्यिक माध्यमसँ हुए सदा कल्याण
साहित्य हमर……….

बिनु साहित्य मर्म नई बुझल नई भेटैत अछि राह
अन्धकारमे रहत नई केओ बस एतबहिटा चाह
साहित्य प्रेमी सभ बढ़ैत रहे आ भेटनि सम्मान
हम साहित्य सरितामे कऽ रहलहुँ स्नान ! !

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