मैथिली साहित्य

सोहन ठाकुरक स्मरणमेः यूं तो बहुत दोस्त हैं जिंदगी में, पर तेरे जैसा यार नहीं है इस दुनिया मे….

सुजीत कुमार झा कहीं देखा हैं तुमने उसे जो मुझे सताया करता था जब भी उदास होती थी मैं मुझे…

मैथिली कविताः हे कृष्ण जनकपुर आउ

काशिकान्त झा रसिक बहुत दिनसँ रास करैछी कनिका कष्ट उठाउ हे कृष्ण जनकपुर आउ सगरो पसरल काल कोरोना भेलई सभके…

मैथिली कविताः सखि हे जागल मनके आस

काशिकान्त झा रसिक सखि हे जागल मनके आस भोरे कौवा कुचरल आंगन बात लगैय खास धकधक हमर छाती धरके फरके…

मैथिली गीतः चिन देशसँ आएल मास्टरनी

प्रेम झा चिन देशसँ आएल मास्टरनी, घुमि घुमि लैया क्लास गे मूर्ख बुझैया नेपाली नेता के, जग भरी होई उपहास…

मैथिली कविताः घर सोझाके अशोक गाछ

  – चन्द्रकिशोर कहियो सुसकैय कहियो घेघिआईय शब्द गुमसुम परल रहैय जस के तस लेकिन पुरान बाकस जकां बचैले हय…

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