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सन्दर्भ उमा स्मृति दिवसः घड़ीक सुइकें किओ पकडि़ लेने छल

सुजीत कुमार झा
२०६५ पुष अर्थात रविक राति रेडियो मिथिलाक समय सन्दर्भ कार्यक्रममे जनतान्त्रिक तराई मुक्ति मोर्चा राजन मुक्ति समूहक वार्ता टोली सदस्य मनोज मुक्तिकेँ बजौने रही । स्टुडियो भीतर जाइए रहल छलहुँ की केयर नर्सिङ्ग होमसँ नेपाल पत्रकार महासंघ धनुषाक तत्कालीन सचिव अजित तिवारीक टेलिफोन आएल आ ओ जानकारी करौलन्हि जे पत्रकार उमा सिंहकेँ अज्ञात समूह खुरिया प्रहार कऽ आक्रमण कऽ देलक अछि । किछु देर तऽ हम अबाकँे रहि गेलहुँ ।


फेर हमर बुझयमे नहि आबि रहल छल की कएल जाए ? नरसिंह होम जाई वा कार्यक्रम चलाबी । कार्यक्रम चला कऽ नर्सिङ्ग होम जाएब जखन हम निर्णय लेलहुँ, बहुत कठिन बुझा रहल छल । रेडियोमे कार्यक्रमक धुन शुरु भऽ गेल मुदा शब्द नहि भेट रहल छल की बाजु ? बहुत नर्भस जकाँ लागि रहल छलहुँ । हमर नर्भस चेहरा देखि अतिथि सेहो चुप्प छलथि ।
पत्रकार उमा सिंहकँे हम बहुत दिनसँ चिन्हैत छी से नहि । एहि प्रकारक पत्रकारोसँग घटना हएत एकर कल्पना नहि कएने छलहुँ तनाबक बड़का कारण बनल । जनकपुरमे दोसर रेडियो रेडियो टुडे शुरु भेल रहैक आ एक–दू गोटेक मँुहसँ सुन्ने रही जे टुडे सिरहासँ दू गोटे पत्रकार अनलक अछि । फेर टुडेक सञ्चालक आदरणीय अनुराग गिरी बेर–बेर उमाक विषयमे कहथि, ‘ई लम्बा रेसक घोड़ा बनत ।’
कतेक दिन तऽ ओ हमरो कहथि, ‘तोरा सभकँे किओ चुनौति देतहुँ तऽ ओ उमे सनक पत्रकार हेतैक ।’
कान्तिपुरक कतार संस्करणमे कार्यरत पत्रकार श्याम सुन्दर शशि सेहो कतारसँ एक दिन मेल पठौने रहथि जाहिमे, सम्भावना बला पत्रकार सभमे उमाक नाम विशेष रुपसँ उल्लेख कएने रहथि ।
रेडियो टुडेक संस्थापक स्टेशन मैनेजर रमेश रञ्जन झा उमासँ बढ़ बेसी प्रभावित रहथि । कतेक दिन बातचितक क्रममे बाजल रहथि, ‘अन्तर्वार्तामे जाहि ढङ्गसँ ओ प्रश्न करैत अछि, मोन आनन्दित भऽ जाइत अछि ।’
एक दिन क्षेत्रीय स्रोत केन्द्र विराटनगरक लेल एकटा फेलोसिप भेटल रहए । ओहिमे केना लेख लिखी आइडीया लेबए जनकपुर टुडेक सम्पादक वृजकुमार यादव लग गेल रही । ओ किछु आइडिया देलन्हि आ कहलन्हि, ‘उमा बैसल छैक कम्प्यूटर पर, मुँहसँ कहबै भटाभट लिख देत ।’
संयोग कही जे एक गोटेकँे टेलिफोन चलि आएल, हम अन्तः चलि गेलहुँ । मुदा तहिया धरि उमाकेँ नहि देखने रहियैक ।
एक दिन अहिना रेडियो टुडेमे ओ एक गोटे महिलाकँे अन्तवार्ता लैत रहथि । सुनलहुँ उठान गजबकेँ छल । प्रात भेने हमर समाचार कक्षक सहयोगी बविता ठाकुर आ सीमा चौधरीकेँ कहने रहियै, ‘अहाँ सभसँ बड़ उप्पर उमा सिंह अछि, अहाँ सभ कहिया हुनका जकाँ कार्यक्रम चलाएब ।’
बबिता रेडियो पत्रकारकेँ रुपमे नम्बर एकपर छथि मुदा अन्तरवार्ता सहितक कार्यक्रम नहि चलबैत छथि । कनी हुनकापर दबाब देबाक लेल व्यंगो कएने छलहुँ ।
उमासँ पहिल भेट नेपाल परिवार नियोजन संघ धनुषक एकटा कार्यक्रममे भेल छल । महिला पत्रकारकेँ नामसँ निमन्त्रण पत्र नहि एला पर जाहि ढङ्गसँ हुनक आक्रोश देखलहुँ किछु देर हुनका दिस तकिते रहि गेल रही । ओ चुनौतिपूर्ण स्वरमे बाजल रहथि, ‘निमन्त्रण देबयमे सेहो भेदभाव ? ई आब नहि चलत ।’
हमर अग्रज सभ जे उमाक विषयमे परिचय करौने रहथि सएह देखबामे आएल ।गजबके एग्रेसन ।
ओ स्वयं एकटा राजनीति दलसँ पीडि़त रहथि । हुनक बाबू आ भायकेँ माओवादी जनयुद्ध कालमे हत्या कऽ देने छल । हमरा लागल पीडि़त होइत–होइत आब हुनक भीतर एहन ज्वाला चलि आएल अछि जे शोषण वर्दास्त नहि कऽ सकैत अछि । ई आशयकेँ बात हुनक एहि बीचमे आएल किछु लेख सभसँ सेहो प्रष्ट भऽ रहल छल ।
उमासँ हमरा बातचित तऽ नहि भेल छल मुदा हम हुनकासँ धीरे–धीरे प्रभावित होबए लागल छलहुँ । आ तएँ समय सन्दर्भ कार्यक्रम चलाएब बहुत कठिन भऽ रहल छल ।
प्रारम्भ हुनका उपर आक्रमण भेल ताहिसँ कएने रही आ अन्त हुनका खुनक अभाव भऽ गेल अछि, ताहिसँ कएलहुँ । समय सन्दर्भ कार्यक्रम आन दिन बहुत छोट लगैत छल माकेर्टिगंवलाके विज्ञापन कम राखल जाए आनदिन कहैत छलहुँ मुदा रवि दिन तऽ जेना बुझाए घड़ीक सुइकेँ किओ पकडि़ लेने होइ । हमरा पहिलबेर समय सन्दर्भ चलाबएमे कठीन भेल छल । ओहिदिन रेडियामे अतिथिसँ की पुछलियैक आ ओकी जबाब देलन्हि भगवाने जाने ।
उमा ओना आई ई संसारमे नहि छथि । ई शब्द लिखब तहिना कठिन भऽ रहल अछि जेना रवि दिन समय सन्दर्भ चलाबएमे कठिन भेल छल ।
–रिपोर्टर डायरी पुस्तक ।

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