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सलहेश पूजा विशेषः वर्षक एक दिन मात्र फुलाएबला फुलक आकर्षण

सुजीत कुमार झा ।


सिरहाक लहानसँ ३ किलो मिटर पश्चिम दक्षिणमे अवस्थित फुलवारीमे सयोेटा गाछबृक्षसभ अछि । ओहिमेसँ एकटा गाछमे नव बर्षक पहिल दिन मात्रे फूल फुलाइत अछि, सेहो माला आकारमे ।

सिरहाक ई मोन लोभाबएबला प्राकृतिक विशेषता हरेक बर्ष हजारो नेपाली आ भारतीयके आकर्षित करैत आबि रहल अछि । नव बर्षक पहिल दिन मात्रे फूल फुलाएबला एहि चमत्कारके सलहेश महोत्सवके रुपमे मनाओल जाइत अछि ।
नव बर्ष कहिते मिथिलावासीके मोन फुलवारीमे जा कऽ रुकि जाइत अछि । फुलवारीक मध्यभागमे रहल मालिन मन्दिरक दक्षिण सटल हारमक गाछके मध्यभागमे फुलाएबला माला आकारक फूलके सलहेशक गाथासँगे जोडल जाइत अछि ।
मन्दिरक पुजारी नागेश्वर धामीक अनुसार हरेक नव बर्षक दिन फूलाएबला ई फूलके राजा सलहेश आ दौना मालिनके प्रेमक प्रतीकके रुपमे लेल जाइत अछि । एकहिटा गाछमे उएह स्थानमे उएह आकारक फूल फुलेनाइके अलौकिके कहए पड़त हुनक कहब अछि ।
कहल जाइत अछि दौना मालिन सलहेशके हृदयसँ प्रेम कएलाक बादो विवाह करए नहि सकलाक कारण प्रत्येक वर्ष राजाक प्रतीक्षामे वैशाखक पहिल दिन हारमके गाछमे फूलके माला भऽ कऽ नजर अबैत छथि ।
सलहेशक इतिहास


६अम–७अम शताब्दीमे मिथिलाक महिसौथा स्थानमे सलहेशक जन्म भेल छल । सलहेशक जन्मक समयमे मिथिलामे सामाजिक आ राजनीतिक आरजकता व्याप्त छल । छोट छोट ग्राम पिता बिचक अन्तरद्वन्दमे आम जनता पिचायल छल । सलहेश तात्कालिन सामन्त विरुद्ध सुसंगठित शक्तिक निर्माण कऽ सभकेँ परास्त करैत राज्य स्थापनाक कएलन्हि ।
पूर्वमे कोशी आ पश्चिममे गण्डकी उत्तरमे चुरे पर्वत शृंखला आ दक्षिणमे गंगा तक मैदानी भागमे सलहेशक शासन सत्ता स्थापना भेल । बाहरी आक्रमणकारी सँ एहि क्षेत्रकेँ सुरक्षित बनाबए सलहेश अत्यन्त कुशल आ युद्धकलामे निपुण सैन्य शक्तिक स्थापना कएलन्हि ।
आम जनताक जिविकाक माध्यम कृषि आ पशु पालन तथा प्राकृतिक स्रोत साधनमे आम जनताक पहुँच सुनिश्चित कएलन्हि ।

सलहेसक समाजमे प्रभाव
तत्कालिन समाजमे सलहेस अत्यन्त न्याय प्रेमी शासक मानल जाइत छलाह । जातिय द्वन्द्व बढल समयमे सलहेस सभ गोटेके संगठित कएलन्हि । सभ जाति के लोक सलहेसक नेतृत्वके स्वीकार कएलन्हि । मिथिला समाजमे सलहेस आ हुनक सहयोगी पात्रके सयो वर्ष वितलाक बादो कियो नहि विसरि सकल । सलहेसके न्यायक प्रतिमूर्ति मानल जाइत अछि ।
कोनो इच्छा विमारी, भुख, कर्जा , पीडासँ मुक्तीक लेल अखनो सलहेसक कोवला कएल जाइत अछि ।
सलहेसक भाई मोतीरामके पहलमान सभ स्मरण कऽ मात्र अखाड़ामे उत्तरैत अछि । जंगलमे लकरी आ अन्य उत्पादित समान आनए जायबला सभ हिंसक जानवर सँ बचए सलहेसक भगिना कारिकन्हा आ वहिन वनसप्तीके पूजा करैत अछि ।
अर्थात मिथिलाक समाजिक जिवनमे सलहेसक प्रभाव एखनो अत्यधिक अछि ।

किराँत सँगक सम्बन्ध
मिथिलामे सलहेशक राज्य स्थापना भेलाक बाद सभ सँ बडका चुनौती जनताकेँ एकजुट बनाएब आ इएह बलमे सीमाके सुरक्षित करब रहल छल ।
मिथिलाके गण्डक , गंगा आ कोशीसँ एक प्रकारक सुरक्षा चक्र प्रदान छल । उत्तर दिससँ मात्र मिथिलाके आक्रमण होएबाक बेसी खतरा छल । तिब्बत आ भुटानक नरेश सँगक संलग्नता आ मिथिलाक खुँखार डाकु चुहर मलक सहयोगमे बेर बेर आक्रमण भऽ रहल छल ।
मिथिलाक मैदानी भूमि अन्न आ पशुधनके दृष्टि सँ अत्यन्त समृद्ध भेलाक कारण आक्रमणकारी सभक एहि क्षेत्र उपर दृष्टि छल । आक्रमण कऽ फिर्ता होबएबला तिब्बती सैनिक सभ महाभारत पर्वत श्रृंखलामे रहल किराती सभके सेहो लुटपाट करैत छल ।
अर्थात मिथिला आ किराँत दूनु समान्य रुपमे आक्रमणक पीडासँ ग्रस्त छल ।
ओहि समयमे मैथिल आ किराँत संयुक्त सैन्य निर्माण करब आ सामुहिक प्रतिबाद करब सलहेसक प्रस्ताब किराँती सैन्यपति केवला किराँत स्वीकार कएलन्हि ।
किछ दिनक वाद पकरियागढ आ तरेगना गढ लडाइमे तिब्बत भुटान आ चुहरमलक संयुक्त सैन्य शक्तिके परास्त कऽ भुटानी नरेश सुंगके सलहेस बन्दी बनाबय सफल भेल रहथि । अर्थात किराँत सँगक संयुक्त सैन्य निर्माणक वाद बाहरी आक्रमणकारी पराजित होबए लागल छल ।
सलहेसक उपासक सभ हुनका देवताक रुपमे पूजा करए लागल छल । तकर निरन्तरता अखनो जारीए अछि ।

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