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मैथिली साहित्य

सन्दर्भ उमा स्मृति दिवसः घड़ीक सुइकें किओ पकडि़ लेने छल

सुजीत कुमार झा २०६५ पुष अर्थात रविक राति रेडियो मिथिलाक समय सन्दर्भ कार्यक्रममे जनतान्त्रिक तराई मुक्ति मोर्चा राजन मुक्ति समूहक वार्ता टोली सदस्य मनोज मुक्तिकेँ बजौने रही । स्टुडियो भीतर जाइए रहल छलहुँ की केयर नर्सिङ्ग होमसँ नेपाल पत्रकार महासंघ धनुषाक तत्कालीन सचिव अजित तिवारीक टेलिफोन आएल आ ओ जानकारी …

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डेराइते–डेराइते शुरु भेल मैथिली कवि गोष्ठी कोना इतिहास बनि गेल बुझहीमे नहि आएलः काशीकान्त झा, संयोजक, मासिक कवि गोष्ठी जनकपुरधाम

युवाकवि काशीकान्त झाक संयोजकत्वमे ५९ महिनासँ जनकपुरधाममे कवि गोष्ठी निरन्तर होइत आएल अछि । महिनाक एक शनि दिन होइत आएल ओ कवि गोष्ठीक कारण दर्जनो व्यक्ति कवि बनलन्हि अछि । ६०अम कवि गोष्ठीक तैयारीमे लागल कवि काशिकान्तजी संग दूधमतीक सम्पादक सुजीत कुमार झा बातचित कएलन्हि । प्र. ६०अम कवि गोष्ठीक …

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मैथिली बालकथाः संकल्पक दिन

सुजीत कुमार झा अशोक आ रंजितामे प्रगाढ़ मित्रता छल । एकहिसंग पढ़नाई लिखनाई आ खेलनाई होइत रहैत छल । कखनो एक गोटे परेशान तऽ दोसर सेहो ओकरा लेल परेशान भऽ जाइत छल । दुनूक घर आमने सामने छल । जखन मोन भेल एक दोसरके घर पहुँच जाइत छल । बजारमे …

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मैथिली बालकथाः कौवा उडि़ए रहल अछि

सुजीत कुमार झा जन्मक समय ओकर राशिक नाम ‘ब’ सँ निकलल छल, तएँ ओकर नाम बजरंग राखल गेल । नामे अनुरुप भगवान हनुमान जकाँ मस्तिष्कक बहुत तेज छल अखने नहि कहल जा सकैत अछि, तखन स्मरण शक्ति अद्भुत, खिस्सा पिहानी सुनएके सौखिन छल । कतबो सुनाउ, एकटा खिस्सा समाप्त भेल …

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मैथिली बालकथाः तीन दोस माछ

सुजीत कुमार झा एकटा बड़का पोखरि छल । पोखरि ओहँुना गहिर होइत अछि, तएँ ओहिमे माछक कतेको प्रिय भोजनसभ रहैत अछि । माछ एहने स्थानपर रहनाई पसिन करैत अछि । एहि पोखरिमे भलेही व्यवसायिक माछपालन नहि होइत छल मुदा तैयो बहुत माछ रहैत अछि । अण्डा देबएके लेल ई पोखरिमे …

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मैथिली बालकथाः सुन्दर बिलाडि़

सुजीत कुमार झा एक बृद्ध दम्पति रहथि । एक गोटेके नाम कामेश्वर आ दोसरके फूलवती छलन्हि । धियापुता नहि भेल रहन्हि हुनकासभके, समय काटएके समस्या छल । ओ घरके बहुत साफसुत्थर रखैत छलथि । दलानके छोडि़कऽ घरक चारुकात फूलक क्यारी लगौने छलथि । दिनभरि फूलसभके कोरियाबएमे लागल रहैत छलथि । …

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नाटक मञ्चनक अभावके कारण नाटककारक कमी

जयन्त ठाकुर जनकपुरधामक रंगमञ्चक इतिहास बहुत समृद्ध अछि । एहिठाम नाटक मञ्चनके पुरान परम्परा अछि । मैथिली रंगमञ्चके समृद्ध बनाबएमे जनकपुरधामक महत्वपूर्ण भूमिका अछि कहल जाए तऽ अतिशयोक्ति नहि हएत । मुदा बित किछु वर्षसँ देखल जाए तऽ जनकपुरक रंगमञ्च सुस्त गतिसँ आगा बढि रहल अछि । पहिने एहिठाम मञ्चीय …

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गे करैला फेम माही

जयन्त ठाकुर । ओ मैथिली हल्का हल्का बुझैत छथि । ओ मैथिली बाजएमे असमर्थ छथि । मुदा मैथिली रंगमञ्च हुनकर अभिन्न अंग बनि गेल अछि । ओ मैथिली नीकसँ बाजएमे असमर्थ रहितो मैथिली गीतपर जखन नृत्य करैत छथि तऽ कयोके स्यावासी पबैत छथि । एना लगैत अछि जेना हुनक शरिरक …

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मैथिली बालकथाः बाघ पकड़एवला मनुष्य

सुजीत कुमार झा । एक गाममे एकटा जियालाल नामक हजाम छल । ओ गाममे ओकरा बहुत बड़का समझवाला बुधियार लोक बुझल जाइत छल । एकबेर जियालाल कोनो कामसँ दोसर गाम जाएके लेल घरसँ निकलल । सँगमे दाढ़ी काटएवला पेटी सेहो रखने छल । बाटमे बहुत बड़का आ घना जंगल छल, …

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मैथिली वाल कथाः चिल्होरिक ज्ञान

सुजीत कुमार झा । ओ ओहिना चिल्होरि दिस तकैत रहल । ओकरा विश्वासे नहि भऽ रहल छल किछुदेर पहिने एतेक मीठ–मीठ बाजएबला कोना ठैकि लेलक । चिल्होरिके किछुदेर पहिने ओ स्वयं पकड़ने छल । बहुत प्रयासक बाद ओे जालमे फसल छल । शिकारक क्रममे एतेक मेहनत कहिओ काल होइत अछि …

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